गौतमबुद्धनगर के थाना बादलपुर पुलिस ने दोपहिया वाहन चोरी करने वाले कथित अंतर्राज्यीय गैंग का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से 13 मोटरसाइकिल, एक स्कूटी और दो अवैध चाकू बरामद किए हैं। पूछताछ में रेकी कर वाहन चोरी करने, उन्हें सुनसान खाली प्लॉट में छिपाने और बाद में सस्ते दामों पर बेचने की बात सामने आई है।
अगर आपकी बाइक या स्कूटी घर, बाजार या सड़क किनारे खड़ी है, तो कुछ ही मिनटों में वह गायब हो सकती है। लेकिन चोरी के बाद इन वाहनों का क्या होता है? कौन इन्हें छिपाता है और किस तरह इनका सौदा किया जाता है?
बादलपुर पुलिस ने इसी सवाल का जवाब तलाशते हुए दो-पहिया वाहन चोरी करने वाले कथित अंतर्राज्यीय गैंग का खुलासा किया है। पुलिस की कार्रवाई में दो शातिर आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और उनकी निशानदेही से एक-दो नहीं, बल्कि 14 चोरी के दोपहिया वाहन बरामद हुए हैं।
बरामद वाहनों में 13 मोटरसाइकिल और एक स्कूटी शामिल है। इसके साथ ही आरोपियों के पास से दो अवैध चाकू भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई 8 सितंबर 2026 को मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। थाना बादलपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों को 6 प्रतिशत आबादी के पास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सैफ अली और शादाब के रूप में हुई है।
रेकी के बाद होती थी चोरी, खाली प्लॉट बनते थे ठिकाने
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि दोनों मिलकर पहले मोटरसाइकिल और स्कूटी की रेकी करते थे। जिस वाहन को आसान निशाना समझते, उसे चोरी कर लेते थे।
चोरी के बाद वाहन को तुरंत बेचने के बजाय वे उसे किसी सुनसान पड़े खाली प्लॉट में छिपाकर रखते थे। इसके बाद मौका देखकर चोरी किए गए दोपहिया वाहनों को सस्ते दामों में राहगीरों को बेच दिया जाता था।
पुलिस के मुताबिक इन वाहनों को बेचकर जो रकम मिलती थी, उसे दोनों आपस में बांट लेते थे। इसके बाद पैसा व्यक्तिगत जरूरतों और शौक-मौज में खर्च किया जाता था।
यानी पुलिस के अनुसार गिरोह का तरीका बेहद सीधा था—पहले रेकी, फिर वाहन चोरी, उसके बाद सुनसान प्लॉट में छिपाना और आखिर में सस्ते दामों पर ग्राहक तलाशकर बेच देना।
एक मैकेनिक, दूसरा कबाड़ खरीदने का काम करता था
गिरफ्तार आरोपियों में सैफ अली पेशे से मैकेनिक बताया गया है। वह ग्राम प्यावली, थाना जारचा, गौतमबुद्धनगर का निवासी है। उसकी उम्र करीब 28 वर्ष है और उसने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।
दूसरा आरोपी शादाब, पुत्र आशिक अली, गौतमबुद्धनगर के थाना दादरी क्षेत्र के चाँद मोहल्ले का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 27 वर्ष है और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह अशिक्षित है। वह कबाड़ खरीदने का काम करता है।
मैकेनिक और कबाड़ खरीदने वाले व्यक्ति की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चोरी किए गए वाहनों को बेचने और उनके निस्तारण में इनके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे।
पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं।
इस मामले में थाना बादलपुर में मु0अ0सं0 0266/2026, धारा 317(5) BNS और धारा 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इसके अलावा थाना बादलपुर में ही मु0अ0सं0 0356/2025, धारा 238(c), 303(2), 317(2), 317(5) BNS के तहत मामला दर्ज है।
दिल्ली के थाना फतेहपुर बेरी में मु0अ0सं0 5122/2025 दर्ज है।
गाजियाबाद के थाना शालीमार गार्डन में मु0अ0सं0 0336/2025, धारा 303(2) BNS का मुकदमा दर्ज है।
वहीं गौतमबुद्धनगर के थाना दादरी में मु0अ0सं0 0130/2026, धारा 303(2) BNS के तहत मुकदमा दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से कुल 14 दोपहिया वाहन बरामद किए गए हैं।
बरामदगी में DL3SDM5616 नंबर की एक मोटरसाइकिल, हीरो स्प्लेंडर प्लस UP14EY5925, हीरो पैशन प्रो UP23L7912, बजाज प्लेटिना UP16U8246 और हीरो पैशन प्रो मोटरसाइकिल शामिल है, जिसका चेसिस/इंजन नंबर MBLHA10BJFGE00921 बताया गया है।
इसके अलावा हीरो स्प्लेंडर प्लस DL3SDD8874, हीरो स्प्लेंडर प्लस DL14SB4766, हीरो HF डीलक्स UP16DX1248, हीरो स्प्लेंडर प्लस UP16BY3026, हीरो स्प्लेंडर प्लस UP16CH5922 और हीरो पैशन प्रो UP14DZ8527 भी बरामद की गई हैं।
पुलिस ने हीरो स्प्लेंडर प्लस DL7SCC1996, TVS रेडियोन UP81CC1602 और होंडा एक्टिवा HR10Z3202 भी बरामद की है।
इनमें कुल 13 मोटरसाइकिल और एक स्कूटी शामिल है।
इसके अलावा आरोपियों के कब्जे से दो अवैध चाकू भी बरामद किए गए हैं।
अब जांच का दायरा बढ़ेगा
एक ही कार्रवाई में अलग-अलग राज्यों और जिलों के नंबर वाली इतनी बड़ी संख्या में दोपहिया वाहनों की बरामदगी के बाद मामले की जांच और महत्वपूर्ण हो गई है।
दिल्ली, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर से जुड़े मुकदमों के बीच पुलिस अब यह पता लगाने में जुटेगी कि बरामद वाहनों को कहां से चोरी किया गया था और उन्हें किन लोगों को बेचा जाना था।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या ये 14 वाहन ही इस कथित गैंग की पूरी चोरी का आंकड़ा हैं, या फिर इनके पीछे चोरी किए गए वाहनों की इससे कहीं बड़ी संख्या छिपी हुई है?
पुलिस के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ और आगे की जांच में इस कथित अंतर्राज्यीय वाहन चोरी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वारदातों का भी पता चल सकता है।
फिलहाल बादलपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने वाहन चोरी के एक ऐसे कथित नेटवर्क को सामने ला दिया है, जिसमें चोरी से लेकर वाहन छिपाने और फिर उन्हें सस्ते दामों पर बेचने तक का पूरा तरीका पुलिस की जांच में सामने आया है।
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