ग्रेटर नोएडा वेस्ट में थाना बिसरख पुलिस ने साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने के आरोप में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों की 29 पासबुक, 23 चेकबुक, 14 आधार कार्ड, 8 पैन कार्ड, 2 डेबिट कार्ड, 8 सिम कवर और 3 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, इन खातों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग राज्यों में इन्वेस्टमेंट, ब्लैकमेलिंग और सोशल मीडिया विज्ञापन के नाम पर ठगी करने के लिए किया जाता था।
साइबर ठगी के मामलों में अक्सर ठगों तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं, जबकि अपराधी फर्जी पहचान और दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर जांच से बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस बार गौतमबुद्धनगर की बिसरख पुलिस ने ऐसे ही एक कथित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर सिटी-2 इलाके में हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में बैंकिंग और पहचान संबंधी दस्तावेज मिले। बरामदगी में 29 बैंक पासबुक और 23 चेकबुक शामिल हैं। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड, डेबिट कार्ड, सिम कवर और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी कथित तौर पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल देश के विभिन्न राज्यों में लोगों से ठगी करने के लिए किया जाता था। इस काम के बदले आरोपियों को 20 प्रतिशत कमीशन मिलने की बात सामने आई है।
गौर सिटी-2 के पास पुलिस की कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार
थाना बिसरख पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की सहायता से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गौर सिटी-2 स्थित भविष्य इंडिया टावर के पास से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रेम, कुनाल और आतिश के रूप में हुई है। पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, तीनों आरोपी उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी क्षेत्र के निवासी हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई में मिली बरामदगी ने मामले को गंभीर बना दिया है। अलग-अलग बैंकों की दर्जनों पासबुक और चेकबुक के साथ कई पहचान पत्रों का मिलना इस बात की जांच को महत्वपूर्ण बनाता है कि इन दस्तावेजों और बैंक खातों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा था।
हालांकि, बरामद दस्तावेजों से जुड़े सभी खातों, उनके वास्तविक खाताधारकों और उनसे हुए वित्तीय लेनदेन का पूरा विवरण अभी उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। इन पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
कैसे काम करता था कथित साइबर ठगी का नेटवर्क?
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बैंक खाते खुलवाने के लिए अपने और अन्य लोगों के आधार कार्ड तथा पैन कार्ड में धोखाधड़ी करके पते बदलवाते थे। कुछ मामलों में अधूरे पते दर्ज कराकर बैंक खाते खुलवाने की बात भी पुलिस ने बताई है।
इन खातों को कथित तौर पर साइबर ठगी करने वाले दूसरे अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था। इस तरह, ऑनलाइन ठगी करने वाले अपराधियों को ऐसे बैंक खाते मिल जाते थे, जिनका इस्तेमाल ठगी से जुड़ी रकम प्राप्त करने के लिए किया जा सकता था।

पुलिस के अनुसार, इस काम के बदले गिरफ्तार आरोपियों को ठगी की रकम का 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
इस कथित व्यवस्था में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों और ऑनलाइन ठगी करने वाले अपराधियों की भूमिकाएं अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे मामलों में खातों के वास्तविक उपयोग, पैसों के लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क की जांच महत्वपूर्ण होती है।
इन तीन तरीकों से लोगों को बनाया जाता था निशाना
पुलिस ने बताया कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी अलग-अलग तरह की ठगी में करते थे। इनमें मुख्य रूप से तीन तरीके शामिल बताए गए हैं।
1. इन्वेस्टमेंट फ्रॉड
निवेश के नाम पर लोगों को अधिक मुनाफे का लालच दिया जाता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया या दूसरे माध्यमों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसके बाद रकम ऐसे बैंक खातों में जमा कराई जाती है, जिनका संबंध कथित तौर पर ठगी के नेटवर्क से होता है।
2. ब्लैकमेलिंग के जरिए ठगी
पुलिस के अनुसार, बरामद बैंक खातों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग से जुड़े साइबर अपराधों में भी किया जाता था। ऐसे मामलों में पीड़ितों को डराकर या दबाव बनाकर पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आती हैं।
3. सोशल मीडिया विज्ञापन फ्रॉड
सोशल मीडिया पर विज्ञापन, ऑफर या अन्य ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा सकता है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े कथित नेटवर्क के बैंक खातों का इस्तेमाल इस तरह की धोखाधड़ी में भी किया जाता था।
