दिल्ली-NCR की पार्किंग समस्या अब सिर्फ पार्किंग की कमी तक सीमित नहीं रह गई है। नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों में जमीनी पड़ताल के दौरान कहीं अधिकृत पार्किंग में जरूरी जानकारियां अधूरी मिलीं, तो कहीं सड़क का बड़ा हिस्सा वाहनों की पार्किंग में इस्तेमाल होता दिखाई दिया। सेक्टर-98 में ‘नो पार्किंग’ बोर्ड के नीचे गाड़ियां खड़ी मिलीं, जबकि सेक्टर-104 में साइकिल स्टैंड के सामने कारें पार्क मिलीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नियम होने के बावजूद उनका पालन कौन और कैसे सुनिश्चित कर रहा है।
दिल्ली-NCR में गाड़ी लेकर निकलने वाले लोगों के लिए पार्किंग की तलाश अक्सर सफर का सबसे मुश्किल हिस्सा बन जाती है। बाजार हो, कॉमर्शियल इलाका हो, रेस्टोरेंट हो या कोई बड़ा संस्थान—गाड़ी पहुंचते ही सबसे पहले पार्किंग की चिंता शुरू हो जाती है। कई जगह पार्किंग पूरी तरह अधिकृत और निर्धारित व्यवस्था के तहत संचालित होती है, लेकिन कई स्थानों पर पार्किंग के नाम पर मनमानी और अनधिकृत वसूली की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
इसी समस्या को लेकर अवैध पार्किंग के खिलाफ अभियान की चर्चा तेज हुई है। लालकिले के सामने सड़क पर चल रहे कथित पार्किंग माफिया के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब नजर नोएडा की पार्किंग व्यवस्था पर है। ‘पार्किंग माफिया सीरीज-2’ में नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों की जमीनी तस्वीर कई सवाल खड़े करती है।
नोएडा एक योजनाबद्ध शहर है। यहां पार्किंग व्यवस्था के लिए नियम बनाए गए हैं और अधिकृत पार्किंग के संचालन की व्यवस्था भी की गई है। इसके बावजूद अलग-अलग इलाकों में सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि नियम और जमीन पर उनकी स्थिति के बीच अंतर दिखाई देता है।

सबसे पहले बात नोएडा के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र सेक्टर-18 की।
यहां अधिकृत पार्किंग के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर सूचना बोर्ड लगा दिखाई देता है। नियमों के मुताबिक इस बोर्ड पर पार्किंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। इसमें पार्किंग का निर्धारित क्षेत्रफल, पार्किंग संचालन का टेंडर पाने वाली कंपनी का नाम और शिकायत या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जैसी जानकारियां शामिल होनी चाहिए।
लेकिन जमीनी पड़ताल में बोर्ड पर कई जरूरी जानकारियां स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं दिखीं।
पार्किंग का क्षेत्रफल दर्ज नहीं था। पार्किंग संचालित करने वाली कंपनी का नाम भी स्पष्ट नहीं दिखाई दिया। सबसे अहम बात यह रही कि बोर्ड पर हेल्पलाइन नंबर का उल्लेख तो था, लेकिन वास्तविक नंबर मौजूद नहीं था।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी वाहन चालक को पार्किंग से जुड़ी शिकायत करनी हो तो वह किससे संपर्क करेगा?
पार्किंग में मौजूद कर्मचारी से संचालन करने वाली कंपनी का नाम पूछे जाने पर भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इससे पार्किंग संचालन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

सेक्टर-18 से आगे बढ़ने पर सेक्टर-63 के डी ब्लॉक में स्थिति अलग नजर आई।
यहां निर्धारित पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के बावजूद सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े दिखाई दिए। अलग-अलग कंपनियों और दफ्तरों के बाहर वाहनों की कतार लगी नजर आई।
कई स्थानों पर स्थिति ऐसी दिखाई दी कि सड़क का करीब आधा हिस्सा वाहनों से घिरा हुआ था।
जिस सड़क का उद्देश्य वाहनों की आवाजाही को सुचारु रखना है, अगर उसका बड़ा हिस्सा पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल होने लगे तो यातायात प्रभावित होना स्वाभाविक है। खासकर कार्यालय खुलने और छुट्टी के समय वाहनों का दबाव बढ़ने पर ऐसी स्थिति जाम की समस्या को और गंभीर कर सकती है।
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि किसी क्षेत्र में पर्याप्त अधिकृत पार्किंग उपलब्ध नहीं है, तो वहां आने वाले कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या है?

