नोएडा के थाना सेक्टर-58 क्षेत्र में 26 अगस्त को पार्क में लावारिस हालत में घूमती 3 साल की मासूम बच्ची को देख हड़कंप मच गया। बच्ची इतनी छोटी थी कि अपना नाम और पता भी नहीं बता पा रही थी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची 112 पीआरवी पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पूरे इलाके को खंगाला। बिशनपुरा और खोड़ा सीमा तक लाउडस्पीकर से मुनादी करवाकर पुलिस ने 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची की मां को ढूंढ निकाला और मासूम को सुरक्षित सौंप दिया।
, नोएडा के थाना सेक्टर-58 क्षेत्र स्थित एक पार्क में रोजमर्रा की तरह शांति थी। इसी दौरान पार्क में मौजूद एक स्थानीय नागरिक की नजर 3 साल की एक मासूम बच्ची पर पड़ी। बच्ची अकेली इधर-उधर भटक रही थी और उसकी आंखों में डर और बेबसी की झलक थी।
जब राहगीर ने पास जाकर बच्ची से बात करने की कोशिश की, तो उम्र काफी छोटी होने के कारण वह केवल अपनी तोतली भाषा में रो रही थी। वह न तो अपना नाम ठीक से बता पा रही थी और न ही अपने घर का पता। अनहोनी की आशंका को देखते हुए नागरिक ने बिना समय गंवाए तुरंत डायल-112 (पीआरवी कंट्रोल रूम) को फोन मिलाया और पार्क में लावारिस बच्ची के मिलने की सूचना दी।
सूचना मिलते ही हरकत में आई PRV: ग्राउंड पर उतरी पुलिस
कंट्रोल रूम से मैसेज प्रसारित होते ही सेक्टर-58 क्षेत्र में गश्त कर रही पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) की टीम बिना देर किए मौके पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने सबसे पहले घबराई हुई मासूम को दुलारा, उसे पानी पिलाया और अपनी संरक्षा में लिया।
बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी उसके परिजनों की पहचान करना। चूंकि सेक्टर-58 पार्क के आसपास कई घनी आबादी वाले ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाके लगते हैं, इसलिए पुलिस टीम ने तुरंत सर्च ऑपरेशन की रणनीति बनाई।
180 मिनट का सस्पेंस: बिशनपुरा से खोड़ा तक गूंजी पीए सिस्टम की आवाज
मासूम को साथ लेकर पीआरवी जवान आसपास के संकरे रास्तों और बस्तियों की ओर निकले। पुलिसकर्मियों ने पारंपरिक पूछताछ के साथ-साथ पुलिस गाड़ी पर लगे पीए (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम का सहारा लिया।
लाउडस्पीकर से मुनादी: ग्राम बिशनपुरा और सीमा से सटे खोड़ा क्षेत्र की हर गली और चौक-चौराहे पर पीए सिस्टम से बच्ची के हुलिए और मिलने की जानकारी लगातार प्रसारित की जाने लगी।
घर-घर जाकर पूछताछ: पुलिस की टीम ने स्थानीय दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और घर के बाहर बैठे बुजुर्गों को बच्ची की तस्वीर दिखाकर पूछताछ शुरू की।
सघन तलाश: जैसे-जैसे समय बीत रहा था, पुलिसकर्मियों की धड़कनें भी बढ़ रही थीं। 3 घंटे तक लगातार एक-एक गली को खंगालने का सिलसिला जारी रहा।
मां की गोद में लौट आई खुशियां: परिजनों की आंखें हुईं नम
लगभग 3 घंटे के अथक प्रयास और लगातार की जा रही मुनादी के बाद खोड़ा-बिशनपुरा सीमा के पास एक महिला रोती-बिलखती हुई दौड़ती आई। महिला अपनी 3 साल की बेटी को गायब पाकर पागलों की तरह ढूंढ रही थी। जैसे ही उसकी नजर पीआरवी गाड़ी में सकुशल बैठी अपनी बच्ची पर पड़ी, उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
पुलिसकर्मियों ने कागजी प्रक्रिया और पहचान का सत्यापन करने के बाद मासूम को पूरी सुरक्षा के साथ उसकी मां की सुपुर्दगी में दे दिया। अपनी बच्ची को सीने से लगाते ही मां का रो-रोकर बुरा हाल था, लेकिन यह आंसू खुशी और राहत के थे।
परिजनों और क्षेत्रवासियों ने की गौतमबुद्धनगर पुलिस की तारीफ
अपनी कलेजे के टुकड़े को सही-सलामत वापस पाकर बच्ची के परिजनों ने गौतमबुद्धनगर पुलिस और डायल-112 की पीआरवी टीम का बार-बार आभार जताया। परिजनों ने कहा कि पुलिस की मुस्तैदी और मानवीय संवेदना के कारण ही आज उनकी बच्ची किसी बड़े हादसे का शिकार होने से बच गई।
स्थानीय लोगों ने भी 3 घंटे के भीतर पीए सिस्टम के जरिए मुनादी कराकर बच्ची को ढूंढ निकालने वाली पीआरवी टीम की जमकर सराहना की। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खाकी केवल कानून-व्यवस्था संभालने का काम नहीं करती, बल्कि मुसीबत के वक्त अपनों की तरह रक्षा भी करती है।
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