नोएडा सेक्टर 82 में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन भगवान राम की बाल लीलाओं, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा और अहिल्या उद्धार का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
नोएडा के सेक्टर 82 स्थित ईडब्ल्यूएस पॉकेट 7 में आयोजित श्रीराम कथा का चौथा दिन भक्तिभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। इस अवसर पर कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा और अहिल्या उद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई—
“प्रातकाल उठि के रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।“
के साथ हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
स्वामी पंचमानंद महाराज ने भगवान श्रीराम के बाल्यकाल का ऐसा सजीव वर्णन किया कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने बताया कि भगवान राम बचपन से ही आदर्श पुत्र, शिष्य और मर्यादा के प्रतीक थे। उनके जीवन की हर लीला मानव जीवन को अनुशासन, संस्कार और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ का प्रसंग विस्तार से सुनाया गया। स्वामी जी ने बताया कि जब विश्वामित्र वन में यज्ञ कर रहे थे, तब राक्षस बार-बार आकर उसमें विघ्न डालते थे। यज्ञ की पूर्णाहुति असंभव हो रही थी।ध्यान के माध्यम से विश्वामित्र को ज्ञात हुआ कि अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं और वही इन राक्षसों का संहार कर सकते हैं।
इसके बाद विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा के लिए अपने साथ ले जाने का आग्रह किया। प्रारंभ में दशरथ ने संकोच जताया, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर उन्होंने राम और लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेज दिया।यह प्रसंग त्याग, विश्वास और धर्म के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

वन में प्रवेश करते ही भगवान श्रीराम ने ताड़का नामक भयंकर राक्षसी का वध किया। यह प्रसंग धर्म और अधर्म के संघर्ष को दर्शाता है, जिसमें अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण ने अन्य राक्षसों का भी संहार किया और विश्वामित्र के यज्ञ को सफलतापूर्वक पूर्ण कराया।
कथा के दौरान अहिल्या उद्धार का प्रसंग अत्यंत भावुक रहा। स्वामी जी ने बताया कि गौतम ऋषि के श्राप के कारण अहिल्या पाषाण शिला बन गई थीं।जब भगवान श्रीराम वहां पहुंचे, तो उनके चरण स्पर्श से अहिल्या का उद्धार हुआ और वह पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में आ गईं। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को करुणा, क्षमा और मोक्ष के महत्व का संदेश दिया।
इन सभी लीलाओं के पश्चात भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, महर्षि विश्वामित्र के साथ जनकपुर की ओर प्रस्थान करते हैं, जहां आगे चलकर सीता स्वयंवर और धनुष यज्ञ जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग घटित होते हैं।
श्रीराम कथा आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी देव मणि शुक्ल ने बताया कि 2 अप्रैल को कथा के अगले चरण में धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और राम-जानकी विवाह जैसे प्रमुख प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
इस धार्मिक आयोजन में स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। कार्यक्रम में देवमणि शुक्ल, रवि राघव, गोरे लाल, संजय पांडेय, अंगद सिंह तोमर, हरि सिंह, बृजेंद्र सिंह, रमेश चंद शर्मा, विश्वनाथ त्रिपाठी, रमेश वर्मा, नीरज शर्मा, गौरव, हंस मणि शुक्ल, विकास शर्मा, रविंद्र कुमार, अरुण गौर, आशीष कुड्डू, विनोद मुद्गल, विकास कुमार, राकेश कुमार, संगम प्रसाद मिश्र, अनिल कुमार शर्मा, देव नारायण तिवारी, बलराम कर्ण, विजय कुमार झा, वीरेंद्र कुमार राय, रंजन गिरि, धर्मेंद्र सिंह, प्रमोद दीक्षित, धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, अवनीश कुमार शर्मा, ललित शर्मा, उपेंद्र सिंह, राजेश सिंह, बृजेश चंद्र पांडेय सहित बड़ी संख्या में सेक्टरवासी उपस्थित रहे।
नोएडा में आयोजित श्रीराम कथा का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह लोगों को संस्कार, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी दे रहा है। भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं और उनके आदर्श जीवन का वर्णन आज के समाज के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना प्राचीन काल में था।
COMMENTS