पार्किंग नियमों की अनदेखी की एक और तस्वीर सेक्टर-98 में दिखाई दी।
सड़क किनारे स्पष्ट रूप से ‘नो पार्किंग’ का बोर्ड लगा हुआ है। यानी वाहन चालकों को साफ निर्देश दिया गया है कि इस जगह वाहन खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
लेकिन जमीनी स्थिति इसके उलट नजर आई।
उसी बोर्ड के नीचे और आसपास कई वाहन खड़े दिखाई दिए।
यह तस्वीर सिर्फ वाहन चालकों की लापरवाही का सवाल नहीं उठाती, बल्कि निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करती है। यदि किसी इलाके में नो-पार्किंग क्षेत्र में लगातार वाहन खड़े होते रहें तो नियम लागू कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
सिर्फ बोर्ड लगा देना पर्याप्त नहीं है। उसके साथ प्रभावी निगरानी और कार्रवाई भी जरूरी है।

सेक्टर-104 में पार्किंग व्यवस्था की तस्वीर एक अलग समस्या की तरफ इशारा करती है।
यहां साइकिल स्टैंड के सामने ही कारें खड़ी दिखाई दीं। इसके अलावा सड़क पर लगे ‘नो पार्किंग’ बोर्ड के सामने भी वाहनों की कतार नजर आई।
इस तरह की पार्किंग से केवल सड़क की जगह कम नहीं होती, बल्कि उन सुविधाओं तक पहुंच भी प्रभावित होती है जिन्हें लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया है।
अगर साइकिल स्टैंड के सामने वाहन खड़े होंगे तो साइकिल इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी होगी। इसी तरह नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़े रहने से सड़क पर उपलब्ध जगह घटेगी और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सेक्टर-18 में अधिकृत पार्किंग के बावजूद सूचना व्यवस्था अधूरी दिखाई दी।
सेक्टर-63 में सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े मिले।
सेक्टर-98 में ‘नो पार्किंग’ बोर्ड के नीचे ही गाड़ियां दिखाई दीं।

और सेक्टर-104 में साइकिल स्टैंड तथा नो-पार्किंग क्षेत्र के आसपास वाहन खड़े मिले।
इन सभी तस्वीरों का स्वरूप अलग है, लेकिन सवाल एक ही है—क्या नोएडा में पार्किंग नियमों की निगरानी प्रभावी तरीके से हो रही है?
पार्किंग की समस्या को केवल पार्किंग स्पेस की कमी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।
एक प्रभावी पार्किंग व्यवस्था के लिए अधिकृत स्थान, स्पष्ट सूचना, निर्धारित शुल्क, जिम्मेदार एजेंसी, शिकायत तंत्र और नियमित निगरानी सभी जरूरी हैं।
यदि सड़क पर वाहन खड़े होते हैं तो उसका असर सिर्फ वाहन चालक पर नहीं पड़ता। पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, सार्वजनिक परिवहन, ऑटो-ई-रिक्शा और अन्य वाहन चालकों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
सड़क की चौड़ाई कम होने से यातायात धीमा हो सकता है और व्यस्त समय में जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।

अब सवाल नोएडा अथॉरिटी से है।
क्या कार्रवाई तब होगी जब सड़कें पूरी तरह पार्किंग में बदल जाएंगी?
क्या तब कार्रवाई होगी जब ‘नो पार्किंग’ का बोर्ड भी बेअसर साबित हो जाएगा?
या फिर उससे पहले ही ऐसे इलाकों की पहचान करके व्यवस्था सुधारी जाएगी?
जरूरत केवल नई पार्किंग बनाने की नहीं है। जरूरत मौजूदा पार्किंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की भी है। अधिकृत पार्किंग में जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग पर नियमित कार्रवाई होनी चाहिए और नो-पार्किंग क्षेत्रों की निगरानी मजबूत करनी होगी।
क्योंकि अगर आज सड़क का एक हिस्सा पार्किंग बना है तो कल वही हिस्सा पूरी तरह वाहनों से भर सकता है।
और उस दिन समस्या सिर्फ पार्किंग की नहीं होगी—शहर की आवाजाही की होगी।
नोएडा की पहचान उसकी चौड़ी और नियोजित सड़कों से है। लेकिन इन सड़कों का उद्देश्य गाड़ियों को खड़ा करना नहीं, बल्कि लोगों और यातायात को सुरक्षित और सुचारु तरीके से आगे बढ़ाना है।
अब देखना यही है कि पार्किंग माफिया सीरीज-2 में सामने आई इन तस्वीरों पर जिम्मेदार एजेंसियां कब संज्ञान लेती हैं और कब नोएडा की सड़कों को बेतरतीब पार्किंग से राहत मिलती है।
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