जनपद में एलपीजी गैस की कालाबाजारी, अवैध रिफिलिंग और व्यावसायिक दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने संयुक्त जांच अभियान चलाया। दादरी की कई गैस एजेंसियों और एक पेट्रोल पंप की जांच में कुछ अनियमितताएं सामने आईं, जिन पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जनपद में एलपीजी गैस के व्यावसायिक उपयोग, कालाबाजारी, अवैध रिफिलिंग और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित उपजिलाधिकारी और नगर मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में संयुक्त जांच टीमों का गठन किया गया है, जो जिले के विभिन्न क्षेत्रों में गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों की नियमित जांच कर रही हैं।
इन टीमों में बांट माप विभाग, खाद्य एवं रसद विभाग तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि एलपीजी गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

इसी क्रम में विगत दिवस गठित टीमों ने जिले के विभिन्न स्थानों पर व्यापक जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान तहसील दादरी क्षेत्र में संचालित कई गैस एजेंसियों का निरीक्षण किया गया। इनमें मैसर्स प्रधान मान सिंह भारत गैस, दादरी इण्डेन सेवा और मैसर्स सचिन भारत गैस ग्रामीण वितरक चिटहेरा शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान टीम ने गैस एजेंसियों पर एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। जांच में पाया गया कि इन सभी गैस एजेंसियों पर एलपीजी गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता मौजूद थी और उपभोक्ताओं को आपूर्ति में कोई विशेष कमी नहीं पाई गई।
इसके अलावा टीम ने एजेंसियों से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की। इस दौरान पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) तथा वेट एंड मेजरमेंट से संबंधित लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेज अद्यतन पाए गए। अधिकारियों ने इन एजेंसियों को उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने और नियमों का पालन जारी रखने के निर्देश भी दिए।

जांच अभियान के दौरान टीम ने दादरी स्थित एक पेट्रोल पंप का भी निरीक्षण किया। मैसर्स सतीश चन्द्र गोयल एंड कंपनी नामक इस पेट्रोल पंप पर कई महत्वपूर्ण अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में पाया गया कि पेट्रोल पंप पर पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) की अनुज्ञप्ति केवल 31 दिसंबर 2025 तक ही वैध थी और उसके बाद इसे नवीनीकृत नहीं कराया गया था। इसके अलावा यह भी सामने आया कि पेट्रोल पंप संचालक शासन द्वारा जारी ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था।
जांच के दौरान देखा गया कि दोपहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट के भी पेट्रोल दिया जा रहा था, जो कि शासन के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम ने संबंधित ऑयल कंपनी के अधिकारियों को पेट्रोल पंप के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जिला पूर्ति अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में एलपीजी गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए इस तरह के जांच अभियान लगातार चलाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, अवैध रिफिलिंग और व्यावसायिक दुरुपयोग जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। साथ ही उपभोक्ताओं को समय पर और उचित तरीके से एलपीजी गैस और पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।
जिला प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी यदि किसी गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप पर नियमों के उल्लंघन या अनियमितताओं की शिकायत मिलती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत गया है कि जनपद में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कालाबाजारी या नियमों की अनदेखी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
COMMENTS