भारत और साइप्रस के बीच रिश्तों को ‘स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाने के फैसले ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति निकोस की मुलाकात को भारत की यूरोप रणनीति, निवेश विस्तार और चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। जानिए इस ऐतिहासिक डील के पीछे क्या है असली गेम प्लान।
दुनिया इस समय तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के दौर से गुजर रही है। यूरोप, पश्चिम एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अब अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने में जुटा दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स की नई दिल्ली में हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
हैदराबाद हाउस में हुई इस अहम बैठक में भारत और साइप्रस ने अपने संबंधों को ‘स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। निवेश, व्यापार, यूरोपियन यूनियन कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरी सहमति बनी। यही वजह है कि इस मुलाकात को सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत के बड़े रणनीतिक गेम प्लान के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति निकोस और उनके प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि भारत और साइप्रस के रिश्ते लोकतंत्र, कानून के शासन और संप्रभुता के सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। पीएम मोदी ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष साइप्रस यात्रा के दौरान उन्हें वहां के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हुआ है और अब दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में इसे फिर दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि साइप्रस के साथ बढ़ती साझेदारी भारत के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकती है। साइप्रस यूरोपियन यूनियन का सदस्य है और रणनीतिक रूप से यूरोप तथा पश्चिम एशिया के बीच बेहद अहम स्थान पर स्थित है। ऐसे में भारत के लिए यह देश यूरोप में आर्थिक और रणनीतिक पहुंच मजबूत करने का बड़ा माध्यम बन सकता है। यही कारण है कि भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी इस बैठक में सकारात्मक संकेत देखने को मिले।

प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि भारत और साइप्रस का रिश्ता समय की कसौटी पर हमेशा मजबूत साबित हुआ है। अब यह साझेदारी व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और वैश्विक मामलों में नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच फिनटेक, इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल सेक्टर में सहयोग तेजी से बढ़ सकता है।
बैठक के दौरान वैश्विक संकटों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों नेताओं ने शांति और संवाद को सबसे बड़ा समाधान बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत है। इसे भारत के उस बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें वह खुद को सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करना चाहता है।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि साइप्रस के साथ भारत की यह नई साझेदारी चीन की बढ़ती वैश्विक सक्रियता के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। चीन लगातार यूरोप और पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में भारत छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से अहम देशों के साथ रिश्तों को मजबूत कर अपने प्रभाव का विस्तार करना चाहता है।

इस मुलाकात ने यह भी साफ कर दिया कि भारत अब केवल बड़े देशों तक सीमित कूटनीति नहीं कर रहा, बल्कि उन देशों पर भी फोकस कर रहा है जो वैश्विक शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। साइप्रस समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और यूरोपियन बाजार तक पहुंच के लिहाज से भारत के लिए बेहद उपयोगी साझेदार साबित हो सकता है।
भारत दौरे के दौरान राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का कार्यक्रम भी तय किया। राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में आधिकारिक भोज का आयोजन किया गया। इससे पहले राष्ट्रपति निकोस मुंबई पहुंचे थे, जहां उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी एनएसई का दौरा किया और ट्रेडिंग बेल बजाई। इसे भारत की आर्थिक क्षमता और निवेश माहौल में बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी राष्ट्रपति निकोस से मुलाकात की और भारत-साइप्रस संबंधों को नई मजबूती देने पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत और साइप्रस के बीच बढ़ता सहयोग भारत-यूरोपियन यूनियन संबंधों को नई दिशा देगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति निकोस की यह मुलाकात केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसने दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत अब बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को लगातार विस्तार देने के मिशन पर आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह साझेदारी भारत की यूरोप नीति, वैश्विक व्यापार रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रभाव को नई ऊंचाई दे सकती है।
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