फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के कार्डियोलॉजी विभाग ने एक ऐसे मरीज का सफल उपचार किया, जिसका हार्ट फंक्शन केवल 10-15% रह गया था। फेफड़ों में पानी भरने, तीन प्रमुख धमनियों के ब्लॉकेज और गंभीर हार्ट फेलियर जैसी जटिल स्थिति में डॉक्टरों ने हाई-रिस्क इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी कर मरीज की जान बचाई। इलाज के बाद मरीज की हार्ट पंपिंग क्षमता 45% तक पहुंच गई और अब वह सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्परता ने एक बार फिर असंभव को संभव कर दिखाया है। फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के कार्डियोलॉजी विभाग ने एक ऐसे गंभीर मरीज को नई जिंदगी दी, जिसकी हृदय की पंपिंग क्षमता (इजेक्शन फ्रैक्शन) मात्र 10 से 15 प्रतिशत रह गई थी। यह स्थिति इतनी गंभीर थी कि किसी भी समय मरीज को कार्डियाक अरेस्ट हो सकता था। लेकिन समय पर की गई हाई-रिस्क इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी, इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) और विशेषज्ञ मेडिकल टीम की रणनीति ने मरीज को मौत के मुंह से वापस खींच लिया।
इलाज के बाद मरीज की हार्ट पंपिंग क्षमता बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है, अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है और नियमित फॉलो-अप के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल पहुंचे मरीज
फोर्टिस हॉस्पिटल के अनुसार, 57 वर्षीय पुरुष मरीज को अस्पताल तब लाया गया जब पिछले 24 घंटे से उन्हें लगातार सीने में भारीपन और सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही थी। जांच में सामने आया कि मरीज पहले से ही अनियंत्रित मधुमेह (डायबिटीज) और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से पीड़ित थे।
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब डॉक्टरों ने पाया कि मरीज के फेफड़ों में पानी भर चुका था, जिससे सांस लेना बेहद कठिन हो गया था। इसके अलावा उनका रक्तचाप बार-बार खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा था और हृदय की कार्यक्षमता केवल 10-15 प्रतिशत रह गई थी।
तीनों प्रमुख धमनियां थीं अवरुद्ध
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मरीज की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसी स्थिति में पारंपरिक एंजियोप्लास्टी करना भी अत्यधिक जोखिम भरा था क्योंकि प्रक्रिया के दौरान किसी भी समय कार्डियाक अरेस्ट की आशंका बनी हुई थी।
मरीज को पहले वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया ताकि सांस लेने में सहायता मिल सके। साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन दवाएं दी गईं।
IABP की मदद से पहले स्थिर किया गया मरीज
फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शांतनु सिंघल के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) लगाया।
यह एक विशेष मैकेनिकल डिवाइस है, जो हृदय को रक्त पंप करने में अतिरिक्त सहायता देती है और गंभीर हार्ट फेलियर के मामलों में मरीज को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
IABP की मदद से मरीज की स्थिति नियंत्रित होने के बाद डॉक्टरों ने इमरजेंसी एंजियोग्राफी की।
सिर्फ 15 मिनट में हटाया गया मुख्य धमनी का ब्लॉकेज
दो दिनों तक मरीज को आईसीयू में गहन निगरानी में रखा गया। इसके बाद विशेषज्ञ टीम ने बेहद सावधानी के साथ हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी की।
यह प्रक्रिया लगभग 15 मिनट तक चली, जिसमें डॉक्टरों ने हृदय की मुख्य धमनी से गंभीर अवरोध को सफलतापूर्वक हटाया।
इस प्रक्रिया के बाद मरीज ने उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया दी। अगले ही दिन डॉक्टरों ने मरीज को वेंटिलेटर और हार्ट-असिस्ट पंप दोनों से हटा दिया।
10% से 45% तक पहुंची हार्ट की क्षमता
इलाज के एक सप्ताह बाद मरीज के इजेक्शन फ्रैक्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। पहले जहां हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 10 प्रतिशत थी, वहीं उपचार के बाद यह पहले 35 प्रतिशत और फिर बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी गंभीर स्थिति से इस स्तर तक रिकवरी होना अत्यंत उत्साहजनक और चिकित्सकीय दृष्टि से बड़ी सफलता माना जाता है।
अब सामान्य जीवन जी रहे हैं मरीज
अस्पताल के अनुसार, मरीज को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। वर्तमान में वह नियमित रूप से ओपीडी में फॉलो-अप के लिए आ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल मरीज को किसी प्रकार की कार्डियक समस्या नहीं है और निर्धारित कार्डियक रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह जल्द ही अपने पेशेवर जीवन में भी वापसी कर सकेंगे।
डॉ. शांतनु सिंघल ने क्या कहा?
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शांतनु सिंघल ने बताया कि इस मरीज का इलाज करना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
उन्होंने कहा कि मरीज का हार्ट फंक्शन केवल 10 प्रतिशत था, फेफड़ों में पानी भर चुका था और ब्लड प्रेशर लगभग 200/100 तक पहुंच गया था। ऐसे में सबसे पहले स्पेशलाइज्ड हार्ट-असिस्ट पंप की मदद से मरीज को स्थिर किया गया।
इसके बाद कम समय और कम डाई (लो-डाई तकनीक) का उपयोग करते हुए धमनी में मौजूद अवरोध को हटाया गया, जिससे संभावित कार्डियाक अरेस्ट टल गया और हार्ट फंक्शन में तेजी से सुधार हुआ।
फोर्टिस की विशेषज्ञता का उदाहरण
फोर्टिस नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. शानू शर्मा ने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि अस्पताल अत्यंत जटिल और हाई-रिस्क कार्डियक आपात स्थितियों का भी विश्वस्तरीय उपचार करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि केवल 10 प्रतिशत हार्ट फंक्शन वाले मरीज को 45 प्रतिशत तक पहुंचाना मेडिकल टीम की विशेषज्ञता, अत्याधुनिक तकनीक और समय पर लिए गए सही निर्णयों का परिणाम है।
फोर्टिस हेल्थकेयर का व्यापक नेटवर्क
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड देश की अग्रणी एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में शामिल है। कंपनी भारत के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 हेल्थकेयर सुविधाओं का संचालन करती है। इसके नेटवर्क में 6,000 से अधिक ऑपरेशनल बेड और 400 डायग्नोस्टिक लैब्स शामिल हैं।
फोर्टिस, वैश्विक हेल्थकेयर समूह आईएचएच हेल्थकेयर का हिस्सा है, जो भारत सहित 10 देशों में 89 से अधिक अस्पतालों और कुल 190 हेल्थकेयर सुविधाओं के माध्यम से सेवाएं प्रदान करता है। आईएचएच के साथ लगभग 76,000 स्वास्थ्य पेशेवर जुड़े हुए हैं, जो आधुनिक चिकित्सा और मरीज-केंद्रित देखभाल के लिए कार्यरत हैं।
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