नोएडा के थाना सेक्टर-63 पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर अंतर्राज्यीय वाहन चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की निशानदेही और कब्जे से चोरी की 10 मोटरसाइकिल, दो अवैध चाकू और एक फर्जी नंबर प्लेट बरामद हुई है। पूछताछ में दिल्ली-NCR में रैकी कर बाइक चोरी करने और उन्हें मोबाइल स्नैचिंग में इस्तेमाल करने की बात सामने आई है।
नोएडा में वाहन चोरी के खिलाफ चल रही पुलिस कार्रवाई के बीच थाना सेक्टर-63 पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। हिंडन नदी के पुल के नीचे 25 फुटा रोड के पास पुलिस ने दो ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि वे अंतर्राज्यीय वाहन चोरी करने वाले गिरोह से जुड़े हैं।
मामला उस समय खुला जब पुलिस को लोकल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए शौकत अली और पवन कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, दोनों के कब्जे और निशानदेही से चोरी की 10 मोटरसाइकिल, दो अवैध चाकू और एक फर्जी नंबर प्लेट बरामद की गई।
लेकिन पुलिस के लिए बरामदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण वह तरीका है, जिसके जरिए कथित तौर पर चोरी की बाइक का इस्तेमाल किया जाता था।
पहले रैकी, फिर बाइक चोरी और उसके बाद नया ठिकाना
पुलिस पूछताछ के मुताबिक, आरोपी दिल्ली और एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में मोटरसाइकिलों की रैकी करते थे। इसके बाद मौका देखकर बाइक चोरी कर लेते थे।
चोरी के बाद इन मोटरसाइकिलों को तुरंत बेचने के बजाय अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखा जाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी चोरी की बाइक को पार्किंग, सड़क किनारे और ग्रीन बेल्ट जैसे स्थानों पर खड़ा कर देते थे।

इसके बाद जरूरत के हिसाब से बाइक बदल-बदलकर उनका इस्तेमाल किया जाता था।
चोरी की बाइक से मोबाइल स्नैचिंग का भी आरोप
पुलिस का दावा है कि गिरोह चोरी की मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल केवल वाहन चोरी तक सीमित नहीं रखता था। इन बाइक को मोबाइल स्नैचिंग की घटनाओं में भी इस्तेमाल किया जाता था।
यानी एक ही चोरी की बाइक कई घटनाओं में इस्तेमाल होने के बाद उसे दूसरे स्थान पर खड़ा कर दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, इस तरीके से आरोपियों द्वारा अपनी गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
इसके बाद चोरी की मोटरसाइकिलों को कथित तौर पर कम कीमत पर राह चलते व्यक्तियों को बेच दिया जाता था।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद 10 मोटरसाइकिलों में से कितनी किस स्थान से चोरी की गई थीं और इनके इस्तेमाल से कितनी अन्य घटनाएं जुड़ी हो सकती हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी शौकत अली पुत्र मोहम्मद मियां और पवन कुमार पुत्र रमेश चंद्र हैं।
शौकत अली की उम्र करीब 32 वर्ष है। वह मूल रूप से नई सराय, थाना कोतवाली, जनपद बदायूं का निवासी बताया गया है। वर्तमान में वह ग्राम चिपियाना खुर्द उर्फ तिगरी, थाना बिसरख, गौतमबुद्धनगर में रह रहा था।
दूसरे आरोपी पवन कुमार की उम्र करीब 27 वर्ष है। वह ग्राम चिपियाना खुर्द उर्फ तिगरी, थाना बिसरख, गौतमबुद्धनगर का निवासी बताया गया है।
दोनों की गिरफ्तारी 10 सितंबर 2026 को हिंडन नदी के पुल के नीचे, 25 फुटा रोड के पास से की गई।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से कुल 10 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद करने की बात कही है।
इसके अलावा उनके पास से दो अवैध चाकू और DL5SBU5326 नंबर की एक फर्जी नंबर प्लेट भी बरामद हुई है।
पुलिस का मानना है कि फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल वाहनों की पहचान छिपाने के लिए किया जा सकता था। हालांकि, इसका वास्तविक इस्तेमाल किस बाइक पर हुआ और किस घटना से इसका संबंध है, यह जांच का विषय है।
दिल्ली के थानों में भी दर्ज हैं मुकदमे
सेक्टर-63 पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस मामले में मु0अ0सं0 402/2026 दर्ज किया गया है। इसमें धारा 317(2), 317(5), 345(3) बीएनएस और 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
इसके अलावा आरोपियों से संबंधित आपराधिक मामलों में:
- मु0अ0सं0 6068/2026, थाना भजनपुरा, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली।
- मु0अ0सं0 017137/2026, थाना न्यू अशोक नगर, ईस्ट दिल्ली।
इन मामलों के आधार पर पुलिस दिल्ली और नोएडा समेत एनसीआर क्षेत्र में आरोपियों की गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
नोएडा पुलिस की वाहन चोरों पर लगातार कार्रवाई
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब नोएडा पुलिस पिछले कुछ समय में वाहन चोरी से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई कर चुकी है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पुलिस ने चोरी की मोटरसाइकिलों और वाहनों की बरामदगी के साथ कथित वाहन चोर गिरोहों का खुलासा किया है।
सेक्टर-63 की ताजा कार्रवाई में भी पुलिस ने केवल आरोपियों को गिरफ्तार करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि 10 मोटरसाइकिलों की बरामदगी के जरिए कथित नेटवर्क की कड़ी को खंगालने की कोशिश की है।
अब जांच का अगला चरण यह पता लगाना होगा कि बरामद मोटरसाइकिलों के वास्तविक मालिक कौन हैं, ये वाहन कहां-कहां से चोरी किए गए थे और मोबाइल स्नैचिंग समेत अन्य घटनाओं में इनका इस्तेमाल हुआ या नहीं।
फिलहाल पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन चोरी के एक कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।
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