राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। गुरुग्राम से ग्रेटर नोएडा तक नमो भारत ट्रेन और मेट्रो को एकीकृत कॉरिडोर पर चलाने की योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होकर हरियाणा सरकार के पास पहुंच चुकी है। इस परियोजना के तहत 22 नए स्टेशन बनाए जाएंगे और करीब 19,390 करोड़ रुपये की लागत से पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सार्वजनिक परिवहन को और अधिक आधुनिक, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने गुरुग्राम से फरीदाबाद, नोएडा होते हुए ग्रेटर नोएडा तक प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन और मेट्रो कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर हरियाणा सरकार को मंजूरी के लिए भेज दी है।
यदि इस परियोजना को अंतिम स्वीकृति मिल जाती है, तो आने वाले वर्षों में पहली बार ऐसा होगा जब गुरुग्राम से ग्रेटर नोएडा तक एक ही कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन और मेट्रो सेवाएं संचालित होती दिखाई देंगी। इससे लाखों दैनिक यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा का विकल्प मिलेगा।
करीब 19,390 करोड़ रुपये की होगी लागत
डीपीआर के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 19,390 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कुल कॉरिडोर की लंबाई लगभग 63 किलोमीटर होगी।
इसमें—
- लगभग 50 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में होगा।
- करीब 13 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में विकसित किया जाएगा।
यह कॉरिडोर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ेगा।

22 स्टेशन होंगे, नमो भारत और मेट्रो दोनों को मिलेगा अलग नेटवर्क
परियोजना के तहत कुल 22 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं।
इनमें—
- 7 स्टेशन नमो भारत ट्रेन के होंगे।
- 15 स्टेशन मेट्रो सेवा के लिए विकसित किए जाएंगे।
इस मॉडल का उद्देश्य लंबी दूरी के यात्रियों के लिए तेज गति वाली नमो भारत सेवा उपलब्ध कराना और स्थानीय यात्रियों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना है।
कहां-कहां बनेंगे नमो भारत के स्टेशन?
डीपीआर के अनुसार नमो भारत ट्रेन के प्रमुख स्टेशन इस प्रकार प्रस्तावित हैं—
गुरुग्राम
- सेक्टर-61
- सेक्टर-58 चौक
- ग्वाल पहाड़ी
फरीदाबाद
- सैनिक कॉलोनी
- बाटा चौक
- सेक्टर-87-88 चौक
उत्तर प्रदेश
- नोएडा सेक्टर-142
- नोएडा सेक्टर-168 चौक
- ग्रेटर नोएडा सूरजपुर
इन स्टेशनों के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ा जाएगा।
मेट्रो नेटवर्क का भी होगा बड़ा विस्तार
नमो भारत कॉरिडोर के साथ-साथ मेट्रो सेवाओं का भी विस्तार प्रस्तावित किया गया है।
योजना के अनुसार—
- गुरुग्राम में 5 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे।
- फरीदाबाद में 7 नए मेट्रो स्टेशन विकसित किए जाएंगे।
इससे स्थानीय यात्रियों को अंतिम छोर (Last Mile Connectivity) तक बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इफ्को चौक बनेगा सबसे बड़ा इंटरचेंज स्टेशन
पूरी परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र इफ्को चौक होगा।
यहीं पर—
- गुरुग्राम-ग्रेटर नोएडा नमो भारत कॉरिडोर
- और सराय काले खां से बावल तक प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर
एक-दूसरे से जुड़ेंगे।
यात्रियों को यहां बिना लंबा इंतजार किए विभिन्न रूटों पर आसानी से ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी।
इफ्को चौक भविष्य में एनसीआर के सबसे महत्वपूर्ण मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित हो सकता है।
रेवाड़ी से ग्रेटर नोएडा तक मिलेगा सीधा लाभ
इस परियोजना के पूरा होने के बाद केवल गुरुग्राम और नोएडा ही नहीं, बल्कि—
- रेवाड़ी
- धारूहेड़ा
- गुरुग्राम
- फरीदाबाद
- नोएडा
- ग्रेटर नोएडा
जैसे शहरों के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
दैनिक नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अब आगे क्या होगा?
हरियाणा मेट्रो रेल ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (HMRTC) के अधिकारियों के अनुसार डीपीआर पर अब विभिन्न विभागों से सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी।
इनमें प्रमुख रूप से—
- गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA)
- हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP)
- गुरुग्राम नगर निगम
- फरीदाबाद के संबंधित विभाग
शामिल होंगे।
इन सभी विभागों से प्राप्त सुझावों को शामिल करने के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।
NCR की तस्वीर बदल सकती है यह परियोजना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो यह एनसीआर के परिवहन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है।
एकीकृत नमो भारत और मेट्रो नेटवर्क न केवल यात्रा का समय कम करेगा, बल्कि सड़क यातायात का दबाव भी घटाएगा, प्रदूषण कम करने में मदद करेगा और औद्योगिक व आर्थिक विकास को नई गति देगा।
हालांकि, फिलहाल यह परियोजना प्रस्तावित चरण में है और इसके निर्माण की शुरुआत अंतिम प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद ही संभव होगी।
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