नई दिल्ली में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) इन्द्रप्रस्थ के प्रांत मंत्री सुरेन्द्र गुप्ता ने मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च बताते हुए हिंसा, हत्या और आतंक का समर्थन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। उन्होंने ईद के अवसर पर सड़कों पर लगने वाली पशु मंडियों पर भी प्रतिबंध लगाने की अपील की।
नई दिल्ली में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) इन्द्रप्रस्थ इकाई की ओर से मानव सुरक्षा, कानून व्यवस्था और हिंसा विरोधी विचारधाराओं को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। विहिप इन्द्रप्रस्थ के प्रांत मंत्री सुरेन्द्र गुप्ता ने बुधवार को कहा कि मानव जीवन की रक्षा किसी भी राष्ट्र, न्याय व्यवस्था और सभ्य समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति, संस्था, विचारधारा या माध्यम सार्वजनिक रूप से हिंसा, हत्या, आतंक या समाज विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है, उसके खिलाफ कठोर और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत
सुरेन्द्र गुप्ता ने अपने बयान में हाल ही में खतरनाक पशुओं से मानव जीवन की सुरक्षा को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें किसी निर्दोष नागरिक की जान जाने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे को पहले ही रोकने की दिशा में कदम उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि यह मानव सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक सकारात्मक और आवश्यक पहल है, जो समाज में सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगी।
हिंसा फैलाने वाली विचारधाराओं पर उठाए सवाल
विहिप नेता ने कहा कि जब मानव जीवन के लिए खतरनाक पशुओं के खिलाफ समय रहते कार्रवाई को आवश्यक माना जा सकता है, तो फिर उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कठोर कदम क्यों नहीं उठाए जाने चाहिए जो खुलेआम हिंसा, हत्या, आतंक या भय का समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज समाज के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी को भी हिंसा फैलाने या हत्या का आह्वान करने की छूट दी जा सकती है।
सुरेन्द्र गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इस स्वतंत्रता की आड़ में निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काना या समाज में भय का माहौल बनाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संविधान से ऊपर कोई नहीं
अपने बयान में उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति, संस्था, पुस्तक, विचारधारा या मत-पंथ संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि अगर कोई भी माध्यम मानवता के खिलाफ हिंसा, आतंक या हत्या को बढ़ावा देता है, तो उस पर संवैधानिक और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विहिप नेता ने न्यायपालिका, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और प्रशासनिक संस्थाओं से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में स्पष्ट नीति बनाकर सख्त कदम उठाए जाएं ताकि समाज में कानून का शासन और अधिक मजबूत हो सके।
ईद पर लगने वाली पशु मंडियों पर भी उठाई मांग
सुरेन्द्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से विशेष अपील करते हुए कहा कि ईद के अवसर पर सड़कों पर लगने वाली पशु मंडियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियां भी एक प्रकार की “प्रतीकात्मक हिंसा” का रूप मानी जानी चाहिए।
उनका कहना था कि किसी भी सभ्य समाज में ऐसी प्रवृत्तियों को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए और सार्वजनिक स्थलों पर इस प्रकार के आयोजन सामाजिक संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं।
राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग
विहिप नेता ने कहा कि मानव सुरक्षा और सामाजिक शांति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर एक स्पष्ट राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म, साहित्य, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए कई बार ऐसे विचार फैलाए जाते हैं जो समाज में कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई बेहद जरूरी है।
रखीं छह प्रमुख मांगें
अपने बयान में सुरेन्द्र गुप्ता ने सरकार और प्रशासन के सामने छह बड़ी मांगें भी रखीं।
1. हिंसा का समर्थन करने वालों पर कठोर कार्रवाई
जो लोग सार्वजनिक रूप से हत्या या हिंसा का आह्वान करते हैं, उनके खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
2. संस्थाओं की उच्च स्तरीय जांच
ऐसी संस्थाओं और संगठनों की गहन जांच कराई जाए जो मानव विरोधी या हिंसक विचारधारा फैलाने में शामिल हैं।
3. साहित्य और डिजिटल सामग्री की समीक्षा
ऐसी किताबों, डिजिटल कंटेंट और प्रचार सामग्री की निष्पक्ष समीक्षा की जाए जो हिंसा या हत्या को बढ़ावा देती हैं।
4. सार्वजनिक पशु मंडियों पर प्रतिबंध
ईद समेत अन्य अवसरों पर सड़कों पर लगने वाली पशु मंडियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
5. समान कानून व्यवस्था
कानून सभी नागरिकों और संस्थाओं पर समान रूप से लागू किया जाए।
6. राष्ट्रीय सुरक्षा नीति
समाज में शांति और मानव सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जाए।
“मानवता की रक्षा ही सर्वोच्च धर्म”
अपने बयान के अंत में सुरेन्द्र गुप्ता ने कहा कि उनका विरोध किसी धर्म, समुदाय या वर्ग विशेष से नहीं है, बल्कि हिंसा, आतंक, कट्टरता और मानव विरोधी मानसिकता से है।
उन्होंने कहा—
“न कानून से ऊपर कोई व्यक्ति, न संस्था, न विचार। मानव जीवन सर्वोपरि है और मानवता की रक्षा ही सर्वोच्च धर्म है।”
विहिप के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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