विश्व किडनी दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित SGPGI में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और किडनी प्रत्यारोपण विभागों ने SOTTO के सहयोग से वॉकथॉन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। विशेषज्ञों ने किडनी रोग की रोकथाम, पर्यावरणीय प्रभाव और अंगदान के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
विश्व किडनी दिवस के अवसर पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और किडनी प्रत्यारोपण विभागों द्वारा राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) के सहयोग से एक विशेष वॉकथॉन और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किडनी स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता और अंगदान के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत किडनी स्वास्थ्य और deceased donor transplantation के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित वॉकथॉन से हुई। इसके बाद संकाय सदस्यों, स्वास्थ्यकर्मियों, छात्रों और आम नागरिकों की एक सभा आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने किडनी रोगों की रोकथाम और उपचार पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नारायण प्रसाद ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए बताया कि विश्व किडनी दिवस हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। उन्होंने इस वर्ष की थीम “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य – लोगों की देखभाल, ग्रह की रक्षा” का उल्लेख करते हुए पर्यावरण प्रदूषण और प्लास्टिक व विषाक्त पदार्थों के किडनी स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किडनी रोग का समय पर पता लगाने और इसके बढ़ने से रोकने के लिए जागरूकता और नियमित जांच के महत्व पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने ग्रीन नेफ्रोलॉजी की अवधारणा को आगे बढ़ाने में मृत दाता प्रत्यारोपण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एम.एस. अंसारी ने किडनी रोगों के बढ़ते बोझ और इसके प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से गुर्दे की पथरी को किडनी फेलियर का एक संभावित कारण बताया और कहा कि इसे सही आहार और जीवनशैली में बदलाव के जरिए काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने किडनी रोगों के समग्र उपचार और प्रत्यारोपण कार्यक्रम में यूरोलॉजी विशेषज्ञों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए SGPGI के निदेशक प्रोफेसर आर.के. धीमन ने अंगदान को एक महान और जीवनदायी कार्य बताया। उन्होंने राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO), क्षेत्रीय संगठन (ROTTO) और राज्य स्तर पर SOTTO के विकसित ढांचे के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अंगदान कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए व्यापक जागरूकता और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने SGPGI में हाल ही में सफलतापूर्वक किए गए मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल और प्रत्यारोपण को संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
राज्य प्रत्यारोपण नेटवर्क की ओर से बोलते हुए डॉ. हर्षवर्द्धन ने उत्तर प्रदेश में SOTTO की संरचना और इसके कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में मृत दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है और SGPGI इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर SGPGI के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने अंगदान के प्रति युवाओं और छात्रों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी बेटी द्वारा लिखी गई एक भावनात्मक कविता भी सुनाई, जिसमें अंगदान के मानवीय और भावनात्मक महत्व को दर्शाया गया।
नेफ्रोलॉजी विभाग की प्रोफेसर अनुपमा कौल ने कहा कि दुख के समय में किसी परिवार द्वारा अंगदान का निर्णय गहरी करुणा और मानवता का प्रतीक होता है। उन्होंने अंगदान को मां के निस्वार्थ प्रेम से तुलना करते हुए इसे समाज को दिया गया सबसे बड़ा उपहार बताया।
कार्यक्रम के अंत में उन संस्थान सदस्यों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मृत दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सम्मानित लोगों में एनेस्थिसियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभागों के वरिष्ठ संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, कर्मचारियों और SOTTO टीम के सदस्य शामिल थे।
इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान ने किडनी स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने और अंगदान के महत्व को समाज तक पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
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