नोएडा के सेक्टर-63 में पुलिस ने एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। आरोप है कि यह गिरोह देशभर के व्यापारियों और उद्यमियों को ऑनलाइन मार्केटिंग, खरीदार उपलब्ध कराने और फर्जी सर्टिफिकेट के नाम पर झांसा देकर ठगी करता था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 39 मोबाइल फोन, 10 लैपटॉप, 36 सीपीयू, 32 सिम कार्ड समेत कई दस्तावेज बरामद किए हैं।
डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन मार्केटिंग और इंटरनेट आधारित व्यापार ने कारोबार को नई दिशा दी है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने के नए-नए तरीके खोज लिए हैं। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट की थाना सेक्टर-63 पुलिस ने ऐसे ही एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है, जो देशभर के व्यापारियों और उद्यमियों को ऑनलाइन मार्केटिंग, नए खरीदार उपलब्ध कराने और विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र दिलाने का झांसा देकर कथित रूप से ठगी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में कंपनी संचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई एक पीड़ित की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच के दौरान की गई। जांच में मिले सुरागों के आधार पर सेक्टर-63 स्थित एक कार्यालय पर छापा मारा गया, जहां से कथित साइबर ठगी से जुड़ा पूरा नेटवर्क संचालित होता मिला। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह संगठित तरीके से विभिन्न राज्यों के व्यापारियों से संपर्क करता था और उन्हें आकर्षक व्यावसायिक प्रस्ताव देकर धनराशि वसूलता था।
शिकायत से खुला बड़ा नेटवर्क
थाना सेक्टर-63 पुलिस को एक व्यापारी द्वारा शिकायत दी गई थी कि उसे ऑनलाइन मार्केटिंग और खरीदार उपलब्ध कराने के नाम पर गुमराह किया गया। शिकायत की जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले, जिनसे यह संकेत मिला कि यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि संगठित स्तर पर संचालित नेटवर्क है।
इसके बाद पुलिस ने सेक्टर-63 के ए-135 स्थित कार्यालय पर कार्रवाई की, जहां से कथित फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए।
देशभर के व्यापारियों को बनाया जाता था निशाना
प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह विभिन्न राज्यों के व्यापारियों, उद्योगपतियों और छोटे कारोबारियों का डेटा एकत्र करता था। इसके बाद कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को ऑनलाइन बिजनेस प्रमोशन कंपनी का प्रतिनिधि बताकर उनसे संपर्क करते थे।
व्यापारियों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी कंपनी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिलेगा, नए खरीदार मिलेंगे, डिजिटल मार्केटिंग की जाएगी और व्यवसाय को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा कई मामलों में कथित तौर पर विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया जाता था।
इन सेवाओं के बदले व्यापारियों से अलग-अलग मदों में शुल्क लिया जाता था। पुलिस का आरोप है कि भुगतान के बाद वादे के अनुरूप सेवाएं नहीं दी जाती थीं।
तीन आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कथित कंपनी संचालक रणबीर सिंह (48 वर्ष) निवासी इंदिरापुरम, गाजियाबाद, ललित कुमार (25 वर्ष) निवासी बरौला, नोएडा और ज्योति (33 वर्ष) निवासी इंदिरापुरम शामिल हैं।
पुलिस अब इन तीनों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा इसका संचालन कब से किया जा रहा था।
भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण मिले, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से कॉलिंग और साइबर गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
बरामद सामग्री में शामिल हैं—
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39 स्मार्ट मोबाइल फोन
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9 कीपैड मोबाइल फोन
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10 लैपटॉप
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36 सीपीयू
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32 सक्रिय सिम कार्ड
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विभिन्न टैक्स इनवॉइस
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कई व्यावसायिक दस्तावेज और रिकॉर्ड
पुलिस का कहना है कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। इससे यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन लोगों से संपर्क किया गया और कितनी आर्थिक धोखाधड़ी हुई।
डिजिटल जांच होगी अहम
साइबर अपराध के मामलों में डिजिटल साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। पुलिस अब बरामद लैपटॉप, मोबाइल फोन, सीपीयू और सिम कार्ड की तकनीकी जांच करेगी।
जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि—
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कितने राज्यों के व्यापारी इस नेटवर्क के संपर्क में आए।
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कितने लोगों से धनराशि ली गई।
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भुगतान किन बैंक खातों में कराया गया।
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कॉल सेंटर का डेटा कहां से जुटाया गया।
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क्या किसी अन्य राज्य में भी ऐसे कार्यालय संचालित किए जा रहे थे।
यदि जांच में बड़े नेटवर्क के संकेत मिलते हैं तो अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी समन्वय किया जा सकता है।

व्यापारियों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल साइबर ठग केवल बैंकिंग फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं। अब वे ऑनलाइन मार्केटिंग, डिजिटल ब्रांडिंग, बी2बी पोर्टल, एक्सपोर्ट प्रमोशन, बिजनेस लिस्टिंग और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने जैसे नामों का इस्तेमाल कर व्यापारियों को निशाना बना रहे हैं।
ऐसे मामलों में व्यापारी अक्सर जल्दी कारोबार बढ़ाने की उम्मीद में बिना पर्याप्त जांच के भुगतान कर देते हैं, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
साइबर विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी को भुगतान करने से पहले उसका पंजीकरण, जीएसटी नंबर, कार्यालय का पता और पिछले ग्राहकों की समीक्षा अवश्य जांच लें। केवल फोन कॉल या व्हाट्सएप संदेश के आधार पर किसी भी प्रकार का भुगतान न करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय साइबर पुलिस से संपर्क करें।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने इस मामले में थाना सेक्टर-63 में मु0अ0सं0 303/2026 दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित साइबर नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था। बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच पूरी होने के बाद मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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