गाजियाबाद के डासना क्षेत्र में ग्राम समाज की ऊसर भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामले में राजस्व न्यायालय ने बड़ा आदेश सुनाया है। मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम को 1 हेक्टेयर भूमि से बेदखल करने के साथ 1 करोड़ 23 लाख रुपये का हर्जाना वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की शुरुआत लेखपाल की रिपोर्ट से हुई थी और लंबे समय तक चली राजस्व कार्यवाही के बाद यह फैसला सामने आया है।
गाजियाबाद में ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे के मामले में बड़ा फैसला
गाजियाबाद जिले के डासना क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण राजस्व मामला सामने आया है, जहां ग्राम समाज की भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर राजस्व न्यायालय ने बड़ा आदेश जारी किया है। न्यायालय ने मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम, कल्लूगढ़ी डासना को विवादित भूमि से बेदखल करने के साथ-साथ 1 करोड़ 23 लाख रुपये का हर्जाना भी अदा करने का आदेश दिया है।
यह मामला ग्राम डासना स्थित खसरा संख्या 1548ख से जुड़ा है, जिसका कुल रकबा 5.2490 हेक्टेयर बताया गया है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि "ऊसर" के रूप में दर्ज है, जो ग्राम सभा अथवा सरकारी भूमि की श्रेणी में आती है।
लेखपाल की रिपोर्ट से शुरू हुई कार्रवाई
मामले की शुरुआत 24 जनवरी 2023 को हुई, जब हल्का लेखपाल एवं सचिव भूमि प्रबंधन समिति द्वारा राजस्व न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम ने उक्त सरकारी भूमि के लगभग 1 हेक्टेयर हिस्से पर पक्का निर्माण और पार्क विकसित कर वर्ष 2021 से अनधिकृत कब्जा कर रखा है।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद न्यायालय द्वारा संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया। यह नोटिस 4 फरवरी 2023 को तामील हुआ। बाद में पक्षकार की ओर से समय मांगने का प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

ग्रामीणों ने भी दर्ज कराई आपत्ति
राजस्व अभिलेखों के अनुसार 5 जुलाई 2023 को ग्राम कल्लूगढ़ी डासना के ग्रामीणों द्वारा भी अपनी आपत्तियां प्रस्तुत की गईं। इसके बाद मामले में भूमि प्रबंधन समिति की ओर से हल्का लेखपाल और सचिव के बयान दर्ज किए गए।
बयान में लेखपाल ने न्यायालय को बताया कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में ऊसर भूमि के रूप में दर्ज है तथा मदरसे द्वारा लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्र पर निर्माण कर अवैध कब्जा किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर आज भी उक्त कब्जा मौजूद है।
न्यायालय ने किन आधारों पर दिया फैसला?
आदेश में उल्लेख किया गया कि विपक्षी पक्ष को मामले की पूरी जानकारी थी, लेकिन उसने प्रभावी ढंग से अपनी पैरवी नहीं की। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, रिपोर्टों और गवाहों के बयानों का अध्ययन करने के बाद माना कि विवादित भूमि पर अनधिकृत कब्जा स्थापित होता है।
न्यायालय ने यह भी माना कि सरकारी भूमि पर कब्जे के कारण ग्राम समाज को नुकसान हुआ है, इसलिए बेदखली के साथ आर्थिक दंड भी लगाया जाना आवश्यक है।

कैसे तय हुई 1.23 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति?
राजस्व न्यायालय ने सर्किल रेट के आधार पर क्षतिपूर्ति की गणना की। आदेश के अनुसार संबंधित भूमि के मूल्यांकन के आधार पर कुल 1 करोड़ 23 लाख रुपये का हर्जाना निर्धारित किया गया।
इसके अतिरिक्त 10 रुपये वाद व्यय भी लगाया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब तक भूमि पूरी तरह खाली नहीं कराई जाती, तब तक निर्धारित दर से जुर्माना देय रहेगा।
बेदखली का आदेश जारी
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम को खसरा संख्या 1548ख की 1 हेक्टेयर भूमि से बेदखल किया जाता है। इसके लिए आरसी प्रपत्र-21 जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस आदेश के बाद अब राजस्व प्रशासन द्वारा आगे की कार्रवाई किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
मामले के सामाजिक और प्रशासनिक मायने
डासना क्षेत्र में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में सरकारी, ग्राम सभा और वक्फ संपत्तियों से जुड़े भूमि विवाद लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालयी आदेशों पर लोगों की नजर बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आदेश का क्रियान्वयन होता है तो यह सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। वहीं संबंधित पक्ष के पास उच्च न्यायालय या अन्य सक्षम मंच पर अपील का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी
राजस्व न्यायालय कम्प्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) में उपलब्ध सूचना के अनुसार यह आदेश सूचनार्थ प्रकाशित किया गया है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार किसी भी कानूनी उपयोग अथवा अंतिम सत्यापन के लिए संबंधित न्यायालय की मूल पत्रावली और अभिलेखों का अवलोकन आवश्यक होगा।
फिलहाल इस आदेश ने गाजियाबाद के डासना क्षेत्र में सरकारी भूमि, अवैध कब्जे और राजस्व प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आदेश का क्रियान्वयन किस प्रकार किया जाता है और संबंधित पक्ष की ओर से क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।
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