युवा कांग्रेस ने ‘मेरी डिग्री का क्या?’ अभियान शुरू किया। अक्षय लाकड़ा ने 50,05,850 से अधिक खाली सरकारी पदों का दावा करते हुए एक साल में भर्ती की मांग की।
सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल अब सिर्फ परीक्षा और परिणाम का नहीं, बल्कि खाली पड़े पदों पर भर्ती का भी है। इसी मुद्दे को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस ने गुरुवार को देशव्यापी अभियान ‘मेरी डिग्री का क्या?’ की शुरुआत की। दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अभियान की वेबसाइट लॉन्च की गई और अगले एक साल के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी सामने रखी गई।
दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने दावा किया कि देशभर में 50,05,850 से अधिक स्वीकृत सरकारी पद खाली पड़े हैं। उनके मुताबिक एक ओर युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, दूसरी ओर सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद भर्तियां समय पर नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन रिक्त पदों को भरती है तो इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ-साथ स्कूल, अस्पताल और अन्य सरकारी सेवाओं की व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
‘डिग्री हाथ में, नौकरी का इंतजार’—अभियान का सवाल क्या है?
युवा कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के मौके पर इस अभियान की शुरुआत करते हुए बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की है। अभियान के नाम ‘मेरी डिग्री का क्या?’ के जरिए संगठन ने उस युवा की स्थिति को मुद्दा बनाया है, जो परिवार की आर्थिक कठिनाइयों के बीच पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में वर्षों गुजार रहा है।

अक्षय लाकड़ा ने कहा कि सामान्य परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए खर्च करता है, कई बार कर्ज तक लेता है और उम्मीद करता है कि शिक्षा आगे चलकर परिवार के भविष्य का आधार बनेगी। उनके अनुसार आज बड़ी संख्या में डिग्रीधारी युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हुए उन्हें भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षाओं और नियुक्तियों के बीच लंबा अंतराल जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
युवा कांग्रेस ने इस स्थिति को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में योग्य युवा उपलब्ध हैं और सरकारी विभागों में स्वीकृत पद खाली हैं, तो इन पदों को भरने में देरी क्यों हो रही है।
दो प्रमुख मांगें, भर्ती प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय करने की मांग
अभियान के तहत युवा कांग्रेस ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि हर खाली सरकारी पद के लिए समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए। संगठन का कहना है कि युवाओं को पहले से यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस विभाग में कितने पद हैं और उनकी भर्ती कब शुरू होगी।
दूसरी मांग भर्ती परीक्षा से नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया के लिए निश्चित समयसीमा तय करने की है। युवा कांग्रेस का तर्क है कि केवल परीक्षा की तारीख घोषित करना पर्याप्त नहीं है। आवेदन, परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा होनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।
एक साल तक देशभर में चलेगा अभियान
अक्षय लाकड़ा ने कहा कि अगले एक साल तक युवा कांग्रेस देशभर में इस अभियान को आगे बढ़ाएगी। इसके तहत युवाओं को जोड़ने और सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘नौकरी मार्च’ और ‘डिग्री मार्च’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।\

उन्होंने कहा कि संगठन सरकार से टकराव नहीं चाहता, बल्कि युवाओं के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि एक साल के भीतर खाली पड़े सरकारी पदों को भरने की दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।
युवा कांग्रेस ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के घेराव जैसे लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम किए जाएंगे। संगठन के मुताबिक यदि इसके बाद भी सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो अगले वर्ष प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम भी किया जाएगा।
‘यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं’
प्रेस वार्ता में युवा कांग्रेस ने इस अभियान को सिर्फ सरकारी नौकरियों की मांग तक सीमित नहीं बताया। संगठन के मुताबिक एक युवा नौकरी के साथ अपने माता-पिता का सहारा बनने, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और वर्षों की मेहनत का सम्मान पाने का अवसर चाहता है।
अक्षय लाकड़ा ने युवाओं से कहा कि उनकी मेहनत, समय और भविष्य की कीमत है। उन्होंने कहा कि ‘मेरी डिग्री का क्या?’ की आवाज को देशभर के विश्वविद्यालयों, कस्बों और गांवों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि सरकारी भर्ती और रोजगार को लेकर व्यापक चर्चा हो।
युवा कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान लोकतांत्रिक तरीके से युवाओं की आवाज को सामने लाने का माध्यम बनेगा। संगठन ने सरकार से कहा कि चुनी हुई सरकार की जिम्मेदारी है कि वह युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
प्रेस वार्ता के दौरान दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा के साथ भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली सह-प्रभारी परमिंदर सिंह पम्मी भी मौजूद रहे। अभियान की शुरुआत के साथ अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकारी पदों की रिक्तियों को लेकर उठाया गया यह सवाल आने वाले महीनों में किस तरह राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनता है और सरकार की ओर से इस पर क्या जवाब सामने आता है।
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