एसजीपीजीआईएमएस एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में आयोजित मॉक फायर ड्रिल में इमरजेंसी टीम ने समय पर प्रतिक्रिया कर मरीजों और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की, जबकि विशेषज्ञों ने सुधारात्मक उपायों पर भी चर्चा की।
एसजीपीजीआईएमएस (Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में आज एक रोमांचक और शिक्षाप्रद फायर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य अस्पताल की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन करना और आपदा प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत बनाना था। इस अभ्यास ने न केवल कर्मचारियों की तत्परता का परीक्षण किया बल्कि अस्पताल प्रशासन को संचालन संबंधी कमियों की पहचान करने का अवसर भी प्रदान किया।

डिब्रीफिंग सत्र की अध्यक्षता श्री अभय भान पांडेय, सेवानिवृत्त पूर्व मुख्य अग्निशमन अधिकारी, लखनऊ एवं वर्तमान में मेडांता हॉस्पिटल, लखनऊ में मुख्य अग्निशमन अधिकारी, और मेजर (डॉ.) सौरभ सिंह, सहायक प्रोफेसर, विभाग–अस्पताल प्रशासन ने की। इस सत्र में अस्पताल की इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम के सदस्य डॉ. अनीट्टा जोसे एलेनकिल, डॉ. क्रिस अग्रवाल, डॉ. सुमंगल बोस, डॉ. दीक्षा, डॉ. कृतिका सिंह, डॉ. पूजा यादव, डॉ. अंकिता सेंगर, डॉ. पलक पाल, श्री विजय यादव (टीओ, फायर सेफ्टी सर्विसेज), श्री प्रभास झा (फायर इंचार्ज), श्री ए.के. राही (ए.ई. इलेक्ट्रिकल), श्री कुलदीप यादव (जे.ई., एसी) और श्री डी.के. पांडेय (एएसओ) उपस्थित रहे।
मॉक ड्रिल की शुरुआत 12:32 बजे एक काल्पनिक अग्निकांड की स्थिति दर्शाकर की गई। घटना की सूचना केवल एक मिनट के भीतर कंट्रोल रूम को दी गई और दो मिनट के भीतर प्रथम प्रतिक्रिया दल घटनास्थल पर पहुंच गया। इस चुनौतीपूर्ण अभ्यास में टीम ने घबराहट और तनाव के बीच मरीजों की सुरक्षित निकासी और बचाव कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस प्रक्रिया ने टीमवर्क, तत्परता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया।

डिब्रीफिंग के दौरान कई सुधारात्मक बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ आग पर तुरंत नियंत्रण प्राप्त करने की आवश्यकता, संचार प्रणाली को और मजबूत बनाने और प्रथम प्रतिक्रिया दल तक सटीक सूचना पहुँचाने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, व्हीलचेयर जैसे आपातकालीन उपकरणों की बेहतर उपलब्धता, फायर एक्सटिंग्विशर के स्पष्ट संकेतक और आपात स्थिति में बिजली बंद करने की स्पष्ट व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
सुझावों में आपातकालीन कोड्स को स्पष्ट रूप से घोषित करने, विभिन्न कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को पूर्व निर्धारित जॉब कार्ड के माध्यम से तय करने, और चिकित्सकीय, हाउसकीपिंग तथा तकनीकी टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।

अस्पताल प्रशासन ने बैठक के अंत में सभी सुधारात्मक सुझावों को शीघ्र लागू करने, कर्मचारियों के प्रशिक्षण को और मजबूत बनाने, और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अभ्यास ने यह भी दोहराया कि नियमित मॉक ड्रिल और व्यवस्थित समीक्षा तंत्र किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आपदा से निपटने की तैयारी बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
एसजीपीजीआईएमएस के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के अभ्यास केवल कर्मचारियों के कौशल को नहीं बढ़ाते, बल्कि मरीजों और अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मॉक ड्रिल के दौरान मिली सीखों और सुझाए गए सुधारात्मक उपायों को लागू कर अस्पताल ने भविष्य में किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना करने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया।
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