20 दिन में उखड़ गई करोड़ों की सड़क! ग्रेटर नोएडा के यूपीसीडा साइट-4 में निर्माण कार्य पर उठे बड़े सवाल, अब जांच की मांग तेज
ग्रेटर नोएडा के यूपीसीडा (UPSIDA) साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र में हाल ही में बनी सड़क के कई हिस्से टूटने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में अनियमितता, अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई सड़क महज 20 दिनों के भीतर जगह-जगह से उखड़ने लगी है। इस मामले ने न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
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ग्रेटर नोएडा के यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र में हाल ही में बनाई गई सड़क अब विवादों के केंद्र में आ गई है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस सड़क की परत महज 20 दिनों के भीतर कई स्थानों से उखड़ने लगी है। सड़क की हालत देखकर स्थानीय उद्यमियों, व्यापारियों और क्षेत्रीय निवासियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते कुछ ही दिनों में सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।
निर्माण पूरा होते ही सामने आने लगीं खामियां
औद्योगिक क्षेत्र की यह सड़क रोजाना सैकड़ों छोटे और बड़े वाहनों के आवागमन का प्रमुख मार्ग मानी जाती है। उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा भारी मालवाहक वाहन भी इसी रास्ते से गुजरते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने के कुछ ही दिनों बाद इसकी ऊपरी परत उखड़ने लगी। धीरे-धीरे कई स्थानों पर गड्ढे बनने लगे और सड़क की सतह कमजोर दिखाई देने लगी। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया होता तो इतनी कम अवधि में सड़क की ऐसी स्थिति नहीं होती।
अधिकारियों को दी गई जानकारी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के बारे में कई बार संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई। लोगों ने आरोप लगाया है कि वरिष्ठ प्रबंधक एन.के. जैन, संबंधित प्रबंधक और जूनियर इंजीनियर महेश यादव को भी इस मामले से अवगत कराया गया था।
स्थानीय लोगों का दावा है कि मौखिक शिकायतों के बावजूद किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती चरण में ही मामले को गंभीरता से लिया जाता तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
ठेकेदार और अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप निर्माण एजेंसी और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े मानकों का भी ठीक तरह से पालन नहीं किया गया।
लोगों का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी से की गई हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय नागरिकों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े लोगों ने यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की प्रयोगशाला में जांच कराई जानी चाहिए। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य के दौरान सभी तकनीकी मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
लोगों की मांग है कि यदि जांच में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, अभियंताओं और अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप
औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों का कहना है कि प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार बड़ी परियोजनाओं पर निवेश कर रही है। ऐसे में यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया जाएगा तो सरकारी धन का दुरुपयोग होगा और उद्योगों की गतिविधियां भी प्रभावित होंगी।
उनका कहना है कि सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाएं किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की रीढ़ होती हैं। यदि इन परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता नहीं होगी तो इसका सीधा असर निवेश और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच सकता है मामला
शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो इस मामले को मुख्यमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य सक्षम अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक सड़क के टूटने का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा एक गंभीर विषय है। लोगों की मांग है कि सड़क का दोबारा निर्माण कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल, पूरे मामले को लेकर यूपीसीडा प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, क्षेत्र के लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और करोड़ों रुपये की इस परियोजना की वास्तविक स्थिति आखिर क्या है।
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