लखनऊ स्थित SGPGIMS के जनरल अस्पताल में स्तनपान कराने वाली माताओं की सुविधा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए समर्पित ‘ब्रेस्टफीडिंग कियोस्क’ का उद्घाटन किया गया। यह पहल शोध आधारित अध्ययन और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences यानी एसजीपीजीआईएमएस ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक संवेदनशील और मानवीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। लखनऊ स्थित संस्थान के जनरल अस्पताल परिसर में अब स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए समर्पित ‘ब्रेस्टफीडिंग कियोस्क’ शुरू किया गया है। यह सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि उन हजारों माताओं की गरिमा, गोपनीयता और मानसिक सहजता से जुड़ा कदम है, जिन्हें अस्पतालों के सार्वजनिक क्षेत्रों में स्तनपान कराने के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ता था।
इस विशेष कियोस्क का उद्घाटन आज सुबह 10:20 बजे संस्थान के निदेशक Radha Krishna Dhiman, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक Devendra Gupta, चिकित्सा अधीक्षक R Harshvardhan, जनरल सर्जन Brijesh Singh, वरिष्ठ चिकित्सक Prerna Kapoor और इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष Meenakshi Singh ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
इस दौरान अस्पताल के चिकित्सक, छात्र, कर्मचारी और Inner Wheel Club of Lucknow Abhyuday के सदस्य भी मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह का माहौल भावनात्मक और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ दिखाई दिया।
कार्यक्रम के दौरान एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक प्रो. राधा कृष्ण धीमन ने कहा कि किसी भी मां को अपने बच्चे की देखभाल और अपनी गरिमा के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थान भविष्य में जरूरत के अनुसार ऐसे और स्तनपान कियोस्क स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि हर मां खुद को सुरक्षित और सहज महसूस कर सके।

अपने संबोधन में चिकित्सा अधीक्षक प्रो. आर. हर्षवर्द्धन ने कहा कि एसजीपीजीआईएमएस हमेशा रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने इस पहल को अस्पताल प्रशासन की संवेदनशील सोच और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ा कदम बताया।
वहीं, इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी सिंह ने सामुदायिक सेवा को समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी लोगों के जीवन में बड़ी राहत लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि यह नया स्तनपान कियोस्क माताओं को जरूरी गोपनीयता और आराम देगा और यह सेवा भाव की मिसाल बनेगा।
दरअसल, इस पहल की शुरुआत एक गंभीर शैक्षणिक शोध के बाद हुई। अस्पताल प्रशासन विभाग के एक स्नातकोत्तर छात्र द्वारा किए गए शोध-प्रबंध में यह सामने आया कि अस्पतालों के ओपीडी क्षेत्रों में स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अध्ययन का विषय था— “रोगी-अनुकूल देखभाल के लिए एक प्रशासनिक पहल: बाह्य रोगी सेटिंग्स में स्तनपान कियोस्क की आवश्यकता का मूल्यांकन।”
इस शोध में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। सर्वेक्षण में शामिल 61 प्रतिशत स्तनपान कराने वाली माताओं ने बताया कि सार्वजनिक ओपीडी क्षेत्रों में स्तनपान कराने के दौरान उन्हें असहजता महसूस होती है। वहीं 71.4 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि अस्पताल में उनके लिए सबसे जरूरी चीज एक निजी और सुरक्षित स्थान है, जहां वे बिना झिझक अपने बच्चे को स्तनपान करा सकें।

शोध में यह भी सामने आया कि आरामदायक बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण और सुरक्षा की भावना स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। अस्पताल प्रशासन ने इन निष्कर्षों को गंभीरता से लेते हुए इस दिशा में तत्काल कदम उठाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है, लेकिन अस्पतालों में गोपनीयता और अनुकूल माहौल की कमी कई बार महिलाओं को असहज बना देती है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization और यूनिसेफ की बेबी-फ्रेंडली हॉस्पिटल इनिशिएटिव भी ऐसे सुरक्षित और अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने पर जोर देती है।
एसजीपीजीआईएमएस में बनाया गया यह ब्रेस्टफीडिंग कियोस्क इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक यह कियोस्क माताओं को आराम, गोपनीयता और सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा, जिससे स्तनपान की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

इस पूरी परियोजना को एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन और प्रो. आर. हर्षवर्द्धन के नेतृत्व में तेजी से लागू किया गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में जरूरत के अनुसार और भी ऐसे कियोस्क स्थापित किए जाएंगे।
यह पहल सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं, बल्कि एक संवेदनशील समाज की ओर बढ़ता कदम भी है। जहां अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र न होकर मरीजों की भावनाओं और जरूरतों को समझने वाला स्थान बन सके।
लखनऊ के SGPGIMS की यह पहल अब दूसरे सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है, जहां मातृत्व और महिला गरिमा को प्राथमिकता देते हुए ऐसी सुविधाएं विकसित की जाएं।
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