उत्तर प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने 09 मंडलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आयुष अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति और मरीजों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आयुष अस्पतालों में लापरवाही पर सख्त सरकार, मंत्री दयाशंकर ‘दयालु’ ने अधिकारियों को दिया बड़ा संदेश
लखनऊ में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ संकेत दे दिए कि अब आयुष अस्पतालों में अव्यवस्था और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी। प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एमओएस) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने 09 मंडलों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक करते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
योजना भवन सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, देवीपाटन और बरेली मंडल के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक, यूनानी और जिला होम्योपैथिक अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य फोकस आयुष अस्पतालों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना, मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज देना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना रहा।
“अस्पतालों में दवा खत्म नहीं होनी चाहिए”
बैठक के दौरान आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अस्पतालों में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जहां भी दवाओं की कमी हो, उसकी सूचना तत्काल प्राथमिकता के आधार पर विभाग को भेजी जाए ताकि मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दवाइयों की खरीद मांग और आवश्यकता के अनुसार होनी चाहिए। जो दवाएं सामान्य तौर पर अधिक इस्तेमाल होती हैं और जिनकी मांग ज्यादा रहती है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खरीदा जाए।
मंत्री ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बाहर की दवा लिखने की नौबत नहीं आनी चाहिए। कोशिश हो कि अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं से ही मरीजों का पूरा इलाज किया जाए।
डॉक्टर समय पर पहुंचे, मरीजों का हो समुचित इलाज
आयुष मंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ओपीडी में आने वाले हर मरीज का समुचित और गंभीरता से उपचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार चाहती है कि आयुष चिकित्सा पद्धति पर लोगों का भरोसा और मजबूत हो। इसके लिए जरूरी है कि मरीजों को बेहतर व्यवहार, सही इलाज और पर्याप्त सुविधाएं मिलें।
डॉ. दयालु ने अधिकारियों को समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए ताकि व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

ओपीडी बढ़ाने और स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश
बैठक में मंत्री ने यह भी कहा कि आयुष अस्पतालों में ओपीडी संख्या बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को आयुष चिकित्सा के प्रति जागरूक किया जाए।
उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा गरीब और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। सरकार चाहती है कि आयुष पद्धति केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों तक उसका लाभ पहुंचे।
“सोवा-रिग्पा” पद्धति के प्रचार पर भी जोर
बैठक के दौरान आयुष मंत्री ने बौद्ध धर्म से जुड़े क्षेत्रों में “सोवा-रिग्पा” पद्धति के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि श्रावस्ती जैसे क्षेत्रों में जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, वहां इस पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दिया जाए।
सरकार का मानना है कि आयुष की विभिन्न पद्धतियों को मजबूत बनाकर प्रदेश में वैकल्पिक चिकित्सा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
स्वच्छता और हर्बल गार्डन पर भी फोकस
मंत्री ने अस्पतालों में स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, शौचालय और मरीजों की मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को अस्पतालों में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
इसके अलावा आयुष चिकित्सालयों में हर्बल गार्डन विकसित करने और अधिक से अधिक औषधीय पौधों का रोपण करने पर भी जोर दिया गया।
“लापरवाही हुई तो होगी कार्रवाई”
डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि किसी अधिकारी द्वारा कार्य में लापरवाही बरती गई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में प्रमुख सचिव आयुष श्री रंजन कुमार ने विभाग की अद्यतन प्रगति की जानकारी दी और मंत्री को आश्वस्त किया कि दिए गए सभी निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन कराया जाएगा।
बैठक में महानिदेशक आयुष श्रीमती चैत्रा वी., निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथ डॉ. पी.के. सिंह, यूनानी निदेशक प्रो. जमाल अख्तर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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