SGPGIMS लखनऊ में आयोजित संगोष्ठी में क्लिनिकल AI को तकनीक, अभ्यास और नीति के समन्वय से स्वास्थ्य सेवा में प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया।
लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के हेपेटोलॉजी विभाग के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर 7 फरवरी 2026 को टेलीमेडिसिन सभागार में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ICMR–NIRDHDS और मीमांसा AI के सहयोग से “क्लिनिकल AI को कारगर बनाना: प्रौद्योगिकी, अभ्यास और नीति का समन्वय” विषय पर केंद्रित था।
कार्यक्रम का शुभारंभ हेपेटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर अमित गोयल और टेलीमेडिसिन विभाग के प्रोफेसर आर.के. सिंह के उद्घाटन भाषण से हुआ। इसके पश्चात स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर एवं स्टैनफोर्ड हेल्थ केयर के मुख्य डेटा वैज्ञानिक डॉ. निगम एच. शाह ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में AI के वास्तविक और जिम्मेदार उपयोग पर प्रकाश डाला।
उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर आर.के. धीमन, डॉ. मोना दुग्गल, डॉ. हरीश कार्निक और डॉ. विनीत कंसल जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। प्रोफेसर धीमन ने AI को स्वास्थ्य सेवा में सुरक्षित, प्रभावी और न्यायसंगत रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर SGPGIMS, ICMR, IIT कानपुर और IET लखनऊ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया भी जारी होने की जानकारी दी गई, जिसका उद्देश्य क्लिनिकल AI को नैदानिक अभ्यास में लाना है।
संगोष्ठी में तकनीकी नवाचार, नैदानिक कार्यप्रवाह, डेटा गुणवत्ता, नैतिक एवं कानूनी पहलुओं और नियामक नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। तीन विषयगत सत्रों और पैनल चर्चाओं के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि AI को सफल बनाने के लिए चिकित्सकों के साथ सह-डिज़ाइन, ठोस साक्ष्य और निरंतर निगरानी अनिवार्य है।
कार्यक्रम का समापन प्रोफेसर आर.के. सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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