लखनऊ स्थित SGPGI के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में पहली बार नई अत्याधुनिक O-Arm और स्पाइनल नेविगेशन तकनीक की मदद से रीढ़ की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इस हाईटेक तकनीक से मरीज को कम दर्द, कम खून बहाव और तेजी से रिकवरी का लाभ मिलेगा।
संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ने एडवांस ट्रॉमा और स्पाइन केयर के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ट्रॉमैटिक D10 वर्टिब्रल फ्रैक्चर से पीड़ित मरीज की अत्याधुनिक O-Arm और स्पाइनल नेविगेशन सिस्टम की मदद से सफल मिनिमली इनवेसिव स्पाइनल फिक्सेशन सर्जरी की गई। यह सर्जरी न केवल तकनीकी रूप से बेहद जटिल थी, बल्कि उत्तर प्रदेश में उन्नत ट्रॉमा केयर की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है।
इस सफल सर्जरी को डॉ. पवन वर्मा और डॉ. आशुतोष कुमार ने एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. अरुण श्रीवास्तव और डॉ. अवधेश जायसवाल के मार्गदर्शन में अंजाम दिया। वहीं एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. वंश और डॉ. प्रतीक बैस ने किया।
बिना बड़े चीरे के हुई हाईटेक स्पाइन सर्जरी
डॉक्टरों ने मरीज की रीढ़ को स्थिर करने के लिए “परक्यूटेनियस पेडिकल स्क्रू फिक्सेशन” तकनीक का उपयोग किया। यह एक अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी तकनीक है, जिसमें शरीर पर बड़े चीरे लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस तकनीक के कई फायदे हैं:
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कम रक्तस्राव
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मांसपेशियों और ऊतकों को न्यूनतम नुकसान
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ऑपरेशन के बाद कम दर्द
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छोटे निशान
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मरीज की तेजी से रिकवरी
डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में पिछले पांच वर्षों से स्पाइनल ट्रॉमा की मिनिमली इनवेसिव सर्जरी नियमित रूप से की जा रही है। लेकिन नई O-Arm और नेविगेशन तकनीक के आने से सर्जरी की सटीकता, सुरक्षा और गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है।
क्या है O-Arm और स्पाइनल नेविगेशन सिस्टम?
डॉक्टरों के अनुसार यह तकनीक सर्जरी के दौरान रियल-टाइम थ्री-डायमेंशनल इमेजिंग उपलब्ध कराती है। इसके साथ कंप्यूटर आधारित नेविगेशन सिस्टम जुड़ा होता है, जिससे सर्जन बेहद सटीक तरीके से स्पाइनल इम्प्लांट लगा सकते हैं।
खासकर जटिल स्पाइन ट्रॉमा मामलों में यह तकनीक काफी मददगार साबित होती है।
इस तकनीक के सबसे बड़े फायदे:
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सर्जरी की अधिक सटीकता
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इम्प्लांट लगाने में बेहतर नियंत्रण
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मरीज और डॉक्टर दोनों के लिए कम रेडिएशन एक्सपोजर
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जटिल मामलों में भी अधिक सुरक्षा
अब यूपी के मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा महानगरों में
डॉ. पवन वर्मा ने बताया कि O-Arm और नेविगेशन सिस्टम की स्थापना एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। इससे अब उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के मरीजों को उन्नत स्पाइन सर्जरी के लिए दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े महानगरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि अब अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय स्पाइन और ट्रॉमा केयर मरीजों को उनके अपने राज्य में किफायती लागत पर उपलब्ध होगी।
गरीब मरीजों के लिए बड़ी राहत
डॉक्टरों ने बताया कि इतनी आधुनिक तकनीक होने के बावजूद पात्र मरीजों को यह सुविधाएं अतिरिक्त आर्थिक बोझ के बिना उपलब्ध कराई जा रही हैं।
यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज भी अब हाई-प्रिसिजन स्पाइन सर्जरी का लाभ उठा सकेंगे।
24 घंटे के भीतर आने वाले मरीजों को मुफ्त इलाज
एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी ट्रॉमा केयर सेवाओं के तहत दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर आने वाले मरीजों को पहले 24 घंटे तक मुफ्त आपातकालीन इलाज की सुविधा दी जाती है।
इससे गंभीर और जानलेवा स्पाइनल इंजरी वाले मरीजों का समय रहते इलाज संभव हो पाता है।
SGPGI को क्वाटरनरी केयर सेंटर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
डॉ. अवधेश जायसवाल ने कहा कि यह उपलब्धि SGPGIMS में एडवांस स्पाइन केयर सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।
वहीं SGPGI के निदेशक पद्मश्री डॉ. आर.के. धीमन ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि O-Arm और नेविगेशन तकनीक की स्थापना SGPGIMS को एक सच्चे क्वाटरनरी केयर सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की आधुनिक तकनीकें SGPGIMS को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्नत चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बना रही हैं।
विशेषज्ञों की पूरी टीम दे रही 24 घंटे सेवा
एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की न्यूरोसर्जरी टीम में डॉ. वेद प्रकाश मौर्य, डॉ. सौमेन कांजीलाल और डॉ. श्रेयश राय भी शामिल हैं, जो मरीजों को चौबीसों घंटे न्यूरोसर्जरी और स्पाइन ट्रॉमा केयर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
यह नई तकनीक न केवल इलाज को अधिक सुरक्षित बनाएगी बल्कि भविष्य में उत्तर प्रदेश में ट्रॉमा और स्पाइन केयर के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम करेगी।
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