इंदिरापुरम स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में 29 अप्रैल 2026 को हुए भीषण अग्निकांड पर गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में फायर सेफ्टी सिस्टम की लापरवाही, अवैध निर्माण और फायर ड्राइव-वे में अवरोध जैसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
गौर ग्रीन एवेन्यू अग्निकांड पर हाई लेवल रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, फायर सिस्टम की लापरवाही और अवैध निर्माण पर उठे सवाल
गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में 29 अप्रैल 2026 को हुए भीषण अग्निकांड मामले में जिलाधिकारी गाजियाबाद के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सोसाइटी की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच समिति में सचिव गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), मुख्य अग्निशमन अधिकारी और सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। समिति ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया, सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तकनीकी रिपोर्टों का अध्ययन किया और सोसाइटी निवासियों, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों तथा संबंधित अधिकारियों से विस्तृत बातचीत के बाद अपनी जांच पूरी की।
9वीं मंजिल से शुरू हुई आग, 22 फ्लैट आए चपेट में
जांच रिपोर्ट के अनुसार आग टावर-डी की 9वीं मंजिल से शुरू हुई थी। आग ने कुछ ही समय में तेजी से ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 22 फ्लैट इस आग से प्रभावित हुए।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इतने बड़े हादसे के बावजूद किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। अग्निशमन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
17 फायर टेंडर और 70 कर्मियों ने संभाला मोर्चा
मुख्य अग्निशमन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार आग बुझाने के लिए लगभग 17 फायर टेंडर, वाटर बाउजर, दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और करीब 70 अग्निशमन कर्मियों को मौके पर लगाया गया था।
रेस्क्यू अभियान कई घंटों तक चला और फायर टीमों ने ऊंची मंजिलों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन ने इस ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बताया क्योंकि आग तेजी से फैल रही थी।
फायर अलार्म सिस्टम नहीं कर रहा था काम
जांच के दौरान कई निवासियों ने समिति को बताया कि घटना के समय फायर अलार्म सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा था। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सोसाइटी में फायर सेफ्टी सिस्टम का रखरखाव लंबे समय से संतोषजनक नहीं था।
रिपोर्ट में यह बात गंभीर चिंता का विषय बताई गई है कि इतनी बड़ी हाईराइज सोसाइटी में सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह भरोसेमंद नहीं थी।
अवैध निर्माण बना सबसे बड़ा बाधक?
जांच समिति की रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि सोसाइटी के खुले क्षेत्रों और फायर ड्राइव-वे में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण और अवरोध खड़े कर दिए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार टावर-डी के सामने विकसित ग्रीन एरिया, स्विमिंग पूल और क्लब हाउस क्षेत्र में बाउंड्री वॉल और अस्थायी संरचनाएं बनाई गई थीं। प्रथम दृष्टया यह माना गया कि इन अवरोधों की वजह से फायर ब्रिगेड वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और राहत एवं बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फायर ड्राइव-वे पूरी तरह खुला होता तो रेस्क्यू ऑपरेशन और तेजी से हो सकता था।
शॉर्ट सर्किट से आग लगने की पुष्टि नहीं
विद्युत सुरक्षा विभाग ने फ्लैट संख्या डी-943 की तकनीकी जांच की। जांच में विद्युत आपूर्ति और एमसीबी सामान्य स्थिति में पाए गए।
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रथम दृष्टया आग सीधे विद्युत शॉर्ट सर्किट के कारण लगती नहीं दिखाई दी। हालांकि समिति आग लगने के वास्तविक कारणों का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाल सकी।
यानी अभी भी यह साफ नहीं हो पाया है कि आग आखिर किस वजह से लगी थी।
साजिश या जानबूझकर आग लगाने के सबूत नहीं
सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच समिति ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रकार की साजिश या जानबूझकर आग लगाए जाने के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं।
हालांकि समिति ने इस मामले में स्थानीय पुलिस और तकनीकी एजेंसियों से विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की है ताकि आग के वास्तविक कारणों का अंतिम रूप से पता लगाया जा सके।
फायर सेफ्टी स्टाफ और रिकॉर्ड भी नहीं मिले
मुख्य अग्निशमन अधिकारी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सोसाइटी में स्थापित फायर सेफ्टी सिस्टम के रखरखाव, प्रशिक्षित फायर सेफ्टी स्टाफ और संबंधित एजेंसियों का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
इस तथ्य ने सोसाइटी प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच समिति के बड़े सुझाव
समिति ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं—
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सभी समूह आवासीय और व्यावसायिक भवनों से अवैध निर्माण तुरंत हटाए जाएं।
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फायर ड्राइव-वे और ओपन एरिया को पूरी तरह अवरोधमुक्त रखा जाए।
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सभी सोसाइटियों में फायर सेफ्टी सिस्टम का नियमित निरीक्षण और रखरखाव अनिवार्य हो।
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सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर डेवलपर, RWA और AOA तत्काल कार्रवाई करें।
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हर सोसाइटी में प्रशिक्षित फायर सेफ्टी स्टाफ की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
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फायर अलार्म, हाइड्रेंट सिस्टम और अग्निशमन उपकरणों को हमेशा कार्यशील स्थिति में रखा जाए।
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समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाए।
अब इस रिपोर्ट के बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या NCR की हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले लोग वास्तव में सुरक्षित हैं? और क्या प्रशासन अब ऐसी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करेगा?
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