भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नए आपराधिक कानूनों, डेयरी क्षेत्र, पशुपालन और नशे के खिलाफ अभियान को लेकर कई घोषणाएं और दावे किए। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में उज्जैन के ₹255 करोड़ के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की आधारशिला भी रखी गई।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन सिर्फ पशुपालन और दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहा। भेल दशहरा मैदान से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने न्याय व्यवस्था में बदलाव, नए आपराधिक कानून, डेयरी क्षेत्र के विस्तार, गोवंश संवर्धन और नशे के खिलाफ अभियान को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की।
सम्मेलन के बीच सबसे ज्यादा चर्चा अमित शाह के उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद तीन साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय प्रक्रिया को मजबूत और समयबद्ध बनाने का दावा किया।
‘तारीख पर तारीख’ से तीन साल में न्याय तक का दावा
अमित शाह ने पुराने न्याय तंत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इसे लंबे समय तक ‘तारीख पर तारीख’ वाली व्यवस्था के तौर पर देखा जाता रहा है। उनके मुताबिक नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद न्याय प्रक्रिया में बदलाव आया है और सरकार का लक्ष्य लोगों को समय पर न्याय दिलाना है।
उन्होंने दावा किया कि नई आपराधिक न्याय व्यवस्था पूरी तरह लागू होने के बाद FIR से लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्तर तक न्याय दिलाने की प्रक्रिया को तीन साल के भीतर पूरा करने की दिशा में व्यवस्था मजबूत होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार लगातार इनके प्रभाव और बदलावों को रेखांकित कर रही है। भोपाल कार्यक्रम में नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।
दूध उत्पादन के आंकड़ों से कांग्रेस पर निशाना
गोपालक सम्मेलन में अमित शाह ने दूध उत्पादन को लेकर कांग्रेस पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस को हिसाब देने आए हैं।
शाह के मुताबिक आजादी के बाद करीब 75 वर्षों के दौरान कांग्रेस शासन में देश का दूध उत्पादन लगभग 14 करोड़ 7 लाख टन तक पहुंचा, जबकि उनके दावे के अनुसार मोदी सरकार के 10 वर्षों में यह बढ़कर 25 करोड़ टन तक पहुंचा है।
उन्होंने दूध उत्पादन में देश के शीर्ष पांच राज्यों का उल्लेख करते हुए भाजपा शासित राज्यों की भूमिका बताई और इसी संदर्भ में कांग्रेस पर तंज कसा। शाह ने कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस की ‘नो एंट्री’ है, क्योंकि उनके अनुसार कांग्रेस ने गोपालकों के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।
यह बयान सम्मेलन के विकास और डेयरी एजेंडे के साथ-साथ कार्यक्रम के राजनीतिक संदेश का भी एक हिस्सा रहा।
50 एकड़ जमीन पर गोवंश संवर्धन और नस्ल सुधार
अमित शाह ने गोवंश संवर्धन को लेकर भी योजना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से 50 एकड़ जमीन मांगी थी, जिसे मंजूरी दे दी गई है।
शाह के मुताबिक इस जमीन पर गोवंश संवर्धन और नस्ल सुधार से जुड़े काम किए जाएंगे। उन्होंने तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की बात भी कही, जिसका उद्देश्य बछड़ों की तुलना में बछिया के जन्म की संभावना बढ़ाना बताया गया। इसके पीछे पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने और बेहतर नस्ल विकास को लक्ष्य बताया गया।
उज्जैन में ₹255 करोड़ का डेयरी प्लांट
सम्मेलन में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाएं भी सामने आईं। इनमें सबसे प्रमुख उज्जैन में ₹255 करोड़ की लागत से बनने वाला मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी। अमित शाह ने इसका डिजिटल भूमिपूजन किया।
इसके अलावा भोपाल में 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का उद्घाटन किया गया। केंद्र सरकार के कार्यक्रम विवरण के अनुसार इस प्लांट की लागत ₹16.5 करोड़ बताई गई है। साथ ही भोपाल में ₹12.42 करोड़ की लागत से तैयार राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला का भी उद्घाटन हुआ। शिवपुरी के मिनी डेयरी प्लांट के ₹6.5 करोड़ के सुदृढ़ीकरण कार्य का भी डिजिटल उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम में दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों को ₹15.10 करोड़ का लाभांश वितरित करने, भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के सदस्यों को बोनस देने और गौशालाओं को वित्तीय सहायता देने का कार्यक्रम भी रखा गया था। ‘गोपालक दीदियों’ को सम्मानित करने के साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत स्वीकृति पत्र भी दिए गए।
2029 के बाद नशे के लिए जगह नहीं होने का दावा
सम्मेलन में अमित शाह ने मध्य प्रदेश को नारकोटिक्स मुक्त बनाने के अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है और दावा किया कि 2029 के बाद मध्य प्रदेश में उनके बेटे-बेटियों के लिए नशे की जगह नहीं होगी।
इस तरह भोपाल का यह सम्मेलन एक साथ कई मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा—एक तरफ गोपालकों और डेयरी क्षेत्र के लिए नई परियोजनाएं और दूसरी तरफ नए आपराधिक कानूनों तथा नशे के खिलाफ सरकार की प्राथमिकताओं का संदेश।
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