गाजियाबाद जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में निराश्रित, असहाय और जरूरतमंद महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों के लिए विशेष रेस्क्यू एवं जागरूकता अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक किया गया कि यदि कोई बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ, भिक्षावृत्ति में लिप्त या संकटग्रस्त व्यक्ति दिखाई दे तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस या जिला प्रशासन को सूचना दें।
समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से गाजियाबाद जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पीआईएल (ज्योति राजपूत बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में जनपद में विशेष रेस्क्यू एवं जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य सड़कों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले निराश्रित, असहाय, बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ, संकटग्रस्त महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास उपलब्ध कराना है।
यह अभियान जिलाधिकारी गाजियाबाद के निर्देशन तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रशासन का कहना है कि समाज के ऐसे लोग, जो किसी कारणवश मुख्यधारा से कट गए हैं, उन्हें सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना केवल सरकार ही नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विशेष अभियान के दौरान रेस्क्यू टीम ने गाजियाबाद शहर के कई भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण किया। इनमें हापुड़ चुंगी चौराहा, पुराना बस अड्डा, चौधरी मोड़, गाजियाबाद रेलवे स्टेशन तथा अन्य सार्वजनिक स्थान शामिल रहे।

टीम ने इन स्थानों पर मौजूद राहगीरों, दुकानदारों, वाहन चालकों और आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित किया। लोगों को विस्तार से बताया गया कि यदि उन्हें कोई निराश्रित, बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ, भिक्षावृत्ति में लिप्त, लावारिस अथवा संकटग्रस्त महिला, पुरुष या बच्चा दिखाई देता है तो वे तत्काल इसकी सूचना संबंधित विभागों को दें।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की कि ऐसी सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस अथवा जिला प्रशासन से तुरंत संपर्क करें ताकि जरूरतमंद व्यक्ति तक समय रहते सहायता पहुंचाई जा सके।
अभियान के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कई बार बेसहारा लोग लंबे समय तक सार्वजनिक स्थानों पर रहते हैं लेकिन समय पर सूचना न मिलने के कारण उन्हें आवश्यक चिकित्सा, भोजन, आश्रय और सुरक्षा नहीं मिल पाती।
यदि नागरिक समय रहते प्रशासन को जानकारी दें तो ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनका इलाज, परामर्श, पुनर्वास और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल रेस्क्यू करना नहीं बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।

इस विशेष अभियान में विभिन्न सरकारी विभागों और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर भागीदारी निभाई।
अभियान में जिला प्रोबेशन कार्यालय की ओर से डीसीपीयू के प्रतिनिधि श्री जितेंद्र कुमार, चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपरवाइजर श्री संजय कुमार, थाना एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के थाना प्रभारी श्री सर्वेश पाल, उपनिरीक्षक आरिफ खान, हेड कांस्टेबल नीलम तथा रेखा मौजूद रहे।
इसके अलावा रेलवे स्टेशन परिसर में कार्यरत गैर सरकारी संस्था रेलवे चिल्ड्रन इंडिया की प्रतिनिधि शुभम चक्रवर्ती तथा आरपीएफ आउटरीच वर्कर रफीक खान ने भी अभियान में सक्रिय सहयोग दिया।
रेलवे स्टेशन क्षेत्राधिकारी श्री भागचंद मीणा से भी इस अभियान के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने भविष्य में ऐसे अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
अभियान के दौरान आम नागरिकों को यह भी बताया गया कि सरकार द्वारा सड़क, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले जरूरतमंद लोगों के लिए विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इनमें भोजन, चिकित्सा सुविधा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, अस्थायी आश्रय, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा जैसी सेवाएं शामिल हैं।
यदि कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में मिलता है तो प्रशासन उसे केवल अस्थायी सहायता ही नहीं बल्कि उसके दीर्घकालिक पुनर्वास की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाता है।

जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न समझें बल्कि सामाजिक दायित्व के रूप में देखें।
यदि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कोई बच्चा, महिला या पुरुष असहाय अवस्था में दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल संबंधित विभाग को सूचना दें।
प्रशासन का कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है और उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जा सकता है।
आज के समय में जब शहरी जीवन की भागदौड़ के बीच कई बार जरूरतमंद लोग हमारी नजरों के सामने होते हुए भी अनदेखे रह जाते हैं, ऐसे में यह अभियान समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि किसी जरूरतमंद की मदद केवल सरकार का नहीं बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।
एक छोटी-सी सूचना किसी बेसहारा बच्चे को परिवार से मिलाने, किसी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का इलाज कराने या किसी महिला को शोषण और हिंसा से बचाने का माध्यम बन सकती है।
गाजियाबाद प्रशासन का यह विशेष रेस्क्यू एवं जागरूकता अभियान न केवल संवेदनशील प्रशासनिक पहल है बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
यदि आम नागरिक सक्रिय सहयोग करें तो भविष्य में ऐसे कई जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित आश्रय, चिकित्सा सुविधा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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