ग्रेटर नोएडा में बढ़ते धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने व्यापक अभियान चलाया। CAQM के निर्देशों के तहत सेक्टर-2, ईकोटेक-12 और अन्य चिन्हित सड़कों पर मशीनों से सफाई, जल छिड़काव और निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट का निस्तारण किया गया, ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और धूल के स्तर को कम करने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने व्यापक सफाई अभियान चलाया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुपालन में प्राधिकरण ने शनिवार को सेक्टर-2, ईकोटेक-12 सहित कई चिन्हित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर सड़कों की सघन सफाई, जल छिड़काव तथा निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट के निस्तारण का कार्य किया।
GNIDA अधिकारियों के अनुसार, धूल प्रदूषण को कम करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी पर्यावरणीय प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से चिन्हित मार्गों पर आधुनिक सफाई मशीनों के माध्यम से सड़क किनारे जमा धूल और मिट्टी को हटाया गया। इसके साथ ही टैंकरों की सहायता से नियमित जल छिड़काव किया गया ताकि उड़ने वाली धूल पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

प्राधिकरण ने बताया कि जिन स्थानों पर निर्माण गतिविधियों के कारण निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट जमा था, वहां से उसे हटाकर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया गया। इससे न केवल सड़कें साफ हुईं बल्कि आसपास के वातावरण में उड़ने वाले धूल कणों में भी कमी आने की उम्मीद है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) लगातार एनसीआर के सभी विकास प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों को धूल प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश देता रहा है। इन्हीं निर्देशों के तहत GNIDA ने यह विशेष अभियान चलाया, जिसमें विभिन्न विभागों की टीमें मौके पर मौजूद रहीं और सफाई कार्य की निगरानी की गई।

अधिकारियों का कहना है कि धूल प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए केवल सफाई ही नहीं, बल्कि नियमित जल छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय, खुले में मलबा न छोड़ना और C&D वेस्ट का समय पर निस्तारण भी बेहद जरूरी है। इसी दिशा में प्राधिकरण लगातार कार्रवाई कर रहा है।
GNIDA ने नागरिकों, बिल्डरों और निर्माण एजेंसियों से अपील की है कि वे निर्माण सामग्री को खुले में न रखें, मलबे का निर्धारित स्थानों पर ही निस्तारण करें और धूल नियंत्रण संबंधी सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करें। इससे ग्रेटर नोएडा की वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने में सामूहिक सहयोग मिलेगा।

प्राधिकरण का कहना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। उद्देश्य यह है कि शहर में स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जाए और नागरिकों को बेहतर वायु गुणवत्ता उपलब्ध हो सके।
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