भारतीय रेलवे ने कटरा-बनिहाल सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम गति सीमा 75 से बढ़ाकर 100 किमी प्रति घंटा कर दी है। बढ़ी हुई रफ्तार का सफल परीक्षण वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ किया गया, जिसने 1178 फीट ऊंचे चिनाब रेलवे ब्रिज और भारत के पहले केबल-स्टे अंजी ब्रिज को 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया।
1178 फीट की ऊंचाई… नीचे चिनाब नदी और ऊपर 100 की रफ्तार, वंदे भारत ने रचा इतिहास
कल्पना कीजिए… जमीन से 1178 फीट ऊपर, दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल पर एक ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हो। नीचे चिनाब नदी और सामने पहाड़ों के बीच बना विशाल रेलवे ब्रिज। भारतीय रेलवे के लिए यह सिर्फ एक स्पीड ट्रायल नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और रेल संचालन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
श्री माता वैष्णो देवी कटरा-बनिहाल रेल सेक्शन पर वंदे भारत एक्सप्रेस ने चिनाब रेलवे ब्रिज और भारत के पहले केबल-स्टे रेलवे ब्रिज अंजी ब्रिज को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पार कर नया रिकॉर्ड बनाया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस उपलब्धि की जानकारी अपने X अकाउंट के जरिए साझा की। उन्होंने इस मौके को भारत के इंजीनियरिंग गौरव से जोड़ते हुए 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का उल्लेख किया।
75 से बढ़कर 100 किमी प्रति घंटे हुई अधिकतम स्पीड
सबसे बड़ा बदलाव 111 किलोमीटर लंबे कटरा-बनिहाल सेक्शन में हुआ है। यहां अब तक ट्रेनों के लिए अधिकतम गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इसे बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया गया है।
बढ़ी हुई गति सीमा का सफलतापूर्वक परीक्षण भी किया गया। इस दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 26401/26404 ने 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दोनों महत्वपूर्ण पुलों को पार किया।
यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि कटरा से बनिहाल तक का यह रेल मार्ग उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कठिन पहाड़ी इलाकों, गहरी घाटियों और बड़े-बड़े पुलों के बीच तैयार किए गए इस रेल नेटवर्क पर ट्रेन संचालन को तेज करना रेलवे के लिए बड़ी उपलब्धि है।
चिनाब ब्रिज पर 100 की रफ्तार, अंजी ब्रिज ने भी दिया साथ
चिनाब रेलवे ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। यह पुल भारतीय रेलवे की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग परियोजनाओं में शामिल रहा है। अब इसी पुल से वंदे भारत एक्सप्रेस का 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरना इसकी परिचालन क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण परीक्षण माना जा रहा है।
वहीं, अंजी ब्रिज भी इस रेल मार्ग की खास पहचान है। यह भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे ब्रिज है। वंदे भारत ने यहां भी 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल परीक्षण किया।

यानी एक ही सेक्शन में भारतीय रेलवे ने दो बेहद महत्वपूर्ण पुलों पर तेज रफ्तार ट्रेन संचालन का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है।
अब सफर में कितना बदलाव आएगा?
स्पीड लिमिट बढ़ने का सीधा असर ट्रेन संचालन और यात्रा के समय पर पड़ सकता है। रेलवे के मुताबिक, इससे USBRL परियोजना पर ट्रेनों का संचालन आसान होगा और यात्रा का समय कम करने में मदद मिलेगी।
यात्रियों के लिए इसका मतलब है कि जम्मू-कश्मीर के इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर सफर पहले की तुलना में तेज हो सकता है। इसके साथ ही रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक रेल यात्रा उपलब्ध कराना है।
हालांकि, पूरे सफर का समय केवल इस स्पीड बढ़ोतरी पर निर्भर नहीं करता। स्टेशन स्टॉपेज, ट्रैक की परिस्थितियां, परिचालन व्यवस्था और अन्य तकनीकी कारण भी कुल यात्रा समय को प्रभावित करते हैं।
चिनाब ब्रिज से गुजरती हैं तीन पैसेंजर ट्रेनें
फिलहाल चिनाब ब्रिज से कुल तीन पैसेंजर ट्रेन सेवाएं गुजरती हैं। इनमें ट्रेन नंबर 26401/26402 जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस, 26403/26404 जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस और 14687/14688 श्री माता वैष्णो देवी कटरा-बनिहाल एक्सप्रेस शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर में वंदे भारत सेवा के विस्तार के साथ इस रेल नेटवर्क का महत्व लगातार बढ़ा है। इसी साल जून में जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को अनंतनाग में भी स्टॉपेज दिया गया था।
इससे पहले ट्रेन शहीद कैप्टन तुषार महाजन (उधमपुर), श्री माता वैष्णो देवी कटरा, रियासी और बनिहाल रेलवे स्टेशनों पर रुकती थी।
पहाड़ों के बीच अब और तेज दौड़ेगी वंदे भारत
कटरा-बनिहाल सेक्शन पर 75 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड सीमा बढ़ना केवल आंकड़े में 25 किमी प्रति घंटे का अंतर नहीं है। इसके पीछे रेलवे ट्रैक, पुलों और पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित ट्रेन संचालन की क्षमता का परीक्षण भी जुड़ा है।
खास बात यह है कि जिस चिनाब ब्रिज को कभी दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना गया, उसी पर अब वंदे भारत 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ चुकी है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ी हुई गति सीमा का नियमित यात्री सेवाओं पर कितना असर पड़ता है और जम्मू से कश्मीर के बीच रेल सफर में यात्रियों को समय की कितनी बचत मिलती है। फिलहाल इतना जरूर है कि 1178 फीट की ऊंचाई पर चिनाब ब्रिज और अंजी ब्रिज को 100 की रफ्तार से पार करने वाला यह ट्रायल भारतीय रेल के लिए एक यादगार पड़ाव बन गया है।
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