उत्तर रेलवे ने फिरोजपुर और अंबाला मंडलों में सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार शिविर आयोजित किए। जालंधर में 123 और अंबाला में 131 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। शिविरों में 2×25 केवी अपग्रेडेशन, ओएचई-पावर सप्लाई, रेलवे ट्रैक के पास JCB-क्रेन संचालन, फाउंडेशन कास्टिंग, मस्तूल निर्माण, ग्राउटिंग, फीडर तार और अर्थिंग लाइन बिछाने के दौरान सुरक्षा व गुणवत्ता मानकों पर प्रशिक्षण दिया गया।
रेलवे में एक छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। खासकर तब, जब काम सीधे रेलवे ट्रैक, ओवरहेड इक्विपमेंट और बिजली से जुड़े सिस्टम के आसपास चल रहा हो। ऐसे में सुरक्षा केवल नियमों की सूची नहीं, बल्कि हर स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी की जिम्मेदारी बन जाती है। इसी सोच के साथ उत्तर रेलवे ने अपने फिरोजपुर और अंबाला मंडलों में विशेष सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार शिविरों का आयोजन किया।
इन शिविरों का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को सुरक्षा नियम याद दिलाना नहीं था, बल्कि उन्हें मौके पर सुरक्षित कार्य पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना और निर्माण एवं उन्नयन कार्यों में गुणवत्ता मानकों के पालन को सुनिश्चित करना भी था।
भारतीय रेलवे में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसी प्रतिबद्धता के तहत उत्तर रेलवे लगातार अपने बुनियादी ढांचे के उन्नयन से जुड़े कार्यों में सुरक्षा, गुणवत्ता और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दे रहा है। हाल ही में आयोजित दोनों शिविर भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा रहे।
फिरोजपुर मंडल में जालंधर में हुआ शिविर
फिरोजपुर मंडल के अंतर्गत जालंधर में सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार शिविर आयोजित किया गया। इसमें रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ प्रोजेक्ट यूनिट के कर्मचारी, ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन यानी टीआरडी स्टाफ और प्रोजेक्ट यूनिट के अधिकारी भी शामिल हुए।
शिविर में कुल 123 कर्मचारियों ने भाग लिया। यहां विशेष रूप से 2×25 केवी अपग्रेडेशन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षित कार्य पद्धतियों पर ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन कास्टिंग यानी बुनियाद की ढलाई के समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियों और आवश्यक गुणवत्ता जांचों को लेकर व्यावहारिक प्रदर्शन भी किए गए। इसका मकसद कर्मचारियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यस्थल पर किन बातों का ध्यान रखना है, इसे स्पष्ट रूप से समझाना था।
अंबाला में 131 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इसी क्रम में अंबाला में भी सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर दिल्ली जंक्शन-अंबाला कैंट और सानेहवाल-सहारनपुर सेक्शन पर ओवरहेड इक्विपमेंट यानी ओएचई और पावर सप्लाई इंस्टालेशन के उन्नयन से जुड़े कार्यों पर केंद्रित रहा।
इस शिविर में 119 कर्मचारियों और 12 अधिकारियों समेत कुल 131 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
यहां भी मुख्य फोकस यही रहा कि 2×25 केवी अपग्रेडेशन और संबंधित बुनियादी ढांचा कार्यों को सुरक्षित तरीके से पूरा किया जाए और हर स्तर पर निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन हो।
रेलवे ट्रैक के पास JCB और क्रेन संचालन पर खास जोर
दोनों शिविरों में उन परिस्थितियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां काम के दौरान दुर्घटना का खतरा अधिक हो सकता है। खासतौर पर रेलवे ट्रैक के नजदीक क्रेन, JCB और एक्सीवेटर जैसी भारी मशीनों के सुरक्षित संचालन को लेकर कर्मचारियों को जरूरी सावधानियां बताई गईं।

रेलवे ट्रैक के आसपास भारी मशीनरी का संचालन बेहद संवेदनशील कार्य माना जाता है। ऐसे में मशीन की स्थिति, ट्रैक से सुरक्षित दूरी और कार्य के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।
शिविरों में पटरियों की सुरक्षा, सुरक्षित ट्रेन परिचालन और सिग्नलिंग एवं दूरसंचार प्रणालियों की सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई। इसके साथ ही रेलवे के अन्य बुनियादी ढांचे को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
फाउंडेशन से लेकर फीडर वायर तक हर चरण की ट्रेनिंग
सुरक्षा शिविरों में केवल मशीनों के संचालन तक ही चर्चा सीमित नहीं रही। इसमें अपग्रेडेशन कार्य के अलग-अलग चरणों से जुड़ी सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को भी शामिल किया गया।
प्रशिक्षण सत्रों में फाउंडेशन कास्टिंग, मस्तूल निर्माण, अलाइनमेंट और ग्राउटिंग के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं पर जानकारी दी गई। इसके अलावा फीडर तारों को लगाने और बरीड अर्थ कंडक्टर यानी जमीन के अंदर अर्थिंग लाइन बिछाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को भी समझाया गया।
इन सभी कार्यों में गुणवत्ता के साथ सुरक्षा का तालमेल बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि किसी भी स्तर पर तकनीकी चूक आगे चलकर परिचालन और संरचनात्मक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
खराब मौसम और आपात स्थिति से निपटने की भी तैयारी
शिविरों में कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में काम करते समय किन अतिरिक्त सावधानियों को अपनाना जरूरी है। बारिश, तेज हवा या अन्य खराब मौसम में रेलवे के विद्युतीकरण और निर्माण कार्यों के दौरान जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा प्रतिभागियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं, किसी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत सूचना देने और बचाव व्यवस्था से संबंधित जानकारी भी दी गई।
यानी इन शिविरों का दायरा केवल 'काम सुरक्षित तरीके से कैसे करें' तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 'अगर कोई आपात स्थिति पैदा हो जाए तो उस समय क्या करना है' तक रखा गया।
सुरक्षा के साथ गुणवत्ता भी बनी रहे, यही लक्ष्य
उत्तर रेलवे की ओर से आयोजित इन दोनों शिविरों का मूल उद्देश्य साफ है—बुनियादी ढांचे के उन्नयन का काम तेजी से हो, लेकिन सुरक्षा और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए।
फिरोजपुर के जालंधर शिविर में 123 कर्मचारी और अंबाला के शिविर में 119 कर्मचारी व 12 अधिकारी शामिल हुए। दोनों स्थानों पर कर्मचारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, सुरक्षा सावधानियों और तकनीकी गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी गई।
रेलवे के लिए चुनौती केवल नई तकनीक और बुनियादी ढांचे को विकसित करना नहीं, बल्कि इन परियोजनाओं के दौरान ट्रेनों का सुरक्षित संचालन और मौजूदा रेलवे परिसंपत्तियों की सुरक्षा बनाए रखना भी है। ऐसे में ये सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार शिविर कर्मचारियों को तैयार करने और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माने जा सकते हैं।
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