करीब 70 वर्ष पहले द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान निर्मित चौधरी चरण सिंह दोहरीघाट पंप नहर का आधुनिकीकरण पूरा हो गया है। मोटर-पंप और पैनल बदलने के साथ सबस्टेशन का उच्चीकरण किया गया है। अब 660 क्यूसेक क्षमता वाली यह पंप नहर मऊ और बलिया के करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम है। लोकार्पण कार्यक्रम में कृषक सम्मान, वृक्षारोपण, बच्चों को बैग वितरण, जन संवाद और सरयू आरती भी आयोजित की गई।
पूर्वांचल के किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। करीब सात दशक पहले बनाई गई चौधरी चरण सिंह दोहरीघाट पंप नहर अब नए स्वरूप में तैयार है।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना वर्ष 1956 के दौरान निर्मित यह पंप नहर सिंचाई विभाग की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल रही है। समय के साथ इसके पुराने उपकरणों और तकनीकी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी जरूरत को देखते हुए अब इसके आधुनिकीकरण का काम पूरा किया गया है।
पंप नहर के आधुनिकीकरण के बाद इसकी क्षमता और संचालन व्यवस्था को मजबूत किया गया है। विभाग का कहना है कि इससे क्षेत्र के किसानों को अधिक भरोसेमंद सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और खेती को अधिक उत्पादक तथा जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
मोटर-पंप से लेकर सबस्टेशन तक हुआ कायाकल्प
माननीय मुख्यमंत्री और जलशक्ति मंत्री के नेतृत्व में नलकूप पूर्व परिक्षेत्र अयोध्या के नियंत्रणाधीन लिफ्ट सिंचाई खंड गोरखपुर की टीम ने विशेष प्रयास करते हुए पंप नहर के आधुनिकीकरण का कार्य पूरा कराया।

इस दौरान पुराने मोटर-पंप और पैनल को प्रतिस्थापित किया गया। इसके साथ ही पंप नहर के सबस्टेशन का उच्चीकरण भी कराया गया है।
इन तकनीकी सुधारों के बाद करीब सात दशक पुरानी यह पंप नहर अब नए उपकरणों और आधुनिक व्यवस्था से लैस हो गई है। विभाग की ओर से इसे इस तरह विकसित किया गया है कि यह एक नई पंप नहर जैसी कार्यक्षमता के साथ सिंचाई व्यवस्था को आगे बढ़ा सके।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इसकी क्षमता को लेकर है।
आधुनिकीकरण के बाद अब यह पंप नहर 660 क्यूसेक क्षमता के साथ संचालित होने के लिए तैयार है।
मऊ और बलिया के 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा
दोहरीघाट पंप नहर के आधुनिकीकरण का सीधा संबंध किसानों की जरूरत से है। विभाग के अनुसार यह नहर मऊ और बलिया जनपद के करीब 55,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रही है।
इसका मतलब है कि इस परियोजना से जुड़े विशाल कृषि क्षेत्र के लिए नहर की बेहतर और आधुनिक संचालन व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

खेती में सिंचाई की उपलब्धता का सीधा असर फसल उत्पादन और किसानों की कृषि गतिविधियों पर पड़ता है। ऐसे में नहर की क्षमता बढ़ने और तकनीकी ढांचे के मजबूत होने से क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
अब चुनौती सिर्फ पानी पहुंचाने की नहीं, बल्कि इस आधुनिक व्यवस्था का लगातार और बेहतर संचालन सुनिश्चित करने की भी होगी।
नहर परिसर को भी दिया गया आकर्षक और आधुनिक स्वरूप
दोहरीघाट पंप नहर का कायाकल्प केवल तकनीकी उपकरणों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके परिसर को भी आकर्षक और आधुनिक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।
पंप नहर परिसर में प्राकृतिक स्वरूप, उपवन, कंट्रोल रूम और आधुनिक उपकरणों को व्यवस्थित किया गया है।
इसके अलावा यहां 30 किलोवाट के सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। इससे परिसर में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के इस्तेमाल की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया है।
परिसर में Terrace Sitting Area भी विकसित किया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र को एक व्यवस्थित और मनोरम रूप मिला है।
यानी सात दशक पुरानी सिंचाई परियोजना को केवल मशीनरी के स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे परिसर के स्तर पर भी नया स्वरूप देने की कोशिश की गई है।
लोकार्पण कार्यक्रम में किसान सम्मान से लेकर सरयू आरती तक
आधुनिकीकरण के बाद पंप नहर के कार्यों का भव्य लोकार्पण किया गया। लोकार्पण कार्यक्रम को केवल सरकारी परियोजना के उद्घाटन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसमें किसानों और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई।

कार्यक्रम में सेवा संकल्प अभियान के तहत कई गतिविधियां आयोजित की गईं।
इस दौरान कृषक सम्मान किया गया और किसानों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही वृक्षारोपण कार्यक्रम भी हुआ।
कार्यक्रम में बच्चों को स्कूल बैग का वितरण किया गया। इसके अलावा स्थानीय लोगों के साथ जन संवाद भी आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र से जुड़े मुद्दों और विकास कार्यों पर संवाद का अवसर मिला।
कार्यक्रम के अंत में सरयू आरती भी आयोजित की गई, जिससे पूरे आयोजन में धार्मिक और सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला।
किसानों के लिए आगे की राह क्या?
दोहरीघाट पंप नहर का आधुनिकीकरण पूर्वांचल के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में देखा जा रहा है। 660 क्यूसेक क्षमता, आधुनिक मोटर-पंप, नए पैनल और उच्चीकृत सबस्टेशन के साथ अब विभाग के सामने इस व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित रखने की जिम्मेदारी भी होगी।
किसानों के लिए किसी सिंचाई परियोजना की असली उपयोगिता तभी सामने आती है, जब जरूरत के समय खेतों तक पर्याप्त पानी नियमित रूप से पहुंच सके।
इसीलिए आने वाले समय में नजर इस बात पर रहेगी कि आधुनिक की गई दोहरीघाट पंप नहर अपनी नई क्षमता के साथ किसानों की सिंचाई जरूरतों को किस तरह पूरा करती है।
फिलहाल करीब 70 वर्ष पुरानी इस सिंचाई परियोजना को आधुनिक तकनीक और नए उपकरणों के साथ नई जिंदगी मिल गई है।
जलशक्ति मंत्री के मार्गदर्शन में सिंचाई विभाग ने अपनी पुरानी संरचनाओं को आधुनिक बनाने और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
दोहरीघाट पंप नहर का यह कायाकल्प इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है—जहां पुरानी विरासत को बचाते हुए उसे आधुनिक तकनीक के साथ भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार किया गया है।
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