Wednesday, August 05, 2026

अब जरीब नहीं, रोवर तकनीक बताएगी जमीन की सही सीमा! लखनऊ में हुआ आधुनिक जीएनएसएस तकनीक का सफल परीक्षण

मोहनलालगंज के करोरवा गांव में राजस्व राज्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह दिलेर की मौजूदगी में आधुनिक जीएनएसएस रोवर तकनीक से भूमि सीमांकन का प्रदर्शन किया गया। पारंपरिक जरीब पद्धति और नई तकनीक के परिणाम एक समान पाए गए।

noida , Latest Updated On - Aug 04 2026 | 15:34:00 PM
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उत्तर प्रदेश सरकार राजस्व व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में जीएनएसएस रोवर तकनीक के माध्यम से भूमि सीमांकन का सफल प्रदर्शन किया गया। इस पहल से भूमि विवादों में कमी आने और सीमांकन की प्रक्रिया को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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उत्तर प्रदेश में भूमि से जुड़े विवादों को कम करने और सीमांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सोमवार को लखनऊ जिले की मोहनलालगंज तहसील के करोरवा गांव में आधुनिक जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) रोवर तकनीक के जरिए भूमि सीमांकन का सफल प्रदर्शन किया गया।

इस मौके पर उत्तर प्रदेश के राजस्व राज्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह दिलेर, राजस्व परिषद के वरिष्ठ अधिकारी राजेश रंजन और स्थानीय प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान आधुनिक तकनीक और पारंपरिक जरीब पद्धति के माध्यम से भूमि सीमांकन की प्रक्रिया का तुलनात्मक परीक्षण भी किया गया।

सबसे खास बात यह रही कि दोनों प्रक्रियाओं से प्राप्त परिणाम पूरी तरह समान पाए गए। इससे आधुनिक तकनीक की विश्वसनीयता और सटीकता को नई मजबूती मिली है।

करोरवा गांव में हुआ आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

तहसील मोहनलालगंज की राजस्व टीम ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-24 के तहत भूमि सीमांकन की प्रक्रिया को पूरा किया। इस दौरान जीएनएसएस रोवर मशीन और पारंपरिक जरीब पद्धति, दोनों का उपयोग किया गया।

राजस्व अधिकारियों ने मौके पर ही दोनों प्रणालियों के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का मिलान किया और यह सुनिश्चित किया कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी तरह सटीक और पारदर्शी हो।

अधिकारियों के अनुसार, रोवर तकनीक के माध्यम से भूमि की सीमाओं का निर्धारण पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान, तेज और विश्वसनीय हो जाएगा।

राजस्व मंत्री ने खुद समझी पूरी प्रक्रिया

कार्यक्रम के दौरान राजस्व राज्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह दिलेर ने स्वयं रोवर मशीन की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और उसकी तकनीकी विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने अधिकारियों से मशीन की कार्यप्रणाली, आंकड़ों की शुद्धता और सीमांकन प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने मौके पर मौजूद ग्रामीणों से भी इस नई व्यवस्था के बारे में बातचीत की।

मंत्री ने कहा कि यह तकनीक राजस्व विभाग के लिए किसी बड़े बदलाव से कम नहीं है।

उन्होंने कहा, "रोवर तकनीक के माध्यम से भूमि सीमांकन की प्रक्रिया अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध होगी। इससे आम नागरिकों को भूमि संबंधी विवादों से राहत मिलेगी और राजस्व प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।"

वर्षों पुरानी व्यवस्था में होगा बदलाव

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर जमीन की सीमाओं को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। पारंपरिक जरीब पद्धति में कई बार समय अधिक लगता है और कुछ मामलों में सटीकता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

ऐसे में जीएनएसएस रोवर तकनीक एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक की मदद से सीमांकन की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और विवादों की संख्या में भी कमी आएगी।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में तकनीकी सुधार

राजस्व राज्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह दिलेर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि नई तकनीकों की मदद से पुरानी और जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है, ताकि लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

मंत्री के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता है कि नागरिकों को राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाएं कम समय में, बिना किसी परेशानी के और पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराई जाएं।

राजस्व विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद

राजस्व मंत्री ने कहा कि इस तकनीक के व्यापक उपयोग से सीमांकन से जुड़े मामलों का तेजी से निस्तारण किया जा सकेगा। इससे न केवल भूमि विवाद कम होंगे, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सकेगी।

उन्होंने राजस्व परिषद, जिला प्रशासन और तहसील स्तर के अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

ग्रामीणों ने भी की पहल की सराहना

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने इस नई तकनीक के जरिए किए गए सीमांकन कार्य को सकारात्मक पहल बताया।

उनका कहना था कि यदि इस व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है तो वर्षों से लंबित कई विवादों का समाधान आसानी से हो सकेगा।

कई अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर उप जिलाधिकारी आकाश सिंह, तहसीलदार ऋतुराज शुक्ला, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और तहसील प्रशासन के कई अधिकारी उपस्थित रहे।

राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक राज्य की राजस्व व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।

सरकार की यह पहल केवल तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारदर्शी प्रशासन, सुशासन और आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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