उत्तर रेलवे ने दिल्ली मंडल में वर्षों से चली आ रही एक जटिल तकनीकी समस्या का समाधान कर लिया है। डफरिन ब्रिज और पुल मिठाई के नीचे बने ओएचई डेड ज़ोन के कारण कई बार विद्युत इंजन बीच रास्ते में रुक जाते थे। अब आधुनिक सॉफ्टवेयर और तकनीकी सुधारों की मदद से इस समस्या का स्थायी समाधान कर लिया गया है।
विज्ञापन
नई दिल्ली में रेलवे परिचालन से जुड़ी एक ऐसी समस्या थी, जो वर्षों से रेल अधिकारियों और इंजीनियरों के लिए चुनौती बनी हुई थी। यह समस्या यात्रियों की नजरों से भले ही दूर रही हो, लेकिन इसका सीधा असर ट्रेनों की गति, समयपालन और परिचालन व्यवस्था पर पड़ता था। अब उत्तर रेलवे ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
उत्तर रेलवे ने दिल्ली मंडल के डफरिन ब्रिज और पुल मिठाई क्षेत्र के नीचे मौजूद ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के डेड ज़ोन से जुड़ी तकनीकी समस्या को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। इस उपलब्धि से न केवल ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुगम और समयबद्ध यात्रा का अनुभव मिलेगा।
आखिर क्या थी यह समस्या?
रेलवे के विद्युतीकृत मार्गों पर ट्रेनों को बिजली की आपूर्ति ओवरहेड उपकरणों (ओएचई) के माध्यम से की जाती है। लेकिन कुछ स्थानों पर पुलों और अन्य संरचनाओं के नीचे पर्याप्त ऊंचाई नहीं होने के कारण बिजली आपूर्ति की व्यवस्था में विशेष बदलाव करने पड़ते हैं।
डफरिन ब्रिज और पुल मिठाई के नीचे भी ऐसी ही स्थिति थी। यहां सीमित हेडरूम के कारण लगभग 50 मीटर से अधिक लंबे डेड ज़ोन बनाए गए थे। इन क्षेत्रों से गुजरते समय कई बार विद्युत इंजन बिजली की आपूर्ति खो देते थे और अचानक रुक जाते थे।
इस समस्या के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता था और देश के सबसे व्यस्त रेल नेटवर्क में से एक दिल्ली मंडल में देरी की स्थिति पैदा हो जाती थी।
अप्रैल 2026 में शुरू हुआ मिशन
उत्तर रेलवे ने अप्रैल 2026 में इस समस्या के समाधान के लिए विशेष अभियान शुरू किया। रेलवे अधिकारियों ने इस चुनौती को मिशन मोड में लेते हुए इसके मूल कारणों की पहचान करने का फैसला किया।
इसके लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) और नॉर-ब्रेमसे इंडिया लिमिटेड (केबीआईएल) के विशेषज्ञों की सहायता ली गई। विशेषज्ञों ने विस्तृत तकनीकी अध्ययन और डेटा विश्लेषण के माध्यम से समस्या की तह तक पहुंचने का प्रयास किया।
जांच में क्या सामने आया?
जांच के दौरान पता चला कि वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (वीसीबी) की स्विचिंग के समय उत्पन्न होने वाले वोल्टेज सर्ज के कारण सीसीबी 2.0 ब्रेकिंग प्रणाली वाले विद्युत इंजनों में अचानक आपातकालीन ब्रेक लग जाते थे।
इस वजह से इंजन अपनी गति खो देते थे और डेड ज़ोन में ही रुक जाते थे। यही कारण था कि ट्रेनों को बार-बार देरी का सामना करना पड़ता था।
तकनीक बनी समाधान की कुंजी
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद केबीआईएल के विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रॉनिक विजिलेंस कंट्रोलर (ईवीसी) के लिए एक नया और उन्नत सॉफ्टवेयर विकसित किया।
इस सॉफ्टवेयर को सबसे पहले कुछ इंजनों में स्थापित किया गया। परीक्षण सफल रहने के बाद इसे बड़े पैमाने पर लागू करने का निर्णय लिया गया।
वर्तमान समय में इस उन्नत तकनीक को भारतीय रेल के 600 से अधिक विद्युत इंजनों में स्थापित किया जा चुका है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जिन इंजनों में यह सॉफ्टवेयर लगाया गया है, उनमें अब तक इस प्रकार की कोई समस्या सामने नहीं आई है।
बाकी इंजनों में भी होगा बदलाव
उत्तर रेलवे ने स्पष्ट किया है कि शेष इंजनों में भी चरणबद्ध तरीके से यह सॉफ्टवेयर स्थापित किया जाएगा। इसके लिए केबीआईएल की तकनीकी टीमें देश के विभिन्न लोको शेडों में लगातार काम कर रही हैं।
रेलवे का मानना है कि इस बदलाव के बाद दिल्ली क्षेत्र में ट्रेनों के संचालन में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
इस तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को मिलेगा।
ट्रेनों के बीच रास्ते में रुकने की घटनाओं में कमी आएगी।
ट्रेनों का समयपालन बेहतर होगा।
परिचालन क्षमता बढ़ेगी।
रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा।
ईंधन और ऊर्जा की बचत होगी।
आपातकालीन परिस्थितियों से निपटना आसान होगा।
रेलवे इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि यह भारतीय रेलवे की शोध क्षमता, इंजीनियरिंग दक्षता और नवाचार की सोच का भी प्रमाण है।
उत्तर रेलवे, आरडीएसओ और केबीआईएल के बीच बेहतर समन्वय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने वर्षों पुरानी समस्या को समाप्त कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय रेलवे इसी तरह आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके यात्रियों को और अधिक सुरक्षित, तेज और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
विज्ञापन
उत्तर रेलवे, ओएचई डेड ज़ोन, दिल्ली मंडल, डफरिन ब्रिज, पुल मिठाई, भारतीय रेल, विद्युत लोकोमोटिव, आरडीएसओ, केबीआईएल, रेल परिचालन, रेलवे तकनीक, सीसीबी 2.0, ईवीसी सॉफ्टवेयर
COMMENTS