उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने कश्मीर घाटी में माल परिवहन के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। पंपोर गुड्स शेड पर पहली बार मालगाड़ी की सफल हैंडलिंग की गई। भारतगढ़ और किरतपुर साहिब से अल्ट्राटेक, ACC और अंबुजा सीमेंट लेकर पहुंची पहली रेक के साथ घाटी में व्यापार, उद्योग, निर्माण कार्य और कृषि आधारित लॉजिस्टिक्स को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कश्मीर घाटी के लिए 17 जुलाई 2026 का दिन रेलवे और व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। वर्षों से जिस आधुनिक माल परिवहन व्यवस्था का इंतजार किया जा रहा था, वह अब धरातल पर दिखाई देने लगी है। उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल के अंतर्गत बारामूला-संगलदान रेल खंड पर स्थित पंपोर (PMPE) गुड्स शेड पर पहली बार सफलतापूर्वक मालगाड़ी की हैंडलिंग की गई। इस उपलब्धि ने न केवल रेलवे के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती दी है, बल्कि कश्मीर घाटी की अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद 15 जुलाई 2026 से पंपोर गुड्स शेड का संचालन शुरू किया गया था। संचालन शुरू होने के मात्र 24 घंटे के भीतर पहली मालगाड़ी (रेक) का सफल आगमन और उसकी हैंडलिंग यह साबित करती है कि यह नया गुड्स शेड शुरुआत से ही पूरी क्षमता के साथ कार्य करने के लिए तैयार है।
कश्मीर घाटी का दूसरा प्रमुख गुड्स शेड
पंपोर गुड्स शेड, अनंतनाग के बाद कश्मीर घाटी का दूसरा गुड्स शेड है। अब तक घाटी में अधिकांश माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की गतिविधियां अनंतनाग गुड्स शेड के माध्यम से संचालित होती थीं। ऐसे में पंपोर में नई सुविधा शुरू होने से माल परिवहन का दबाव विभाजित होगा और व्यापारियों को अधिक तेज, सुविधाजनक तथा किफायती विकल्प मिलेगा।
रेल प्रशासन का मानना है कि इससे घाटी के विभिन्न हिस्सों तक माल की आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से हो सकेगी।

सीमेंट से लदी पहली रेक ने रचा इतिहास
पंपोर गुड्स शेड पर पहुंचने वाली पहली मालगाड़ी निर्माण सामग्री लेकर आई।
यह रेक अंबाला मंडल के भारतगढ़ और किरतपुर साहिब स्टेशनों से रवाना हुई थी। इसमें कुल 42 BCN वैगन शामिल थे, जिनमें 21-21 वैगनों के माध्यम से अल्ट्राटेक, ACC और अंबुजा सीमेंट की खेप कश्मीर पहुंचाई गई।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक मालगाड़ी का आगमन नहीं, बल्कि घाटी में आधुनिक रेल लॉजिस्टिक्स व्यवस्था की नई शुरुआत है, जिससे आने वाले समय में विभिन्न प्रकार के औद्योगिक, कृषि और उपभोक्ता उत्पादों की आवाजाही और अधिक सुगम होगी।
सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक मिलेगी सुविधा
रेल प्रशासन ने जानकारी दी है कि पंपोर गुड्स शेड पर प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक माल की बुकिंग और हैंडलिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
इस विस्तारित कार्य अवधि का उद्देश्य व्यापारियों, उद्योगपतियों और परिवहन कंपनियों को अधिक लचीलापन प्रदान करना है ताकि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार माल की लोडिंग और अनलोडिंग आसानी से कर सकें।
फल उत्पादकों और किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कश्मीर घाटी देशभर में अपने सेब, चेरी, अखरोट, केसर और अन्य बागवानी उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है।
अब तक घाटी के कई व्यापारियों और किसानों को अपना माल भेजने या निर्माण सामग्री मंगाने के लिए अनंतनाग अथवा अन्य दूरस्थ स्थानों तक जाना पड़ता था। पंपोर गुड्स शेड शुरू होने से यह निर्भरता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
रेलवे के अनुसार, इससे किसानों, फल उत्पादकों, सीमेंट व्यापारियों और निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबारियों का समय बचेगा, परिवहन लागत घटेगी और माल की आपूर्ति अधिक तेज एवं विश्वसनीय होगी।

पंपोर गुड्स शेड केवल माल ढुलाई की सुविधा नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए रोजगार का नया केंद्र भी बन सकता है।
रेलवे का मानना है कि यहां लोडिंग-अनलोडिंग, ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, श्रमिक सेवाओं तथा अन्य लॉजिस्टिक गतिविधियों से जुड़े नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय युवाओं और छोटे व्यवसायों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है।
अनंतनाग गुड्स शेड पर घटेगा दबाव
अब तक घाटी में माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा अनंतनाग गुड्स शेड के माध्यम से संचालित होता था। नई सुविधा शुरू होने के बाद वहां का परिचालन दबाव कम होगा।
रेल प्रशासन का कहना है कि इससे माल की निकासी पहले की तुलना में अधिक तेज होगी, ट्रेनों के संचालन में दक्षता बढ़ेगी और कश्मीर के भीतर तथा देश के अन्य राज्यों के साथ माल परिवहन अधिक सुचारु एवं भरोसेमंद बनेगा।
उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
बेहतर रेल लॉजिस्टिक्स किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।
पंपोर गुड्स शेड के संचालन से निर्माण उद्योग, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक निवेश को गति मिलने की संभावना है। साथ ही रेलवे के माल परिवहन से होने वाले राजस्व में भी वृद्धि होगी।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि माल ढुलाई से प्राप्त अतिरिक्त आय का उपयोग भविष्य में यात्री सुविधाओं के विस्तार, स्टेशन विकास और रेलवे अवसंरचना को और मजबूत बनाने में किया जाएगा।
रेलवे की अपील—'मेक इन कश्मीर' अभियान को दें मजबूती
उत्तर रेलवे ने व्यापारिक संगठनों, उद्योगपतियों, फल उत्पादक संघों, किसानों और आम जनता से इस नई सुविधा का अधिकतम उपयोग करने की अपील की है।
रेल प्रशासन ने कहा है कि पंपोर गुड्स शेड केवल एक रेलवे सुविधा नहीं, बल्कि कश्मीर की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रेलवे ने सभी हितधारकों से "मेक इन कश्मीर" अभियान को बढ़ावा देने और रेल आधारित माल परिवहन को अपनाने का आग्रह किया है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में पंपोर गुड्स शेड कश्मीर घाटी के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित होगा, जिससे व्यापार, कृषि, उद्योग और रोजगार—चारों क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
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