दिल्ली में स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के विरोध में शनिवार को संसद मार्ग थाने के बाहर हिंदूवादी संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र की रिहाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं पुलिस के अनुसार, स्वतंत्र को जुलाई में दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशू आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले के मामले में बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया है।
दिल्ली में शनिवार को संसद मार्ग थाना उस वक्त प्रदर्शन का केंद्र बन गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के विरोध में हिंदूवादी संगठनों के लोग वहां पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि स्वतंत्र भारद्वाज को रिहा किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
प्रदर्शन का नेतृत्व शिवम ठाकुर और दक्ष चौधरी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ निशू आजाद की ओर से लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को सिर्फ आरोपों के आधार पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
हालांकि दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का कहना है कि स्वतंत्र भारद्वाज को एक पुराने मामले में कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, मामला जुलाई में दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशू आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले से जुड़ा है।
बुलंदशहर से हिरासत में लिए गए स्वतंत्र भारद्वाज
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया।
बताया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशू आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की गई थी। इस घटना के बाद मामले में कार्रवाई की मांग उठ रही थी।
विवाद तब और बढ़ गया जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट का वीडियो सामने आया। दावा किया गया कि इस बातचीत में उन्होंने संजय कुमार की खोपड़ी फोड़ने की बात स्वीकार की थी। इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर एक रात थाने में रखने के बाद छोड़ दिया गया था।
वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने फिर तूल पकड़ा और स्वतंत्र की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई।
72 घंटे का आश्वासन, चार घंटे में हुई गिरफ्तारी
बताया गया कि वीडियो सामने आने के बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस की ओर से गिरफ्तारी के लिए 72 घंटे का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई।
लेकिन इसके कुछ ही घंटे बाद घटनाक्रम तेजी से बदल गया। दावा है कि पुलिस ने 72 घंटे की समयसीमा पूरी होने से काफी पहले, करीब चार घंटे में ही स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से पकड़ लिया।
अब इसी गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने लगाया एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग का आरोप
स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में जुटे प्रदर्शनकारियों ने मामले में एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कानून का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को गलत तरीके से फंसाने के लिए नहीं होना चाहिए।
प्रदर्शनकारी यह भी मांग कर रहे हैं कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो स्वतंत्र भारद्वाज को राहत दी जाए।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की ओर से निशू आजाद पर हिंदू देवी-देवताओं के अपमान का आरोप भी लगाया जा रहा है। हालांकि ये आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
कई धाराओं में केस दर्ज होने की बात
इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई गंभीर धाराएं जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास के अनुसार, एफआईआर में एससी/एसटी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस के तहत पीछा करने, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और आईटी एक्ट की धाराएं शामिल की गई हैं।
इसके अलावा स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
इन धाराओं के सामने आने के बाद मामला केवल कथित मारपीट तक सीमित नहीं रह गया है। अब जांच में पुलिस को अलग-अलग आरोपों और उनसे जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल करनी होगी।
संसद मार्ग थाने के बाहर बढ़ा तनाव
स्वतंत्र की हिरासत के विरोध में शनिवार को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं और मामले में निष्पक्ष जांच की बात कह रहे हैं।
दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई इस मामले में दर्ज शिकायत और आरोपों के आधार पर आगे बढ़ रही है। ऐसे में फिलहाल पूरा विवाद दो अलग-अलग दावों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है—एक तरफ स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थक आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस ने कथित हमले और अन्य आरोपों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई की है।
अब इस पूरे मामले में आगे की जांच क्या तस्वीर सामने लाती है, किन आरोपों की पुष्टि होती है और अदालत में मामला किस दिशा में बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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