ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में मेडिकल रिसर्च विभाग की मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) ने तीन दिवसीय "NGS Data Analysis: Lecture Series and Hands-on Workshop" की शुरुआत की है। इस वर्कशॉप में देशभर के फैकल्टी, शोधार्थी और छात्र आधुनिक जीनोमिक्स एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है। आज बीमारियों की पहचान केवल पारंपरिक जांचों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें चिकित्सा अनुसंधान की दिशा तय कर रही हैं। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) ने भविष्य के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
GIMS के मेडिकल रिसर्च विभाग के अंतर्गत कार्यरत मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) ने 16 जुलाई 2026 से तीन दिवसीय वर्चुअल "NGS Data Analysis: Lecture Series and Hands-on Workshop" का शुभारंभ किया। यह कार्यशाला 16 से 18 जुलाई तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित की जा रही है।
इस वर्कशॉप में GIMS के फैकल्टी सदस्यों, पोस्टग्रेजुएट छात्रों, रिसर्च स्कॉलर्स और विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों का कहना है कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि आधुनिक जीनोमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव भी उपलब्ध कराना है।
क्या है NGS और क्यों है इसकी बढ़ती अहमियत?
Next-Generation Sequencing (NGS) आधुनिक जैव-चिकित्सा अनुसंधान की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक मानी जाती है। इसके माध्यम से वैज्ञानिक कम समय में बड़ी मात्रा में डीएनए और आरएनए का विश्लेषण कर सकते हैं। यही तकनीक कैंसर, आनुवंशिक रोगों, दुर्लभ बीमारियों, संक्रामक रोगों और व्यक्तिगत चिकित्सा (Precision Medicine) जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है।
आज विश्वभर के शोध संस्थान और मेडिकल विश्वविद्यालय NGS तकनीक को भविष्य की चिकित्सा का आधार मान रहे हैं। ऐसे में GIMS द्वारा इस विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना संस्थान की शोध उन्मुख सोच को दर्शाता है।
17 वर्षों के अनुभवी विशेषज्ञ दे रहे हैं प्रशिक्षण
इस कार्यशाला का संचालन डॉ. कलैयारासन पोनुसामी कर रहे हैं, जो चेन्नई स्थित SRM Institute of Science & Technology के Division of Medical Research से जुड़े हैं।
डॉ. पोनुसामी एक प्रतिष्ठित Computational Biologist और Bioinformatician हैं तथा उन्हें Artificial Intelligence, Bioinformatics, Genomics और Structural Biology के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
अपने अनुभव के आधार पर वे प्रतिभागियों को केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं, बल्कि वास्तविक शोध परियोजनाओं में इन तकनीकों के उपयोग की भी जानकारी दे रहे हैं।
पहले दिन क्या-क्या सिखाया गया?
वर्कशॉप के पहले दिन प्रतिभागियों को Next-Generation Sequencing Technology की मूल अवधारणा और RNA-seq Workflow का विस्तृत परिचय कराया गया।
इसके बाद हैंड्स-ऑन सत्र में प्रतिभागियों को आधुनिक डेटा विश्लेषण के लिए आवश्यक कई तकनीकी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इनमें प्रमुख रूप से—

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Ubuntu Linux की इंस्टॉलेशन
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Linux Command Line का अभ्यास
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FastQC और MultiQC के माध्यम से डेटा की गुणवत्ता का मूल्यांकन
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Read Trimming
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Data Pre-processing
जैसी प्रक्रियाएं शामिल रहीं।
प्रतिभागियों ने स्वयं इन सॉफ्टवेयर और टूल्स पर अभ्यास किया, जिससे उन्हें वास्तविक रिसर्च कार्य के लिए आवश्यक व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
प्रश्नोत्तर सत्र ने बढ़ाया सीखने का अनुभव
कार्यशाला के दौरान प्रत्येक तकनीकी सत्र के बाद इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किए गए।
इस दौरान प्रतिभागियों ने अपने शोध से जुड़े सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे और उन्हें विस्तृत समाधान प्राप्त हुआ। आयोजकों के अनुसार, इस संवादात्मक प्रक्रिया ने प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी और उपयोगी बना दिया।
संस्थान निदेशक ने दिया प्रेरणादायी संदेश
कार्यक्रम के दौरान GIMS के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक मेडिकल और क्लीनिकल रिसर्च में Next-Generation Sequencing तथा Bioinformatics Data Analysis की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। शोधकर्ताओं और छात्रों को इन तकनीकों में व्यावहारिक दक्षता विकसित करनी होगी ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाएं और नई तकनीकों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को निरंतर बनाए रखें।
अगले दो दिन होंगे और भी महत्वपूर्ण
तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अगले चरणों में और भी उन्नत विषयों को शामिल किया गया है।
17 जुलाई को प्रतिभागियों को RNA-seq Data Processing तथा Differential Expression Analysis का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वहीं 18 जुलाई को Functional Genomics और Biological Interpretation जैसे उन्नत विषयों पर विस्तृत व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
आयोजकों का मानना है कि इन विषयों की समझ आधुनिक जीनोमिक्स आधारित रिसर्च के लिए अत्यंत आवश्यक है।
रिसर्च संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में GIMS का कदम
GIMS के मेडिकल रिसर्च विभाग ने स्पष्ट किया है कि संस्थान भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैज्ञानिक कार्यशालाएं और अकादमिक गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित करता रहेगा।
संस्थान का उद्देश्य शोध क्षमता का विकास करना, युवा वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर की तकनीकों से जोड़ना तथा भारत में उन्नत जैव-चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेडिकल संस्थानों में इस प्रकार की व्यावहारिक कार्यशालाओं का दायरा बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में भारत जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और प्रिसिजन मेडिसिन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर और मजबूत पहचान बना सकता है।
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