लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय ‘स्ट्रेटेजिक रोडमैप डेवलपमेंट’ राउंडटेबल बैठक के पहले दिन स्वास्थ्य नीति निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने पर मंथन किया। बैठक का उद्देश्य SHSRC-UP को राज्य का प्रमुख स्वास्थ्य नीति एवं शोध संस्थान विकसित करना और अगले पांच वर्षों का रणनीतिक रोडमैप तैयार करना है।
उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक मजबूत, तकनीक आधारित और साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हो गई है। राजधानी लखनऊ स्थित द सेंटरम (The Centrum) के ऑप्टिमम हॉल में स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर–उत्तर प्रदेश (SHSRC-UP) के लिए दो दिवसीय 'स्ट्रेटेजिक रोडमैप डेवलपमेंट राउंडटेबल मीट' का शुभारंभ हुआ।

इस बैठक का आयोजन स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर (SHSRC-UP), एसजीपीजीआईएमएस (SGPGIMS) के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य परिवर्तन आयोग (State Transformation Commission) के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है।
बैठक का पहला दिन 'आरोग्य मंथन' थीम और 'Benchmarking Health, Mapping Progress: Uttar Pradesh' उप-विषय पर केंद्रित रहा। इसमें नीति निर्माता, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमुख, शिक्षाविद, विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
SHSRC-UP को बनाया जाएगा राज्य का हेल्थ थिंक टैंक
बैठक का प्रमुख उद्देश्य SHSRC-UP को उत्तर प्रदेश के लिए एक ऐसे संस्थागत थिंक टैंक के रूप में विकसित करना है, जो स्वास्थ्य प्रणाली के प्रदर्शन का लगातार विश्लेषण करे, वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार करे, सरकार को नीति निर्माण में सहयोग दे तथा स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी कर सके।

बैठक के अंतर्गत अगले पांच वर्षों के लिए रणनीतिक कार्ययोजना (Five-Year Strategic Action Plan) तैयार करने की दिशा में चर्चा शुरू हुई, जिससे SHSRC-UP को स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण और रणनीतिक स्वास्थ्य प्रशासन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट संस्थान बनाया जा सके।
बैठक की शुरुआत करते हुए प्रो. (डॉ.) आर. हर्षवर्धन, कार्यकारी निदेशक, SHSRC-UP एवं चिकित्सा अधीक्षक, SGPGIMS ने कहा कि राज्य को ऐसे संस्थान की आवश्यकता है जो स्वास्थ्य प्रणाली का सतत विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सरकार की सहायता कर सके।
आईआईएम लखनऊ के निदेशक डॉ. एम. पी. गुप्ता ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व, नवाचार और आधुनिक प्रबंधन सिद्धांतों की आवश्यकता पर बल दिया।
SGPGIMS के निदेशक एवं SHSRC-UP के सह-अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आर. के. धीमन ने कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक एवं SHSRC-UP संचालन समिति की अध्यक्ष डॉ. (श्रीमती) पिंकी जौहल, IAS ने स्वास्थ्य योजनाओं के बेहतर समन्वय और साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष, IAS ने स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशासनिक सुधार, जवाबदेही और गुणवत्ता सुधार को परिवर्तन की आधारशिला बताया।
मुख्य वक्तव्य देते हुए मनोज कुमार सिंह, IAS, अध्यक्ष SHSRC-UP एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य परिवर्तन आयोग ने SHSRC-UP को राज्य का प्रमुख तकनीकी और नीति शोध संस्थान बनाने का विजन प्रस्तुत किया।
'सेहत संवाद' में डेटा से नीति तक की चर्चा
बैठक के दौरान आयोजित 'सेहत संवाद (Health Dialogue)' में "From Data to Direction: Uttar Pradesh's Health Position" विषय पर व्यापक चर्चा हुई।
इस सत्र में SWOC Analysis (Strength, Weakness, Opportunity, Challenge), Gap Analysis और विभिन्न संदर्भों के विश्लेषण के माध्यम से उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया।
प्रमुख प्रस्तुतियां डॉ. पिंकी जौहल, ऋतु माहेश्वरी, IAS, डॉ. नेहा शर्मा, IAS, डॉ. साइरस इंजीनियर (Johns Hopkins University, USA) तथा कृतिका शर्मा, IAS द्वारा दी गईं। इन प्रस्तुतियों में स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति, नियामकीय ढांचे और सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई।

गैर-संचारी रोगों से डिजिटल हेल्थ तक हुआ मंथन
विशेषज्ञों ने गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते बोझ, रोकथाम की रणनीतियों, निगरानी प्रणाली और समेकित उपचार व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की।
इसके अलावा डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम, हेल्थ इंफॉर्मेशन सिस्टम की इंटरऑपरेबिलिटी, डेटा गवर्नेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ एनालिटिक्स और रियल टाइम निर्णय प्रणाली को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में मरीज सुरक्षा, गुणवत्ता सुधार, NABH मानकों, क्लिनिकल गवर्नेंस, स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था और मानव संसाधन विकास पर भी विशेषज्ञों ने सुझाव दिए।
देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
बैठक में KGMU, ICMR, WHO, UNICEF, NABH, IIM Lucknow, UP-TSU, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC) तथा हरियाणा, गुजरात, केरल और तमिलनाडु के राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्रों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
विशेषज्ञों ने बताया कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के लिए केवल योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि साक्ष्य-आधारित निर्णय, प्रशिक्षित मानव संसाधन, डिजिटल मॉनिटरिंग, वित्तीय स्थिरता और विभागीय समन्वय भी उतना ही आवश्यक है।

दोपहर में आयोजित 'अनुभव संवाद (Experience Dialogue)' में देश के विभिन्न राज्यों के सफल स्वास्थ्य मॉडल प्रस्तुत किए गए।
इस सत्र की अध्यक्षता विकास गोठलवाल (पूर्व IAS) ने की।
विशेषज्ञों ने बताया कि उत्तर प्रदेश को अन्य राज्यों के सफल अनुभवों को अपनी जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार अपनाना होगा।
दूसरे दिन तैयार होगा संस्थागत रोडमैप
बैठक के अंत में डॉ. गौरव के. झा, आयोजन सचिव ने पूरे दिन हुई चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि पहले दिन सामने आए सुझावों, प्राथमिकताओं और रणनीतिक अंतरालों के आधार पर दूसरे दिन SHSRC-UP के संस्थागत ढांचे, शासन प्रणाली, कार्यान्वयन रणनीति और पांच वर्षीय रोडमैप को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।
आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस ऐतिहासिक राउंडटेबल बैठक से प्राप्त सिफारिशें उत्तर प्रदेश में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, स्वास्थ्य प्रशासन, डिजिटल नवाचार, गुणवत्ता सुधार और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देंगी। आने वाले वर्षों में SHSRC-UP राज्य सरकार के लिए एक स्थायी तकनीकी सहयोगी संस्थान के रूप में कार्य करेगा और प्रदेश में अधिक सुदृढ़, समान और जन-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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