नोएडा में श्रमिकों के हंगामे के पीछे बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में पाकिस्तान से संचालित फर्जी सोशल मीडिया हैंडल द्वारा अफवाह फैलाने का मामला सामने आया है, जिससे शहर में हिंसा भड़की।
नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिकों के हंगामे को लेकर पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई अफवाहों और अंतरराष्ट्रीय साजिश की भूमिका सामने आई है।
पुलिस कमिश्नर Lakshmi Singh के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर दो फर्जी हैंडल पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे, जिन्होंने दंगे के दिन भ्रामक और झूठी जानकारी फैलाकर माहौल को भड़काने का काम किया।
फर्जी हैंडल से फैलाई गई झूठी खबरें
जांच में सामने आया है कि “PROUDINDIANNAVI” और “MIRILYAS” नाम के दो सोशल मीडिया हैंडल से यह अफवाह फैलाई गई कि हिंसा में 14 लोगों की मौत हो गई है और 32 लोग घायल हैं।
हालांकि, ये आंकड़े पूरी तरह झूठे थे। लेकिन इन भ्रामक पोस्ट्स ने लोगों में डर और गुस्सा पैदा कर दिया, जिससे शहर के कई इलाकों में तनाव फैल गया और हिंसा भड़क उठी।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भीड़ जुटाने का आरोप
पुलिस ने इस मामले में स्थानीय स्तर पर भी कार्रवाई की है।
रुपेश रॉय और मनीषा चौहान समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए लोगों को उकसाया और भीड़ जुटाने में भूमिका निभाई।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन स्थानीय आरोपियों का संबंध उन फर्जी सोशल मीडिया हैंडल्स से था या नहीं।

अब तक 13 FIR, 62 गिरफ्तार
पुलिस ने इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 13 FIR दर्ज की हैं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
हालात काबू में, शांति बहाल
घटना के बाद प्रशासन ने तेजी से कदम उठाए, जिससे अब नोएडा में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।
पूरे शहर में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी जारी है।
प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब सामान्य है और शांति व्यवस्था पूरी तरह बहाल कर दी गई है।

सोशल मीडिया की भूमिका पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और फर्जी खबरों के खतरे को उजागर कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल न केवल समाज में भ्रम फैलाता है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
नोएडा की यह घटना केवल एक स्थानीय हंगामा नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे फर्जी खबरें और बाहरी तत्व मिलकर माहौल को बिगाड़ सकते हैं।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से हालात तो काबू में आ गए हैं, लेकिन यह मामला भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि अफवाहों से सतर्क रहना और सही जानकारी पर भरोसा करना कितना जरूरी है।
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