नोएडा के सेक्टर-66 स्थित ममूरा गांव में एक पीजी भवन में ई-स्कूटी की बैटरी फटने से भीषण आग लग गई। महज छह मिनट में आग और धुआं पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रारंभिक जांच में फायर सेफ्टी की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पीजी संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
गौतमबुद्ध नगर के नोएडा स्थित सेक्टर-66 के ममूरा गांव में बुधवार को हुआ भीषण अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि बहुमंजिला पीजी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। एक इलेक्ट्रिक स्कूटी की बैटरी में हुए विस्फोट ने कुछ ही मिनटों में पूरी पांच मंजिला इमारत को धुएं और आग की चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में एक युवती समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोगों को दमकल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा। इमारत में फंसे लोग जान बचाने के लिए बालकनियों में पहुंच गए, कई लोग छत पर चढ़ गए और कुछ ने घबराहट में दूसरी इमारतों की ओर छलांग तक लगा दी। शुरुआती जांच में भवन में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिलने पर पुलिस ने पीजी संचालक को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 11:30 बजे ममूरा गांव स्थित एनसीआर पीजी एंड फ्लैट के ग्राउंड फ्लोर पर एक इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग पर लगी हुई थी।इसी दौरान उसकी लिथियम-आयन बैटरी में तेज धमाका हुआ। विस्फोट के साथ ही स्कूटी में आग लग गई और देखते ही देखते आग आसपास खड़े दोपहिया वाहनों तक फैल गई।

ग्राउंड फ्लोर पर 18 से अधिक बाइक और स्कूटी खड़ी थीं। वाहनों में मौजूद पेट्रोल, प्लास्टिक, रबर और अन्य ज्वलनशील सामग्री ने आग को और भी भयावह बना दिया। कुछ ही मिनटों में पूरा पार्किंग क्षेत्र आग की लपटों में घिर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग से ज्यादा खतरनाक उसका घना धुआं था। ग्राउंड फ्लोर से उठने वाला जहरीला धुआं सीढ़ियों के रास्ते तेजी से ऊपर पहुंचा और करीब छह मिनट के भीतर पांचवीं मंजिल तक फैल गया।
करीब 80 कमरों वाले इस भवन में 250 से अधिक लोग रह रहे थे। इनमें छात्र, निजी कंपनियों में काम करने वाले युवक-युवतियां और कई परिवार शामिल थे। धुआं फैलने के कारण लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया और पूरी इमारत में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
धुआं भरते ही लोग अपने कमरों से निकलकर बालकनियों और छतों पर पहुंच गए। कई लोगों ने जान बचाने के लिए पड़ोसी इमारतों की ओर छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने भी साहस दिखाते हुए एक छत से दूसरी छत तक सीढ़ियां लगाकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की।
सूचना मिलने पर दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। ममूरा की संकरी गलियों के कारण राहत कार्य में शुरुआती कठिनाइयां आईं, लेकिन सात दमकल गाड़ियों, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और लंबी पाइपलाइन की मदद से आग पर करीब दो घंटे बाद काबू पाया गया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई लोगों को खिड़कियों और बालकनियों से सीढ़ियों के जरिए बाहर लाया गया।

दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में बिहार की रहने वाली 22 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव और मध्यप्रदेश निवासी 26 वर्षीय ऋषभ की मौत हो गई। दोनों धुएं और आग की चपेट में आ गए और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इसके अलावा छह अन्य लोग धुएं के कारण प्रभावित हुए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश लोगों को छुट्टी दे दी गई।
सिर्फ जान ही नहीं, सपने भी जलकर राख
इस हादसे में केवल दो लोगों की जान नहीं गई, बल्कि कई युवाओं का भविष्य भी प्रभावित हुआ। कमरों में रखे लैपटॉप, मोबाइल फोन, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, आधार कार्ड, बैंक दस्तावेज, नकदी, कपड़े और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह जल गए।
ग्राउंड फ्लोर पर खड़े 18 से अधिक दोपहिया वाहन भी आग की भेंट चढ़ गए। नौकरीपेशा युवाओं और छात्रों के सामने अब अपने दस्तावेज दोबारा बनवाने और सामान्य जीवन शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
फायर सेफ्टी पर उठे बड़े सवाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। पुलिस और अग्निशमन विभाग यह जांच कर रहे हैं कि भवन में फायर एनओसी, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बहुमंजिला पीजी और हॉस्टल में फायर सेफ्टी सिस्टम, आपातकालीन निकासी मार्ग और नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होने चाहिए। यदि आग ग्राउंड फ्लोर पर लगे और सीढ़ियां धुएं से भर जाएं, तो ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
पीजी संचालक गिरफ्तार
घटना के बाद पुलिस ने भवन मालिक और पीजी संचालक कृष्णा कुमार, निवासी दिल्ली, को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि भवन में रहने वालों की संख्या स्वीकृत क्षमता से अधिक तो नहीं थी और क्या इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए सुरक्षित व्यवस्था की गई थी।

बुधवार को ही सेक्टर-63 क्षेत्र के छिजारसी में 11,000 केवी हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गिर गया। इस घटना में पांच लोग घायल हो गए और एक स्कूटी में आग लग गई। घायलों में 15 वर्षीय निधि, 17 वर्षीय प्रिया, 38 वर्षीय मुकेश राम, 41 वर्षीय पवित्र और रवि चौधरी शामिल हैं। इनमें रवि चौधरी की हालत गंभीर बताई जा रही है।
क्या अब बदलेगी व्यवस्था?
नोएडा का यह अग्निकांड केवल एक इमारत की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे एनसीआर में तेजी से बढ़ रहे पीजी और किराये के बहुमंजिला भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फायर ऑडिट, सुरक्षित इलेक्ट्रिक चार्जिंग व्यवस्था, आपातकालीन निकास और सख्त निगरानी के बिना ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी नहीं जा सकती।
दो लोगों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह हादसा प्रशासन और भवन संचालकों के लिए सबक बनेगा या फिर किसी अगले बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी।
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