केंद्र सरकार ने सड़क परिवहन व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-48) पर एक अगस्त से मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली लागू कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर बैरियर हटा दिए गए हैं और अत्याधुनिक कैमरों तथा सेंसरों की मदद से गाड़ियों से स्वतः टोल शुल्क वसूला जाएगा।
भारत की सड़क व्यवस्था तेजी से बदल रही है। बीते कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में आधुनिक हाईवे, एक्सप्रेसवे और एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। लेकिन इन तमाम विकास कार्यों के बावजूद एक समस्या ऐसी थी, जिसका सामना लगभग हर वाहन चालक को करना पड़ता था और वह थी टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें।
कई बार लोगों को कुछ मिनटों की दूरी तय करने के लिए घंटों तक जाम में फंसना पड़ता था। इस वजह से न केवल समय बर्बाद होता था, बल्कि ईंधन की खपत भी बढ़ जाती थी और प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ता था।
अब इस समस्या के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-48) पर शाहजहांपुर टोल प्लाजा को पूरी तरह बैरियर-मुक्त बना दिया गया है।
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) प्रणाली एक ऐसी तकनीक है, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रोका नहीं जाता। इस तकनीक की मदद से गाड़ियों की पहचान स्वचालित रूप से की जाती है और टोल शुल्क सीधे वाहन मालिक के खाते से काट लिया जाता है।
इस व्यवस्था के तहत सड़क के ऊपर बड़े-बड़े गैंट्री ढांचे लगाए गए हैं। इन पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) सिस्टम और आरएफआईडी स्कैनर लगाए गए हैं।
जैसे ही कोई वाहन इन गैंट्री के नीचे से गुजरता है, उसकी नंबर प्लेट और फास्टैग की जानकारी तुरंत दर्ज कर ली जाती है।
इसके बाद टोल शुल्क स्वतः ही वाहन मालिक के खाते से काट लिया जाता है और मोबाइल फोन पर इसकी सूचना भेज दी जाती है।

पहले टोल प्लाजा पर वाहनों को अपनी गति कम करनी पड़ती थी। कई बार लंबी कतारों में खड़े रहने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी।
अब वाहन चालकों को अपनी गाड़ी रोकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी। गाड़ियां सामान्य गति से आगे बढ़ती रहेंगी और टोल की प्रक्रिया अपने आप पूरी हो जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे लाखों यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
फास्टैग में बैलेंस नहीं होने पर क्या होगा?
नई प्रणाली के साथ नियमों को भी अधिक सख्त बनाया गया है।
यदि किसी वाहन में पर्याप्त फास्टैग बैलेंस नहीं है या उसका फास्टैग निष्क्रिय है, तो वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा।
इसके बाद संबंधित व्यक्ति को 72 घंटे के भीतर भुगतान करना होगा।
अगर निर्धारित समय के भीतर राशि जमा नहीं की जाती है तो वाहन चालक को सामान्य टोल शुल्क से दोगुनी रकम चुकानी पड़ सकती है।
सरकार को क्या फायदा होगा?
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से टोल संग्रह प्रणाली पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
इससे नकद भुगतान की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। इसके अलावा टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों की संख्या में भी कमी आएगी और पूरी व्यवस्था डिजिटल तरीके से संचालित की जा सकेगी।

पर्यावरण को भी होगा फायदा
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण को मिलने वाला है।
जब गाड़ियों को बार-बार रुकना और चलना नहीं पड़ेगा, तो ईंधन की खपत कम होगी। इससे कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी घटेगा।
इसके अलावा सड़क पर वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम हो जाएगी।
आने वाले दिनों में और हाईवे भी होंगे शामिल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दिल्ली-जयपुर कॉरिडोर पर यह प्रयोग सफल साबित होता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इसी प्रणाली को लागू किया जा सकता है।
इससे भारत की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।
विशेषज्ञों की राय
परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई विकसित देशों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है। भारत में इस तकनीक के सफल होने के बाद सड़क परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह केवल तकनीक में बदलाव नहीं है, बल्कि लोगों के सोचने और यात्रा करने के तरीके में भी परिवर्तन का संकेत है।
देश में सड़क परिवहन के क्षेत्र में हो रहे बदलाव यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में भारत की परिवहन व्यवस्था और अधिक आधुनिक और तकनीक आधारित होने वाली है।
एनएच-48 पर शुरू हुई यह पहल केवल टोल व्यवस्था में बदलाव नहीं है, बल्कि यह समय, ईंधन और संसाधनों की बचत की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह नई व्यवस्था लोगों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।
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