Saturday, July 11, 2026

1.23 करोड़ रुपये के हर्जाने का आदेश! सरकारी जमीन पर मदरसे के कब्जे को लेकर बड़ा फैसला

खसरा संख्या 1548ख की 1 हेक्टेयर ग्राम समाज भूमि पर अवैध कब्जे का मामला, राजस्व न्यायालय ने बेदखली के साथ लगाया करोड़ों का हर्जाना

New Delhi , Latest Updated On - Jun 03 2026 | 16:46:00 PM
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गाजियाबाद के डासना क्षेत्र में ग्राम समाज की ऊसर भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामले में राजस्व न्यायालय ने बड़ा आदेश सुनाया है। मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम को 1 हेक्टेयर भूमि से बेदखल करने के साथ 1 करोड़ 23 लाख रुपये का हर्जाना वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की शुरुआत लेखपाल की रिपोर्ट से हुई थी और लंबे समय तक चली राजस्व कार्यवाही के बाद यह फैसला सामने आया है।

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गाजियाबाद में ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे के मामले में बड़ा फैसला

गाजियाबाद जिले के डासना क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण राजस्व मामला सामने आया है, जहां ग्राम समाज की भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर राजस्व न्यायालय ने बड़ा आदेश जारी किया है। न्यायालय ने मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम, कल्लूगढ़ी डासना को विवादित भूमि से बेदखल करने के साथ-साथ 1 करोड़ 23 लाख रुपये का हर्जाना भी अदा करने का आदेश दिया है।

यह मामला ग्राम डासना स्थित खसरा संख्या 1548ख से जुड़ा है, जिसका कुल रकबा 5.2490 हेक्टेयर बताया गया है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि "ऊसर" के रूप में दर्ज है, जो ग्राम सभा अथवा सरकारी भूमि की श्रेणी में आती है।

लेखपाल की रिपोर्ट से शुरू हुई कार्रवाई

मामले की शुरुआत 24 जनवरी 2023 को हुई, जब हल्का लेखपाल एवं सचिव भूमि प्रबंधन समिति द्वारा राजस्व न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम ने उक्त सरकारी भूमि के लगभग 1 हेक्टेयर हिस्से पर पक्का निर्माण और पार्क विकसित कर वर्ष 2021 से अनधिकृत कब्जा कर रखा है।

रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद न्यायालय द्वारा संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया। यह नोटिस 4 फरवरी 2023 को तामील हुआ। बाद में पक्षकार की ओर से समय मांगने का प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।


ग्रामीणों ने भी दर्ज कराई आपत्ति

राजस्व अभिलेखों के अनुसार 5 जुलाई 2023 को ग्राम कल्लूगढ़ी डासना के ग्रामीणों द्वारा भी अपनी आपत्तियां प्रस्तुत की गईं। इसके बाद मामले में भूमि प्रबंधन समिति की ओर से हल्का लेखपाल और सचिव के बयान दर्ज किए गए।

बयान में लेखपाल ने न्यायालय को बताया कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में ऊसर भूमि के रूप में दर्ज है तथा मदरसे द्वारा लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्र पर निर्माण कर अवैध कब्जा किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर आज भी उक्त कब्जा मौजूद है।

न्यायालय ने किन आधारों पर दिया फैसला?

आदेश में उल्लेख किया गया कि विपक्षी पक्ष को मामले की पूरी जानकारी थी, लेकिन उसने प्रभावी ढंग से अपनी पैरवी नहीं की। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, रिपोर्टों और गवाहों के बयानों का अध्ययन करने के बाद माना कि विवादित भूमि पर अनधिकृत कब्जा स्थापित होता है।

न्यायालय ने यह भी माना कि सरकारी भूमि पर कब्जे के कारण ग्राम समाज को नुकसान हुआ है, इसलिए बेदखली के साथ आर्थिक दंड भी लगाया जाना आवश्यक है।