Friday, April 17, 2026

“850 सीटों की नई लोकसभा?” महिला आरक्षण पर सरकार का मास्टरस्ट्रोक, बदल जाएगा देश का सियासी नक्शा

तीन बड़े विधेयक संसद में पेश—महिलाओं को 33% आरक्षण, परिसीमन और सीटों के नए गणित पर सियासी संग्राम तेज

New Delhi , Latest Updated On - Apr 16 2026 | 16:33:00 PM
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सरकार ने लोकसभा में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए तीन अहम विधेयक पेश किए हैं। इनसे लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 850 हो सकती हैं, जबकि विपक्ष परिसीमन को लेकर सवाल उठा रहा है।

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देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए हैं। इन विधेयकों के जरिए 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह लागू करने की तैयारी की जा रही है।

Narendra Modi सरकार का यह कदम न सिर्फ महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, बल्कि इससे देश की संसदीय संरचना में भी ऐतिहासिक बदलाव संभव है।


कौन-कौन से बिल हुए पेश?

सरकार ने लोकसभा में तीन प्रमुख विधेयक पेश किए—

  1. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
  2. परिसीमन विधेयक, 2026
  3. केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक, 2026

इन तीनों का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करना और इसके लिए जरूरी संवैधानिक व संरचनात्मक बदलाव करना है।



क्या होगा सबसे बड़ा बदलाव?

अगर ये विधेयक पारित हो जाते हैं, तो देश की राजनीति में चार बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे—

  • लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण
  • लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना
  • निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन यानी परिसीमन
  • परिसीमन आयोग का गठन

यह बदलाव भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को एक नई दिशा दे सकते हैं।


850 सीटों वाली लोकसभा का प्रस्ताव

सबसे बड़ा और चर्चित प्रस्ताव लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करना है। इसमें—

  • 815 सीटें राज्यों के लिए
  • 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए

इस बदलाव के लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।


जनगणना और परिसीमन का गणित

विधेयक में साफ किया गया है कि परिसीमन के लिए उसी जनगणना को आधार बनाया जाएगा, जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हों।

फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े ही उपलब्ध हैं, इसलिए शुरुआती चरण में इन्हीं के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।



विपक्ष का विरोध क्यों?

विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन परिसीमन के मौजूदा प्रस्तावों से असहमत है।

विपक्ष की मुख्य मांगें हैं—

  • महिला आरक्षण लागू हो, लेकिन मौजूदा सीटों के आधार पर
  • परिसीमन 2026 की नई जनगणना के बाद किया जाए
  • मौजूदा प्रावधानों में बदलाव किया जाए

Tamil Nadu, Kerala और Telangana की सरकारों ने भी इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है।


क्या दक्षिण भारत को होगा नुकसान?

विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन के जरिए उत्तर भारत के राज्यों—जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार—की सीटों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होगा।

हालांकि सरकार ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि सभी राज्यों की सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि की जाएगी, जिससे किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।


सीटों का संभावित गणित

सरकार के प्रस्तावित 50% फॉर्मूले के अनुसार—

  • तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59 सीटें
  • केरल: 20 से बढ़कर 30 सीटें
  • आंध्र प्रदेश: 25 से बढ़कर 37 सीटें
  • तेलंगाना: 17 से बढ़कर 31 सीटें (अनुमानित)

इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि सभी राज्यों को समान लाभ मिलेगा।




पास कराने में क्यों जरूरी है विपक्ष?

चूंकि यह संविधान संशोधन से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।

  • लोकसभा में कुल सदस्य: 540
  • दो-तिहाई बहुमत: 360
  • एनडीए के पास: 292 सांसद
  • विपक्ष के पास: 233 सांसद

इस गणित के मुताबिक, सरकार को यह बिल पास कराने के लिए विपक्ष के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।


55 साल बाद बड़ा बदलाव?

वर्तमान में लोकसभा सीटों का आधार 1971 की जनगणना है। इसे समय-समय पर बढ़ाया गया, लेकिन अब 2026 के बाद यह सीमा खत्म हो रही है।

यानी 55 साल बाद पहली बार सीटों के बड़े पुनर्गठन की संभावना बन रही है।


सरकार का पक्ष

संसदीय कार्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि सभी दल मिलकर इस ऐतिहासिक कदम को आगे बढ़ाएंगे और देश की महिलाओं को उनका अधिकार दिलाएंगे।

सरकार का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम है।

महिला आरक्षण, परिसीमन और सीटों की बढ़ोतरी—ये तीनों मुद्दे मिलकर भारतीय राजनीति का चेहरा बदल सकते हैं।

अब निगाहें संसद पर टिकी हैं—क्या विपक्ष सरकार के साथ आएगा, या इस पर सियासी टकराव और तेज होगा?

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