इन मामलों में किस पीड़ित से कितनी रकम की ठगी हुई और कौन-सा बैंक खाता किस घटना से जुड़ा था, इसका विस्तृत विवरण पुलिस की उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
NCRP पोर्टल पर दर्ज हैं ठगी की शिकायतें
पुलिस के मुताबिक, इस तरीके से साइबर ठगी का शिकार हुए दर्जनों लोगों की शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP पर अलग-अलग राज्यों में दर्ज हैं।
यह तथ्य मामले को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखता। अलग-अलग राज्यों में दर्ज शिकायतों के कारण जांच में बैंक खातों के लेनदेन, शिकायतों के आपसी संबंध और संभावित पीड़ितों की पहचान जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हालांकि, पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी में शिकायतों की सटीक संख्या, राज्यों के नाम, ठगी की कुल रकम और बरामद बैंक खातों से जुड़े मामलों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए इन आंकड़ों को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना अभी उचित नहीं होगा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
बिसरख पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार, गिरफ्तार तीनों आरोपियों का परिचय इस प्रकार है:
1. प्रेम पुत्र भोला शंकर
निवासी: मोहल्ला कौलियान, थाना कोतवाली सासनी, जिला हाथरस।
उम्र: 21 वर्ष।
2. कुनाल पुत्र सुशील कुमार
निवासी: मोहल्ला कस्सावान, थाना कोतवाली सासनी, जिला हाथरस।
उम्र: 19 वर्ष।
3. आतिश पुत्र अशोक अग्रवाल
निवासी: कस्बा सासनी, थाना कोतवाली सासनी, जिला हाथरस।
उम्र: 20 वर्ष।
तीनों आरोपियों को पुलिस ने गौर सिटी-2 स्थित भविष्य इंडिया टावर के पास से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, इस कार्रवाई में लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद ली गई।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंकिंग दस्तावेज और पहचान संबंधी सामग्री बरामद की।
इस बरामदगी में बैंकिंग दस्तावेजों के साथ कई पहचान पत्रों का होना जांच के लिहाज से अहम है। पुलिस इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगा सकती है कि संबंधित बैंक खाते किन लोगों के नाम पर खोले गए, खातों में किस तरह के लेनदेन हुए और उनका इस्तेमाल किन शिकायतों में किया गया।
हालांकि, बरामदगी की सूची अपने आप में सभी दस्तावेजों के फर्जी होने या प्रत्येक खाते के साइबर अपराध में इस्तेमाल होने की पुष्टि नहीं करती। इसके लिए दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन का सत्यापन आवश्यक होगा।
किस मामले में दर्ज हुआ मुकदमा?
थाना बिसरख, गौतमबुद्धनगर में इस मामले में मुकदमा अपराध संख्या 743/2026 दर्ज किया गया है।
पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 238(C), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66(C) और 66(D) का उल्लेख किया गया है।
इन धाराओं के तहत दर्ज मुकदमे में पुलिस की जांच के दौरान आरोपों, दस्तावेजों, बैंकिंग लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। धाराओं के अंतिम लागू होने और आरोपों की पुष्टि का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या रखें सावधानी?
इस मामले से एक बार फिर स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध केवल फर्जी फोन कॉल या संदिग्ध लिंक तक सीमित नहीं हैं। बैंक खाते और पहचान संबंधी दस्तावेज भी ऐसे नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आम नागरिकों को चाहिए कि वे अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंकिंग विवरण और अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज अनजान लोगों के साथ साझा न करें। किसी अन्य व्यक्ति को कमीशन या लालच में अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना भी गंभीर कानूनी और वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से संबंधित वित्तीय लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?
बिसरख पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कुछ अहम सवालों के जवाब जांच से सामने आने बाकी हैं। बरामद 29 पासबुक और 23 चेकबुक किन खातों से संबंधित हैं? इन खातों में कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ? कितने लोगों की पहचान संबंधी जानकारी का इस्तेमाल किया गया? अलग-अलग राज्यों में दर्ज NCRP शिकायतों में इस नेटवर्क की भूमिका क्या है? और कथित तौर पर 20 प्रतिशत कमीशन लेने वाले आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे?
इन सवालों के जवाब बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और शिकायतों के सत्यापन से सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और दस्तावेजों की बरामदगी की पुष्टि की गई है। जांच के आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क के अन्य संभावित संपर्कों और ठगी की कुल रकम से जुड़े तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।
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