गुजरात के केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के समीप 30 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की रेपर्टरी कंपनी ने ‘आनंद मठ’ का भव्य मंचन किया। लगभग 300 कलाकारों और सहयोगियों की भागीदारी वाली इस प्रस्तुति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देखा और सराहा। नाटक के माध्यम से देशभक्ति, बलिदान, मातृभूमि के प्रति समर्पण और भारत की साहित्यिक विरासत को मंच पर जीवंत किया गया।
इतिहास के पन्नों में दर्ज कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि पीढ़ियों तक लोगों के भीतर देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाती रहती हैं। ऐसी ही एक कालजयी साहित्यिक रचना को 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के केवड़िया में रंगमंच पर जीवंत कर दिया गया।
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के समीप बने खुले रंगमंच पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) की रेपर्टरी कंपनी ने भव्य नाट्य प्रस्तुति ‘आनंद मठ’ का मंचन किया। इस विशेष आयोजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देखा और प्रस्तुति की सराहना की।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ पर आधारित इस नाटक में भारतीय इतिहास, साहित्य, संगीत, नृत्य और रंगमंच की विभिन्न विधाओं का ऐसा मेल देखने को मिला, जिसने इसे एक विशेष सांस्कृतिक आयोजन का रूप दिया।
18वीं सदी के संन्यासी विद्रोह की कहानी ने फिर जगाई देशभक्ति की भावना
वर्ष 1882 में प्रकाशित ‘आनंद मठ’ भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। इसकी कहानी 18वीं शताब्दी के संन्यासी विद्रोह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। उपन्यास में उन संन्यासियों के संघर्ष को दर्शाया गया है, जिन्होंने मातृभूमि के प्रति समर्पण, देशभक्ति और बलिदान की भावना के साथ राष्ट्रहित के लिए संघर्ष किया।
इस साहित्यिक कृति का सबसे महत्वपूर्ण जुड़ाव भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से है। यह गीत इसी उपन्यास का हिस्सा है और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत बना।
गौरतलब है कि 7 नवंबर 2025 से ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्मरणोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसी ऐतिहासिक संदर्भ में ‘आनंद मठ’ की यह प्रस्तुति स्वतंत्रता सेनानियों के साहस, देशभक्ति और बलिदान को समर्पित एक विशेष रंगमंचीय श्रद्धांजलि के रूप में सामने आई।
300 कलाकारों की मेहनत से मंच पर उतरा भव्य दृश्य संसार
इस नाट्य प्रस्तुति को भव्य स्वरूप देने के लिए लगभग 300 कलाकारों और सहयोगियों ने हिस्सा लिया। इसमें अभिनेता, ललित कला विशेषज्ञ, डिजाइनर, शिल्पकार और लोक कलाकार शामिल रहे। सभी के सामूहिक प्रयासों से मंच पर ऐसा नाट्य अनुभव तैयार किया गया, जिसमें अभिनय के साथ दृश्य सज्जा, संगीत और नृत्य का भी विशेष महत्व रहा।
नाटक का नाट्य रूपांतरण आसिफ अली हैदर ने किया है। वहीं, इसका नाट्य रूपांकन, संगीत, परिकल्पना और निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने संभाला। प्रस्तुति में सशक्त अभिनय, भावपूर्ण संगीत, लयबद्ध गतिविधियों और बारीकी से तैयार मंच सज्जा के जरिए उपन्यास की कहानी को जीवंत रूप दिया गया।
छऊ नृत्य से लेकर युद्ध दृश्यों तक, हर विभाग ने निभाई अहम भूमिका
‘आनंद मठ’ को प्रभावशाली बनाने में कई अनुभवी कलाकारों और विशेषज्ञों का योगदान रहा। नाटक की दृश्य परिकल्पना राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की रेपर्टरी के प्रमुख राजेश सिंह ने तैयार की, जबकि प्रकाश परिकल्पना की जिम्मेदारी ज्ञानदेव सिंह ने संभाली। मंच पर इस्तेमाल होने वाली सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की डिजाइन अरुण कुमार मल्लिक ने तैयार की।
प्रसिद्ध छऊ नृत्य गुरु और पद्मश्री सम्मान से अलंकृत शशाधर आचार्य ने नाटक की नृत्य संरचना तैयार की। वहीं, भारतीय फिल्म उद्योग के जाने-माने एक्शन निर्देशक अब्दुल रशीद मेहता ने युद्ध और एक्शन दृश्यों का निर्देशन किया। संतोष सिंह ने संगीत प्रोग्रामिंग और बैकग्राउंड स्कोर की जिम्मेदारी संभाली, जबकि राघवेंद्र तिवारी इस प्रस्तुति के सह-निर्देशक रहे।
भक्ति आंदोलन और ‘गीत गोविंद’ से प्रेरित रहा नाटक का संगीत
इस नाटक की एक खास विशेषता इसका संगीत भी रहा। नाटक का संगीत और गीत चित्तरंजन त्रिपाठी ने तैयार किए। इसकी संगीत रचना में भक्ति आंदोलन और महाकवि जयदेव की प्रसिद्ध रचना ‘गीत गोविंद’ से प्रेरणा ली गई है। इससे प्रस्तुति को भावनात्मक और आध्यात्मिक गहराई मिली।
इसके अलावा नाटक के गीतों में आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ‘जगन्नाथ अष्टकम्’ का एक पद भी शामिल किया गया है। इस तरह प्रस्तुति में भारतीय साहित्यिक और आध्यात्मिक परंपराओं को भी स्थान मिला।
NSD रेपर्टरी के सफर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की रेपर्टरी कंपनी के लिए ‘आनंद मठ’ का यह मंचन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी रेपर्टरी कंपनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अपनी नाट्य प्रस्तुतियां पेश करने और उनकी सराहना प्राप्त करने का अवसर मिल चुका है। वर्ष 2026 में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर गुजरात के केवड़िया में आयोजित नाट्य प्रस्तुति भी इसी सिलसिले का हिस्सा रही है।
कुल मिलाकर, ‘आनंद मठ’ का यह मंचन केवल एक साहित्यिक कृति का नाट्य रूपांतरण नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संघर्ष की प्रेरणाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास रहा। साहस, अनुशासन, त्याग और सामूहिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को केंद्र में रखकर तैयार की गई इस प्रस्तुति ने रंगमंच के माध्यम से इतिहास और वर्तमान के बीच एक भावनात्मक सेतु बनाने का प्रयास किया।
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