नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर परीचौक के पास बनाए गए नए यू-टर्न को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। बैरिकेड हटने के बाद यहां वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है, लेकिन यू-टर्न पर यातायात व्यवस्था अभी पूरी तरह व्यवस्थित नजर नहीं आ रही। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दोपहिया वाहन चालक रॉन्ग साइड से निकल रहे हैं। ऐसे में सामने से आने वाले वाहनों से टक्कर का खतरा बना हुआ है। जाम कम करने के उद्देश्य से बनाया गया यह यू-टर्न अगर सही ट्रैफिक प्रबंधन के बिना चलता रहा तो राहत के बजाय दुर्घटना की वजह बन सकता है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर परीचौक के पास यातायात को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया नया यू-टर्न अब सवालों के घेरे में है। जिस यू-टर्न से उम्मीद थी कि परीचौक के आसपास वाहनों का दबाव कम होगा और ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा, वहीं अब इसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता सामने आने लगी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यू-टर्न शुरू करने से पहले यहां यातायात को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं? क्योंकि बैरिकेड हटने के बाद वाहनों की आवाजाही तो शुरू हो गई, लेकिन हर वाहन चालक निर्धारित दिशा और लेन का पालन करता दिखाई नहीं दे रहा।
बैरिकेड हटते ही बढ़ी वाहनों की आवाजाही
नए यू-टर्न को तैयार करने के दौरान यहां बैरिकेड लगाए गए थे। इन बैरिकेड के कारण वाहनों की आवाजाही नियंत्रित थी और यू-टर्न का इस्तेमाल सीमित तरीके से किया जा रहा था।
लेकिन जैसे ही बैरिकेड हटाए गए, वाहन चालकों ने इस रास्ते का इस्तेमाल शुरू कर दिया। अब यहां लगातार वाहनों की आवाजाही हो रही है।
यही बढ़ती आवाजाही अब यू-टर्न की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है। एक्सप्रेसवे से जुड़े इस मार्ग पर वाहनों की गति सामान्य शहर की सड़कों की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे में यदि किसी वाहन चालक ने अचानक गलत दिशा पकड़ ली तो सामने से आ रहे वाहन को संभलने का पर्याप्त समय मिलना मुश्किल हो सकता है।
रॉन्ग साइड से निकल रहे दोपहिया वाहन
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चिंता रॉन्ग साइड से निकलने वाले दोपहिया वाहन चालकों को लेकर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दोपहिया वाहन चालक यू-टर्न के दौरान निर्धारित दिशा का पालन करने के बजाय गलत दिशा से निकल रहे हैं। देखने में यह भले ही छोटी गलती लगे, लेकिन एक्सप्रेसवे से जुड़े मार्ग पर यही गलती जानलेवा साबित हो सकती है।
एक तरफ से तेज गति में वाहन आ रहा हो और दूसरी तरफ से अचानक रॉन्ग साइड से बाइक या स्कूटर सामने आ जाए, तो दोनों के बीच आमने-सामने की टक्कर की आशंका पैदा हो जाती है।
ऐसे हादसे में सिर्फ गलती करने वाले चालक की जान खतरे में नहीं पड़ती, बल्कि सही दिशा में चल रहे दूसरे वाहन चालक और उसमें सवार लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
छोटी लापरवाही बन सकती है बड़े हादसे की वजह
यू-टर्न का इस्तेमाल करते समय अचानक लेन बदलना, तेज गति से निकलना या गलत दिशा में वाहन ले जाना दुर्घटना का कारण बन सकता है।
खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है। बाइक या स्कूटर की तुलना में बड़े वाहन को अचानक सामने आए दोपहिया वाहन से बचने के लिए ब्रेक लगाने या दिशा बदलने में ज्यादा समय लग सकता है।
ऐसे में सवाल सिर्फ वाहन चालकों की लापरवाही का नहीं है। ट्रैफिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि गलत दिशा में जाना मुश्किल हो जाए।
इसके लिए यू-टर्न के आसपास स्पष्ट संकेतक, पर्याप्त बैरिकेडिंग, लेन मार्किंग और दिशा बताने वाले बोर्ड जरूरी हैं। साथ ही मौके पर ट्रैफिक पुलिस की निगरानी भी जरूरी हो सकती है, खासकर उस समय जब नई व्यवस्था के कारण वाहन चालकों को इसकी आदत नहीं हुई है।
जाम कम करने के लिए बनाया गया है नया यू-टर्न
परीचौक ग्रेटर नोएडा का प्रमुख ट्रैफिक जंक्शन है। यहां से नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के अलावा कई महत्वपूर्ण मार्ग जुड़े हुए हैं। इस वजह से दिन के अलग-अलग समय में यहां वाहनों का दबाव देखने को मिलता है।
नए यू-टर्न का उद्देश्य इसी दबाव को कम करना और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करना है। अगर व्यवस्था सही तरीके से संचालित होती है तो इससे परीचौक के आसपास जाम कम करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें और रॉन्ग साइड से निकलते वाहन इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती
अब प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ ट्रैफिक का दबाव कम करने की नहीं है। उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नया यू-टर्न सुरक्षित तरीके से संचालित हो।
अगर रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई और लेन व्यवस्था स्पष्ट नहीं की गई, तो जिस यू-टर्न को जाम से राहत देने के लिए बनाया गया है, वही किसी दिन गंभीर दुर्घटना की वजह बन सकता है।
वाहन चालकों से भी अपील है कि यू-टर्न लेते समय निर्धारित दिशा और लेन का ही इस्तेमाल करें। तेज गति से वाहन चलाने, अचानक कट मारने और रॉन्ग साइड जाने से बचें।
क्योंकि सड़क पर कई बार हादसा बड़ी गलती से नहीं, बल्कि कुछ सेकंड की छोटी लापरवाही से होता है। परीचौक के इस नए यू-टर्न पर भी अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन हादसा होने से पहले सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करेगा, या फिर किसी दुर्घटना के बाद ही व्यवस्था जागेगी?
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