उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौतमबुद्धनगर में लोक निर्माण विभाग की वर्ष 2026-27 की मेरठ मंडल कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी विधानसभा क्षेत्र विकास से वंचित नहीं रहेगा। मेरठ मंडल में ₹6568.36 करोड़ की लागत से 1284 विकास परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं, जिन्हें जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता और स्थानीय जरूरतों के आधार पर तेजी से लागू किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ मंडल के विकास को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। गौतमबुद्धनगर में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर विधानसभा क्षेत्र तक विकास की किरण पहुंचे और कोई भी क्षेत्र उपेक्षित न रह जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं का आधार केवल बजट नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक आवश्यकताएं और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताएं होनी चाहिए। इसी सोच के साथ मेरठ मंडल में ₹6568.36 करोड़ की लागत वाली 1284 विकास परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सांसदों और विधायकों से कहा कि वे अपने-अपने लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की आवश्यकताओं का गंभीरता से अध्ययन कर प्राथमिकता के अनुसार प्रस्ताव तैयार करें।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से जानते हैं। इसलिए विकास कार्यों की योजना बनाते समय उनके सुझावों और प्राथमिकताओं को सर्वोच्च स्थान दिया जाना चाहिए। इससे योजनाएं अधिक प्रभावी होंगी और जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

कोई भी विधानसभा क्षेत्र नहीं रहेगा अछूता
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्ययोजना तैयार करते समय प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को समान अवसर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी क्षेत्र में लगातार विकास कार्य होते रहें और कोई दूसरा क्षेत्र वर्षों तक बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करता रहे। प्रदेश सरकार संतुलित क्षेत्रीय विकास के सिद्धांत पर कार्य कर रही है और इसी दिशा में यह कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
जहां विकास नहीं पहुंचा, वहां पहले पहुंचे योजनाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए जहां अब तक सड़क, पुल या अन्य आधारभूत विकास कार्य अपेक्षाकृत कम हुए हैं।
उन्होंने कहा कि नए प्रस्ताव ऐसे क्षेत्रों के लिए तैयार किए जाएं जहां पूर्व में इस प्रकार के विकास कार्य नहीं हुए हैं। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास का लाभ नए क्षेत्रों तक पहुंचेगा।
अधूरे कार्यों को भी मिलेगा पूरा महत्व
बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जिन विकास परियोजनाओं को पहले स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन उनका कुछ हिस्सा अभी अधूरा है, उन्हें भी नई कार्ययोजना में शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि जनता को अधूरी परियोजनाओं से कोई लाभ नहीं मिलता। इसलिए पहले से स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

धार्मिक स्थलों के विकास पर भी स्पष्ट नीति
मुख्यमंत्री ने धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों से जुड़े प्रस्तावों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्ताव केवल उन स्थानों के लिए तैयार किए जाएं जहां श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो और निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त एवं उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि धार्मिक स्थलों के विकास से जुड़े प्रस्ताव स्थानीय आवश्यकताओं, जनसुविधा और व्यवहारिकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जाएं ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
स्वीकृति प्रक्रिया में नहीं होगी देरी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी प्रस्तावों की स्वीकृति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कई बार परियोजनाएं केवल फाइलों में अटकी रहती हैं, जिससे विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब होता है। इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर समयबद्ध तरीके से स्वीकृतियां प्रदान करें ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास केवल परियोजनाओं की संख्या बढ़ाने का नाम नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता और पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक परियोजना में गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे हों और उनमें किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।

गौतमबुद्धनगर में आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के. पी. मलिक, पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कुमार कश्यप, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सोमेंद्र तोमर, लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री एवं गौतमबुद्धनगर के प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक, मेरठ मंडल के सांसद एवं विधायक उपस्थित रहे।
इसके अलावा मेरठ मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी, नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम सहित शासन, प्रशासन, प्राधिकरण और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
मेरठ मंडल को मिलेगी नई विकास गति
मुख्यमंत्री की इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट संकेत मिला है कि प्रदेश सरकार अब विकास योजनाओं को केवल बजट तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें जनप्रतिनिधियों की भागीदारी, स्थानीय आवश्यकताओं और संतुलित क्षेत्रीय विकास के आधार पर लागू करना चाहती है।
यदि निर्धारित समयसीमा में इन 1284 परियोजनाओं पर कार्य शुरू होता है तो मेरठ मंडल के सड़क नेटवर्क, आधारभूत ढांचे, धार्मिक स्थलों और जनसुविधाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार का दावा है कि यह कार्ययोजना आने वाले वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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