विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के कुकरैल में ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाभियान का शुभारंभ किया। 242 करोड़ पौधरोपण की उपलब्धि के साथ प्रदेश में इस वर्ष 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कुकरैल रेंज, अवध वन प्रभाग में शुक्रवार को पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का एक बड़ा संदेश देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाभियान का शुभारंभ करते हुए प्रदेशवासियों से अपनी मां और मातृभूमि के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कपूर का पौधा रोपित किया, जबकि वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण सक्सेना ने आंवला, वन राज्यमंत्री केपी मलिक ने नीम तथा विधायक ओपी श्रीवास्तव ने आंवला का पौधा लगाया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक साथ 200 से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इसके साथ ही कुकरैल परिसर में ‘महर्षि चरक औषधि वन’ की स्थापना भी की गई, जो औषधीय पौधों के संरक्षण और जागरूकता का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों, वन विभाग के अधिकारियों और आम नागरिकों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ सेल्फी ली, उन्हें मिष्ठान वितरित किया और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों और आमजन ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से देशवासियों को मां और मातृभूमि के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराया है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में मां सबसे प्रिय होती है, इसलिए यदि हर नागरिक अपनी मां के नाम एक पौधा लगाए और उसका संरक्षण करे, तो यह अभियान एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग ने इस वर्ष 50 करोड़ से अधिक पौधे तैयार किए हैं और प्रदेश में 5 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संकट को आज की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक वर्षा, सूखा, तापमान में वृद्धि और मौसम चक्र में बदलाव जैसी समस्याएं पूरी मानवता के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट केवल प्रकृति का नहीं बल्कि संपूर्ण जीव सृष्टि का संकट है। चूंकि यह समस्या मानव निर्मित है, इसलिए इसका समाधान भी मनुष्य को ही निकालना होगा।
उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूरी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करे, तो धरती मां को सुरक्षित रखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक को पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों, पार्कों, जंगलों, जलस्रोतों और वाटिकाओं में प्लास्टिक कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना होगा। इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।

जल संरक्षण को पर्यावरण संरक्षण का अभिन्न हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात की एक-एक बूंद को बचाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है और इसी दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में इसे अनिवार्य बनाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2017 में जब उनकी सरकार बनी थी, तब प्रदेश में बड़े स्तर पर पौधरोपण की न तो पर्याप्त व्यवस्था थी और न ही अनुभव। इसके बावजूद वन विभाग और अन्य संबंधित विभागों ने मिलकर उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे प्रदेश का वन क्षेत्र और हरित आवरण लगातार बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन वर्ष पूर्व प्रकृति और मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की थी और आज उत्तर प्रदेश इस अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर भी ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आम का पौधा रोपित कर प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी प्रकृति और जीव सृष्टि का अस्तित्व सुरक्षित रह पाएगा।

अपने संबोधन में उन्होंने प्रभु श्रीराम के उद्घोष ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि के प्रति कृतज्ञता प्रत्येक नागरिक का सर्वोच्च दायित्व है। पर्यावरण की रक्षा उसी कर्तव्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प के रूप में मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा देने के लिए माटी कला बोर्ड को सशक्त किया है। कुम्हार और प्रजापति समाज को तालाबों से निशुल्क मिट्टी उपलब्ध कराई जा रही है तथा उन्हें सोलर और इलेक्ट्रिक चाक भी दिए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में वन राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, केपी मलिक, बलदेव सिंह औलख, दानिश आजाद अंसारी, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव (वन) वी. हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर शुरू हुआ यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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