गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस और अभिसूचना इकाई ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों के कब्जे से 1.07 किलोग्राम सफेद पाउडरनुमा ड्रग्स, चार मोबाइल फोन, दो इलेक्ट्रॉनिक तराजू और पैकिंग सामग्री बरामद हुई है। बरामद ड्रग्स की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है। दोनों आरोपियों के पास मौके पर पासपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद संबंधित दूतावासों को सूचना देने की कार्रवाई की जा रही है।
गौतमबुद्धनगर में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच सूरजपुर थाना पुलिस और अभिसूचना इकाई को बड़ी सफलता मिलने का दावा किया गया है। संयुक्त टीम ने गोपनीय सूचना और मैनुअल इंटेलिजेंस के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों के कब्जे से 1.07 किलोग्राम सफेद पाउडरनुमा ड्रग्स, चार मोबाइल फोन, दो इलेक्ट्रॉनिक तराजू, एक काला बैग और ड्रग्स की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन बरामद की गई है।
सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि आखिर ग्रेटर नोएडा के एक रिहायशी इलाके में यह कथित ड्रग्स नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके तार कहां तक जुड़े हुए हैं?
पुलिस के अनुसार बरामद सफेद पाउडरनुमा ड्रग्स की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये है। बरामदगी में इलेक्ट्रॉनिक तराजू और पैकिंग सामग्री का मिलना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह पदार्थ कहां से लाया गया था और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
पुलिस के मुताबिक, 25 अगस्त 2026 को थाना सूरजपुर पुलिस और अभिसूचना इकाई ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। टीम को मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के माध्यम से इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी।
सूचना को विकसित करने के बाद पुलिस टीम ने ग्राम भूड़ा में स्टेडियम के सामने स्थित एक मकान पर कार्रवाई की। यहां से दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साबी जोएल और अमादा लतीफा के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, साबी जोएल की उम्र करीब 32 वर्ष है और वह कैमरून के निवासी बताए गए हैं। वहीं दूसरी आरोपी अमादा लतीफा की उम्र लगभग 33 वर्ष बताई गई है और वह नाइजीरिया के डेल्टा स्टेट, अगबोर क्षेत्र की निवासी हैं।

दोनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उनके भारत आने, यहां रहने और कथित रूप से नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू दोनों विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान जब आरोपियों से उनके पासपोर्ट के संबंध में जानकारी मांगी गई तो वे मौके पर पासपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सके।
पुलिस का कहना है कि इस संबंध में अभिसूचना इकाई के माध्यम से संबंधित दूतावासों को अवगत कराने की प्रक्रिया की जा रही है।
यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा कि दोनों आरोपी भारत में किस आधार पर रह रहे थे, उनके यात्रा और आव्रजन दस्तावेज क्या हैं और क्या उनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। इन सवालों के जवाब जांच और संबंधित एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी के बाद ही स्पष्ट होंगे।
क्या केवल दो आरोपी या नेटवर्क में और भी लोग?
बरामदगी के दौरान पुलिस को चार मोबाइल फोन भी मिले हैं। अब इन मोबाइलों की जांच से कथित नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी सामने आने की संभावना है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे, किन नंबरों पर बातचीत की जा रही थी और क्या इनका कोई स्थानीय, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क मौजूद है।
इसके अलावा दो इलेक्ट्रॉनिक तराजू और चार पैकेट पॉलीथिन की बरामदगी भी जांच के दायरे में है। पुलिस इन सभी साक्ष्यों को कथित ड्रग्स की सप्लाई, मात्रा और पैकिंग से जुड़े संभावित पहलुओं की जांच में शामिल करेगी।
बरामद सफेद पाउडर की वास्तविक प्रकृति और उसकी रासायनिक संरचना की पुष्टि वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के बाद ही होगी। पुलिस द्वारा इसे फिलहाल ड्रग्स के रूप में बरामद किया गया है।
ये सामान हुआ बरामद
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान निम्न सामान बरामद किया गया—
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1.07 किलोग्राम सफेद पाउडरनुमा ड्रग्स
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04 मोबाइल फोन
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02 इलेक्ट्रॉनिक तराजू
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01 काला बैग
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04 पैकेट पॉलीथिन, कथित रूप से पैकिंग के लिए इस्तेमाल
बरामद ड्रग्स की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है।

दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना सूरजपुर में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, मु0अ0सं0 480/2026 के तहत धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट के साथ-साथ आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम की धारा 23 में कार्रवाई की गई है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब मामले की आगे की जांच कर रही हैं। जांच का फोकस केवल बरामद ड्रग्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपियों के भारत में रहने की स्थिति क्या थी और कथित ड्रग्स नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
भूड़ा गांव के उस मकान से आखिर कहां तक जाते हैं तार?
इस पूरे मामले में अभी कई सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं। आखिर 1.07 किलो सफेद पाउडर वहां कैसे पहुंचा? इसका स्रोत क्या था? क्या यह किसी बड़े सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा था? क्या इसे ग्रेटर नोएडा या एनसीआर के किसी दूसरे इलाके में पहुंचाया जाना था? और सबसे अहम सवाल—क्या इस मामले में दो आरोपियों के अलावा भी अन्य लोग शामिल हैं?
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच, मोबाइल फोन की पड़ताल, बरामद पदार्थ की वैज्ञानिक जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सामने आएगा।
फिलहाल, सूरजपुर पुलिस और अभिसूचना इकाई की यह कार्रवाई ग्रेटर नोएडा में कथित नशे के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे सामने आते हैं या नहीं, इस पर नजर बनी रहेगी।
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