UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR चार्ज अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन इसका असर छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों तक पहुंचने लगा है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के सर्वे में 10.4 फीसदी वेंडरों ने बताया कि उनके सप्लायर UPI से भुगतान करने पर अतिरिक्त पैसे मांग रहे हैं। सर्वे में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 64 शहरों और कस्बों के 722 वेंडरों को शामिल किया गया।
आज बाजार में सब्जी खरीदने से लेकर किराना, चाय और रोजमर्रा के छोटे-बड़े सामान के भुगतान तक UPI लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। जेब में नकदी न हो तो मोबाइल से स्कैन किया और भुगतान पूरा। यही वजह है कि डिजिटल पेमेंट को आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए सुविधाजनक विकल्प माना जाता है।
लेकिन अब UPI चार्ज को लेकर चल रही चर्चा के बीच एक ऐसी बात सामने आई है, जिसने छोटे दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। हैरानी की बात यह है कि UPI पर प्रस्तावित MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट अभी लागू भी नहीं हुआ है, लेकिन कुछ वेंडरों से डिजिटल भुगतान करने पर अतिरिक्त पैसे मांगे जाने लगे हैं।
भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के एक सर्वे में यह खुलासा हुआ है। सर्वे के मुताबिक, करीब हर 10 में से एक वेंडर ने बताया कि उसके सप्लायर ने UPI के माध्यम से भुगतान करने पर अतिरिक्त चार्ज मांगा। यानी जिन छोटे कारोबारियों पर फिलहाल सीधे तौर पर यह प्रस्तावित चार्ज लागू नहीं है, उन्हें भी सप्लायर की ओर से अतिरिक्त भुगतान की मांग का सामना करना पड़ रहा है।
14 राज्यों के 64 शहरों में 722 वेंडरों से बातचीत
ISB के सेंटर फॉर एनालिटिकल फाइनेंस ने यह सर्वे 24 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 के बीच किया था। इसमें देश के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 64 शहरों और कस्बों के कुल 722 वेंडरों को शामिल किया गया।
सर्वे में सामने आया कि 10.4 फीसदी वेंडरों ने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान उनके सप्लायर ने UPI से भुगतान करने पर अतिरिक्त पैसे मांगे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सप्लायर वेंडरों से साफ तौर पर कह रहे हैं कि यदि भुगतान UPI के जरिए किया जाएगा तो उन्हें अतिरिक्त चार्ज देना होगा। वहीं, नकद यानी कैश में भुगतान करने पर किसी तरह का अतिरिक्त पैसा नहीं मांगा जाएगा।
यह स्थिति छोटे दुकानदारों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। छोटे वेंडर आमतौर पर सीमित पूंजी और कम मुनाफे के साथ कारोबार करते हैं। ऐसे में सप्लायर की ओर से लगाया जाने वाला अतिरिक्त चार्ज उनकी खरीद लागत बढ़ा सकता है। इसका असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है और आगे चलकर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।
आखिर UPI पर कितना MDR चार्ज लगाने का है प्रस्ताव?
इस पूरे विवाद के पीछे UPI ट्रांजैक्शन पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का प्रस्ताव है। MDR वह शुल्क होता है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट से ट्रांजैक्शन के बदले लिया जाता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक, चुनिंदा बड़े मर्चेंट को 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी चार्ज देना होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
वहीं, रेलवे, फ्यूल और शिक्षा जैसी कुछ श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज प्रस्तावित है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था हर UPI भुगतान पर लागू होने वाला सामान्य चार्ज नहीं है। इसका दायरा चुनिंदा बड़े मर्चेंट और निर्धारित श्रेणियों के लेनदेन तक सीमित बताया गया है। इसलिए इसे आम लोगों के हर छोटे UPI भुगतान पर शुल्क लगने के रूप में समझना सही नहीं होगा।
15 अक्टूबर से लागू होना था प्रस्ताव, अब दिवाली के बाद तक टला
प्रस्तावित MDR व्यवस्था को पहले 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना था। हालांकि, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इसके क्रियान्वयन को दिवाली के बाद तक टाल दिया है।
फिलहाल इसे लागू करने की कोई नई तारीख घोषित नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित व्यवस्था कब से प्रभावी होगी और इसके अंतिम स्वरूप में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं।
छोटे कारोबारियों की लागत पर पड़ सकता है असर
ISB के सर्वे का सबसे अहम पहलू यह है कि प्रस्तावित चार्ज लागू होने से पहले ही कुछ वेंडरों ने अतिरिक्त भुगतान की मांग की जानकारी दी है। हालांकि, सर्वे में सामने आए 10.4 फीसदी के आंकड़े को सभी सप्लायरों या पूरे बाजार की स्थिति नहीं माना जा सकता, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि UPI चार्ज को लेकर बनी अनिश्चितता का असर कारोबारियों के व्यवहार पर पड़ सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब प्रस्तावित MDR की नई तारीख तक तय नहीं हुई है, तो सप्लायर अभी से UPI भुगतान पर अतिरिक्त पैसे क्यों मांग रहे हैं? क्या यह अपनी ओर से लगाया जा रहा शुल्क है या UPI चार्ज को लेकर फैली गलतफहमी का नतीजा? फिलहाल सर्वे ने छोटे कारोबारियों के सामने खड़ी एक नई चिंता जरूर उजागर कर दी है।
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