करीब 101 करोड़ रुपये की लागत से बने नोएडा इंडोर स्टेडियम का 15 वर्षों के लिए दिया गया संचालन अनुबंध विवादों में घिर गया है। एक निजी संस्था ने नोएडा प्राधिकरण से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि स्टेडियम का संचालन कर रही कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारियों के आधार पर ठेका हासिल किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने जांच शुरू कर दी है।
खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए नोएडा इंडोर स्टेडियम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस स्टेडियम के संचालन से जुड़े 15 वर्षीय टेंडर पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि स्टेडियम का संचालन करने वाली कंपनी ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और गलत सूचनाओं के आधार पर यह ठेका हासिल किया था।
इतना ही नहीं, कंपनी पर टेंडर की शर्तों का उल्लंघन करने, स्टेडियम के भीतर संचालित जिम को दूसरी कंपनी को सौंपने और बिना फायर एनओसी के गतिविधियां संचालित करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों के सामने आने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के बाद बढ़ा विवाद
मामले की शुरुआत एक निजी संस्था की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि स्टेडियम संचालन का अनुबंध हासिल करने के लिए संबंधित कंपनी ने कई प्रसिद्ध खिलाड़ियों के नामों का इस्तेमाल किया था।
शिकायत में दावा किया गया है कि इन खिलाड़ियों में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज विजेंद्र सिंह और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी आर.पी. सिंह समेत अन्य खिलाड़ियों के नाम भी शामिल थे।
आरोप है कि कंपनी ने इन खिलाड़ियों को कंपनी में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला भागीदार बताया था और उनके अनुभव का हवाला देकर खुद को योग्य साबित किया था।
हालांकि, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन खिलाड़ियों के नामों का इस्तेमाल किया गया, वे वर्तमान में कंपनी से जुड़े हुए नहीं हैं। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अनुभव प्रमाण-पत्रों पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान जो अनुभव प्रमाण-पत्र जमा किए थे, उनकी प्रामाणिकता भी संदेह के घेरे में है।
उनका दावा है कि कंपनी के पास बड़े खेल परिसरों या स्टेडियमों के संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसे इतने बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
यदि जांच के दौरान ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे टेंडर सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करेगा।
जिम संचालन को लेकर भी विवाद
मामले का एक और पहलू स्टेडियम परिसर में संचालित जिम से जुड़ा हुआ है।
आरोप है कि स्टेडियम संचालन कर रही कंपनी ने जिम के संचालन का अधिकार किसी दूसरी कंपनी को सौंप दिया और इसके बदले किराया वसूला गया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि टेंडर की शर्तों में इस प्रकार की किसी व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या कंपनी ने अपने अधिकारों का दायरा बढ़ाकर नियमों का उल्लंघन किया है।
फायर एनओसी नहीं मिलने से बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर मुद्दा खिलाड़ियों और दर्शकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
स्टेडियम में नियमित रूप से विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में खिलाड़ी यहां प्रशिक्षण भी लेते हैं।
इसके बावजूद यह आरोप लगाया गया है कि स्टेडियम के लिए अब तक फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र यानी फायर एनओसी प्राप्त नहीं की गई है।
ऐसी स्थिति में यदि किसी प्रकार की दुर्घटना या आग लगने की घटना होती है, तो इससे बड़ी जनहानि हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक स्थल के संचालन के लिए सुरक्षा मानकों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
नोएडा प्राधिकरण ने क्या कदम उठाए?
मामला सामने आने के बाद नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश ने संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो टेंडर की शर्तों के संभावित उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं।
इसके बाद संबंधित कंपनी को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ा है मामला
नोएडा इंडोर स्टेडियम को शहर के सबसे महत्वपूर्ण खेल परिसरों में गिना जाता है। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं।
ऐसे में यह विवाद केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर खिलाड़ियों की सुविधाओं, सुरक्षा और खेल व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और नोएडा प्राधिकरण इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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