EPF को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। PF के लिए मौजूदा 15,000 रुपये की वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की घोषणा की गई है। सरकार के अनुसार इससे करीब 51 लाख कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे। इस फैसले पर सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये और पांच वर्षों में लगभग 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नौकरी की सैलरी अगर 15 हजार से थोड़ी ज्यादा है, तो क्या अब तक कर्मचारी भविष्य निधि और उससे जुड़ी सामाजिक सुरक्षा से बाहर रह जाते थे? और अगर यही वेतन सीमा बढ़कर 25 हजार रुपये हो जाए, तो कितने कामगारों की जिंदगी में इसका असर पड़ सकता है?
केंद्र सरकार के 16 सितंबर 2026 के फैसले के बाद इन सवालों पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने EPF के लिए लागू वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि नई सीमा से करीब 51 लाख कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
सरकार के अनुसार, इस फैसले के लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये के वेतन वर्ग में आने वाले ऐसे कर्मचारी, जो नई व्यवस्था के दायरे में आते हैं, संगठित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली से जुड़ सकेंगे।
2014 में तय हुई थी 15 हजार रुपये की सीमा
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, EPF के तहत मौजूदा वेतन सीमा 15,000 रुपये थी। यह सीमा सितंबर 2014 में तय की गई थी। अब करीब 12 साल बाद इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का तर्क है कि बदलती आय और रोजगार की परिस्थितियों के बीच सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी व्यापक होना चाहिए। नई सीमा का उद्देश्य उन कर्मचारियों को EPF से जुड़ी सुरक्षा उपलब्ध कराना है, जो वर्तमान सीमा से ऊपर होने के कारण अब तक इस दायरे में नहीं आ पाते थे।
51 लाख कर्मचारियों को फायदा, 11,339 करोड़ रुपये सालाना खर्च
सरकार के मुताबिक इस फैसले का सबसे बड़ा असर 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा। अनुमान है कि करीब 51 लाख कर्मचारी इससे लाभान्वित होंगे।
इसके लिए केंद्र सरकार पर हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये का अनुमानित अतिरिक्त खर्च आएगा। पांच वर्षों में यह खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
सरकार के अनुसार यह लंबे समय से चली आ रही मांग थी। इस प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच चर्चा हुई और व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) ने 16 जून 2026 की बैठक में इसकी सिफारिश की थी। इसके बाद 16 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी।
कर्मचारियों को सिर्फ PF नहीं, तीन स्तरों पर सामाजिक सुरक्षा
वेतन सीमा बढ़ने का असर सिर्फ PF खाते में जमा होने वाली बचत तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के तीन प्रमुख हिस्सों का लाभ मिलेगा।
पहला है कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF, जिसके जरिए कर्मचारी के लिए नियमित सेवानिवृत्ति बचत का प्रावधान होता है।
दूसरा है कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS, जो पात्र कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा से जोड़ती है।
तीसरा है कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना यानी EDLI, जिसके तहत पात्र सदस्य की मृत्यु की स्थिति में निर्धारित शर्तों के अनुसार बीमा लाभ उपलब्ध होता है।
इस तरह सरकार का कहना है कि नई वेतन सीमा कर्मचारियों को बचत, पेंशन और बीमा—तीनों तरह की सामाजिक सुरक्षा के व्यापक ढांचे से जोड़ने में मदद करेगी।
कर्मचारी और नियोक्ता दोनों पर क्या असर?
EPF व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है, जबकि सरकार का योगदान कर्मचारी पेंशन व्यवस्था से जुड़ा होता है। केंद्रीय मंत्री ने भी योगदान की इसी संरचना का उल्लेख किया।
सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ने से कर्मचारियों को लंबे समय के लिए अधिक वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है। साथ ही कंपनियों के लिए भी औपचारिक रोजगार और कर्मचारी कल्याण की व्यवस्था मजबूत होने का दावा किया गया है।
श्रम मंत्रालय के मुताबिक व्यापक सामाजिक सुरक्षा से कर्मचारियों का भरोसा बढ़ सकता है, प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है और कार्यबल को अधिक स्थिर बनाया जा सकता है।
EPFO का दायरा कितना बड़ा है?
EPFO देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इसके तहत करोड़ों कर्मचारी और लाखों प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। EPFO के साथ-साथ कर्मचारी पेंशन योजना के तहत भी बड़ी संख्या में पेंशनभोगी लाभ प्राप्त करते हैं।
श्रम मंत्रालय के दस्तावेजों में पहले 15,000 रुपये की वेतन सीमा के आधार पर EPS में सरकारी योगदान की पात्रता का उल्लेख किया गया था। ऐसे में सीमा बढ़ाने का फैसला सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव है।
हालांकि कर्मचारियों के लिए वास्तविक लाभ उनकी पात्रता, वेतन संरचना, EPF सदस्यता और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल 25,000 रुपये की सीमा सुनकर हर कर्मचारी के PF खाते में समान राशि जमा होने की बात मानना सही नहीं होगा।
सरकार का फोकस—औपचारिक रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा
केंद्र सरकार का कहना है कि देश की आर्थिक प्रगति का केंद्र उसका कार्यबल है। रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ यह भी जरूरी है कि कर्मचारियों को ऐसी सामाजिक सुरक्षा मिले, जो नौकरी बदलने या स्थान बदलने के बावजूद उनके साथ बनी रहे।
EPF की वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला इसी व्यापक सामाजिक सुरक्षा ढांचे के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। सरकार पहले भी EPF के दायरे से बाहर रह गए पात्र कर्मचारियों को शामिल करने के लिए Employees’ Enrolment Campaign 2026 चला रही है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है।
अब 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की नई सीमा से उन कर्मचारियों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है, जो संगठित सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ सकते हैं।
असली असर अब लागू होने के बाद दिखेगा
सरकार ने इसे कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला बताया है। करीब 51 लाख कर्मचारियों को संभावित लाभ और 11,339 करोड़ रुपये के वार्षिक सरकारी खर्च का अनुमान इस फैसले के पैमाने को दिखाता है।
लेकिन कर्मचारियों के लिए सबसे अहम सवाल अब यही है कि नई व्यवस्था व्यवहार में कैसे लागू होती है, किन कर्मचारियों को किस तरह कवर किया जाता है और उनके EPF, EPS तथा EDLI लाभ पर इसका वास्तविक असर कितना पड़ता है।
फिलहाल इतना साफ है कि 15,000 रुपये की पुरानी वेतन सीमा का दौर खत्म कर 25,000 रुपये की नई सीमा की ओर कदम बढ़ाया गया है। अब नजर इसके क्रियान्वयन और कर्मचारियों के खातों में दिखने वाले वास्तविक प्रभाव पर रहेगी।
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