नोएडा के सेक्टर-61 से सेक्टर-18 को जोड़ने वाली एलिवेटेड रोड पर अचानक सड़क धंसने से करीब 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बन गया। घटना के बाद ट्रैफिक रोकने से दोनों तरफ लंबा जाम लग गया। नोएडा प्राधिकरण ने बैरिकेडिंग कर मरम्मत की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन सड़क की गुणवत्ता और निर्माण के नीचे की जमीन की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
हाईटेक सिटी नोएडा में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई सड़कें अगर अचानक बीच रास्ते में धंसने लगें तो सवाल सिर्फ एक गड्ढे का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली का बन जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा सेक्टर-61 से सेक्टर-18 को जोड़ने वाली एलिवेटेड रोड पर देखने को मिला, जहां अचानक सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया और बीच सड़क पर करीब 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बन गया।
यह वही एलिवेटेड रोड है जिस पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं और जो नोएडा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। यह रास्ता दिल्ली, डीएनडी, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ओर आने-जाने वाले लोगों के लिए भी अहम कनेक्टिविटी देता है। ऐसे में व्यस्त सड़क के बीच अचानक इतना गहरा गड्ढा बनना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अचानक धंसी सड़क, टला बड़ा हादसा
सड़क धंसने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। बताया जा रहा है कि एलिवेटेड रोड के बीचों-बीच सड़क का हिस्सा अचानक नीचे बैठ गया। स्थिति ऐसी थी कि सड़क की सतह के नीचे की जमीन खोखली होने जैसी तस्वीर दिखाई दे रही थी।
गनीमत रही कि जिस समय सड़क धंसी, उस दौरान कोई तेज रफ्तार वाहन सीधे इस गड्ढे की चपेट में नहीं आया। अगर किसी वाहन चालक को समय रहते इसका अंदाजा नहीं होता तो बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था।
घटना के बाद एहतियातन प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक को रोका गया। इसके चलते एलिवेटेड रोड पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कुछ समय के लिए वाहन चालकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
करोड़ों की सड़क और बीच में इतना बड़ा सवाल
करीब 4.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड नोएडा के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गिनी जाती है। ऐसे में सड़क का इस तरह धंसना निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-2 क्षेत्र से जुड़ी इस सड़क पर सामने आई घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सड़क के नीचे ऐसा क्या हुआ कि मजबूत दिखाई देने वाली सतह अचानक धंस गई?
क्या जमीन के नीचे पानी का रिसाव हुआ? क्या मिट्टी का कटाव हुआ? क्या नीचे की भराई या बेस लेयर में कोई कमी थी? या फिर सड़क के रखरखाव में कहीं चूक हुई? इन सवालों का जवाब तकनीकी जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
फिलहाल सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों ने सड़क निर्माण और उसकी गुणवत्ता को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।
गड्ढे के चारों ओर बैरिकेडिंग, अंदर लगाया गया पौधा
घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा के लिहाज से गड्ढे के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई। इसके बाद सड़क की मरम्मत की तैयारी भी शुरू की गई।
लेकिन मौके की तस्वीरों को लेकर एक अलग तरह की चर्चा भी सामने आई। गड्ढे के आसपास बैरिकेडिंग के साथ वहां पौधा लगाया गया। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर तंज भी देखने को मिला—“कहीं गड्ढे पर रेड कार्पेट, तो कहीं गड्ढे में पौधा…”
सवाल यह है कि क्या केवल बैरिकेडिंग और गड्ढे को भर देना पर्याप्त होगा? या फिर यह पता लगाना जरूरी है कि सड़क के नीचे की संरचना में आखिर खराबी कहां आई?
स्थानीय लोगों ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि नोएडा को देश के हाईटेक शहरों में गिना जाता है और यहां विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के दावे किए जाते हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से बनी इतनी महत्वपूर्ण सड़क का अचानक धंसना गंभीर विषय है।
स्थानीय लोगों ने सड़क की केवल सतही मरम्मत करने के बजाय निर्माण गुणवत्ता और पूरी परियोजना की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समस्या सड़क के ऊपर नहीं बल्कि उसके नीचे है, तो सिर्फ ऊपर से गड्ढा भरने से भविष्य में खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
जांच का आश्वासन, लेकिन असली जवाब का इंतजार
नोएडा प्राधिकरण की ओर से घटना की जांच की बात कही गई है और मौके पर मरम्मत संबंधी काम शुरू किया गया है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच में सड़क धंसने की वास्तविक वजह क्या सामने आती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ आज बने एक गड्ढे का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सड़क की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाती है।
हाईटेक शहर की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों, एलिवेटेड रोड और चौड़ी सड़कों से नहीं होती। असली पहचान तब बनती है, जब इन सड़कों पर सफर करने वाला हर व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करे।
अब देखना यह होगा कि नोएडा प्राधिकरण इस गड्ढे को भरने तक सीमित रहता है या सड़क धंसने की जड़ तक पहुंचकर जिम्मेदारी भी तय करता है। फिलहाल एक सवाल शहर के सामने है—अगर इतनी व्यस्त और महत्वपूर्ण सड़क अचानक 10 फीट नीचे धंस सकती है, तो अगली बार सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
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