नोएडा इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद बढ़ने वाले माल और यात्री यातायात को देखते हुए ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने महायोजना 2041 में बदलाव की तैयारी की है। प्रस्ताव के तहत फ्रेट और पैसेंजर मूवमेंट को अलग करने की योजना है। हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क और लॉजिस्टिक हब से जेवर एयरपोर्ट तक 6 लेन एलिवेटेड सड़क प्रस्तावित है। करीब 15 किलोमीटर कनेक्टिविटी बढ़ने से ग्रेटर नोएडा गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ सकेगा।
ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर आने वाले दिनों में यातायात का दबाव किस तरह बदलेगा, इसे लेकर बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है। नोएडा इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट के जनसामान्य के लिए समर्पित होने के बाद क्षेत्र में यात्रियों के साथ-साथ माल वाहनों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने यात्री और माल यातायात को अलग-अलग करने की दिशा में प्रस्ताव तैयार किया है।
इसी प्रस्ताव को लेकर सोमवार को लखनऊ स्थित पिकअप भवन सभागार में औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रस्तावित कनेक्टिविटी और यातायात व्यवस्था की विस्तृत योजना मंत्री के सामने प्रस्तुत की।
फ्रेट और पैसेंजर मूवमेंट होंगे अलग
ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित बदलाव का सबसे अहम हिस्सा माल वाहनों और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करना है। इसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ने वाले माल यातायात को शहर के सामान्य यातायात से अलग रास्ता उपलब्ध कराना है।
प्राधिकरण के मुताबिक नोएडा इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद क्षेत्र में यात्री और माल दोनों तरह का आवागमन बढ़ेगा। अगर दोनों का यातायात एक ही नेटवर्क पर निर्भर रहा तो भविष्य में सड़कों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा महायोजना 2041 में संशोधन करते हुए अलग फ्रेट कॉरिडोर और कनेक्टिविटी विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्ताव के मुताबिक नोएडा और ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान बनाने के लिए हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क विकसित करने की योजना है।
अधिकारियों के अनुसार मौजूदा कनेक्टिविटी को लगभग 15 किलोमीटर आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़े जाने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस कनेक्टिविटी के विकसित होने पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होकर लगभग 30 से 45 मिनट रह जाने का अनुमान बताया गया है।
इससे न केवल आम यात्रियों के लिए आवागमन आसान हो सकता है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों से माल की आवाजाही को भी नया रास्ता मिलेगा।
लॉजिस्टिक हब से जेवर एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड
प्रस्तावित योजना का दूसरा बड़ा हिस्सा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब यानी MMLH से जेवर एयरपोर्ट तक 6 लेन एलिवेटेड सड़क का है।
अधिकारियों के मुताबिक फ्रेट मूवमेंट के लिए मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब से वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर 6 लेन की एलिवेटेड सड़क नियोजित किए जाने का प्रस्ताव है। इस सड़क का संरेखण महायोजना में दर्ज करते हुए इसे जेवर एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना है।
इसका सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि लॉजिस्टिक हब से आने वाला माल सामान्य शहर के यातायात में फंसे बिना सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंच सके।
MMLH और MMTH से बढ़ेगी माल ढुलाई
ग्रेटर नोएडा में MMLH और MMTH को प्रमुख आगामी परियोजनाओं के रूप में देखा जा रहा है। इन परियोजनाओं के विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
लॉजिस्टिक हब और एयरपोर्ट के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनने से औद्योगिक इकाइयों के लिए सामान की आवाजाही आसान हो सकती है। वहीं एयर कार्गो के जरिए माल को देश और विदेश के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाने के लिए भी कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

बैठक में औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के प्रमुख विकास क्षेत्रों के रूप में उभरे हैं।
मंत्री ने उद्योग, व्यापार और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जन उपयोगी योजनाएं तैयार किए जाने पर जोर दिया। उनके मुताबिक सरकार का उद्देश्य ऐसी योजनाएं तैयार करना है, जिनसे विकास के साथ आम लोगों की आवाजाही भी सुविधाजनक हो।
एयरपोर्ट शुरू होने से पहले कनेक्टिविटी पर फोकस
जेवर एयरपोर्ट के संचालन के साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की कनेक्टिविटी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। एक तरफ यात्री यातायात बढ़ेगा तो दूसरी ओर एयर कार्गो और औद्योगिक माल की आवाजाही भी बढ़ सकती है।
ऐसे में प्रस्तावित 105 मीटर चौड़ी सड़क, करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक हब से एयरपोर्ट तक 6 लेन एलिवेटेड रोड की योजना को भविष्य की जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
अगर प्रस्तावित नेटवर्क योजना के मुताबिक विकसित होता है, तो ग्रेटर नोएडा की सड़क व्यवस्था में फ्रेट और पैसेंजर मूवमेंट के लिए अलग-अलग रास्तों का नया ढांचा तैयार हो सकता है। इससे शहर के सामान्य यातायात पर औद्योगिक माल वाहनों का दबाव कम करने और लॉजिस्टिक हब से एयर कार्गो टर्मिनल तक सीधी आवाजाही उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
फिलहाल यह योजना प्रस्तावित स्तर पर है और महायोजना 2041 में संशोधन की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। आने वाले चरणों में इसके संरेखण, भूमि और निर्माण से जुड़े पहलुओं पर निर्णय के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
COMMENTS