त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने एक्सप्रेसवे पर संचालित बसों के खिलाफ सघन चेकिंग अभियान चलाया। एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय के नेतृत्व में चालकों का ब्रीथ एनालाइज़र से ड्रंकेन ड्राइविंग टेस्ट किया गया। वहीं, अधिकारियों ने बसों के अंदर पहुंचकर यात्रियों से किराए, ओवरलोडिंग और चालक के व्यवहार को लेकर फीडबैक भी लिया।
त्योहारों का मौसम आते ही सड़कों पर यात्रियों की आवाजाही बढ़ जाती है। बसों में भीड़ बढ़ने के साथ ही सुरक्षित सफर को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आने लगती हैं। कहीं निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने का मामला होता है, तो कहीं तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
इसी कड़ी में एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम ने एक्सप्रेसवे पर संचालित होने वाली बसों की सघन चेकिंग की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि त्योहारों के दौरान यात्रा करने वाले लोगों की जान और सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता न हो।
ब्रीथ एनालाइज़र से हुई चालकों की जांच, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर नजर
अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीम ने बस चालकों की जांच के लिए ब्रीथ एनालाइज़र का इस्तेमाल किया। इसके माध्यम से चालकों का ड्रंकेन ड्राइविंग यानी शराब पीकर वाहन चलाने की जांच की गई।
दरअसल, नशे की हालत में वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख जोखिमों में से एक है। खासकर एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों पर जहां वाहन तेज गति से चलते हैं, वहां चालक की छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए विभाग ने चालकों की जांच को अभियान का अहम हिस्सा बनाया।
परिवहन विभाग की टीम ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना केवल वाहन चालक की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बसों के अंदर पहुंचे एआरटीओ, यात्रियों से सीधे पूछे सवाल
इस अभियान की एक खास बात यह रही कि एआरटीओ डॉ. उदित नारायण पाण्डेय केवल सड़क पर खड़े होकर बसों की जांच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने स्वयं बसों के भीतर जाकर यात्रियों से बातचीत की।
इस दौरान यात्रियों से उनके सफर से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर फीडबैक लिया गया। अधिकारियों ने यात्रियों से बसों में वसूले जा रहे किराए, निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने यानी ओवरलोडिंग और चालक के व्यवहार के बारे में जानकारी प्राप्त की।
यात्रियों से सीधे संवाद करने का उद्देश्य यह जानना था कि उन्हें यात्रा के दौरान किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और बस संचालन में नियमों का कितना पालन किया जा रहा है।
अक्सर सड़क पर होने वाली जांच में वाहन के दस्तावेजों और तकनीकी पहलुओं पर अधिक ध्यान दिया जाता है, लेकिन यात्रियों से सीधे बातचीत करने से परिवहन सेवाओं की जमीनी स्थिति समझने में भी मदद मिलती है। इस पहल के जरिए विभाग ने यात्रियों की शिकायतों और अनुभवों को भी महत्व देने का प्रयास किया।
चालकों को दी गई सख्त हिदायत, निर्धारित गति सीमा में चलाएं वाहन
चेकिंग अभियान के दौरान बस चालकों को केवल नियमों की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए भी जागरूक और प्रेरित किया गया।
चालकों को यातायात नियमों का शत-प्रतिशत पालन करने, निर्धारित गति सीमा के भीतर वाहन चलाने और किसी भी परिस्थिति में लापरवाही न बरतने की हिदायत दी गई।

इसके साथ ही उन्हें दुर्घटना रहित चालन (Accident-Free Driving) के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने समझाया कि समय पर गंतव्य तक पहुंचने की जल्दबाजी में तेज रफ्तार अपनाना या यातायात नियमों की अनदेखी करना न केवल चालक, बल्कि बस में सवार सभी यात्रियों की जिंदगी को खतरे में डाल सकता है।
त्योहारों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. उदित नारायण पाण्डेय
अभियान को लेकर एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय ने बताया कि त्योहारों के इस सीजन में यात्रियों की सुरक्षा परिवहन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बसों के संचालन में सुरक्षा मानकों और यातायात नियमों का पालन अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों और संचालकों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
अब सवाल सिर्फ चेकिंग का नहीं, सुरक्षित सफर का भी है
एक्सप्रेसवे पर बसों की यह जांच ऐसे समय में की गई है, जब त्योहारों के चलते सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में ब्रीथ एनालाइज़र से चालकों की जांच, बसों के भीतर जाकर यात्रियों से बातचीत और ओवरलोडिंग व किराए की जानकारी लेना सुरक्षा व्यवस्था को परखने के महत्वपूर्ण कदम हैं।
हालांकि, किसी भी जांच अभियान की असली सफलता इस बात से तय होगी कि नियमों का पालन केवल अभियान के दौरान ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के बस संचालन में भी सुनिश्चित हो।
फिलहाल परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। अब देखना यह होगा कि एक्सप्रेसवे पर चलने वाली बसों में सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने के लिए यह सख्ती कितनी प्रभावी साबित होती है।
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