Monday, July 13, 2026

अलीगंज अग्निकांड के बाद बड़ा एक्शन: जिस इमारत में लगी थी आग, अब 15 दिन में होगी ध्वस्त; LDA ने चस्पा किया आदेश

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अवैध व्यावसायिक भवन को घोषित किया अवैध; 15 दिन की मोहलत, नहीं हटाया निर्माण तो प्राधिकरण करेगा ध्वस्तीकरण और वसूलेगा पूरा खर्च।

noida , Latest Updated On - Jul 10 2026 | 08:38:00 AM
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लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एमएस-102 भूखंड पर बने उस व्यावसायिक भवन, जहां हाल ही में भीषण अग्निकांड हुआ था, को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है। भवन मालिकों को 15 दिन के भीतर स्वयं निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

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अलीगंज में हुए चर्चित अग्निकांड के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उस व्यावसायिक भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया है, जिसमें आग लगने की घटना हुई थी। विहित प्राधिकारी न्यायालय ने भवन को अवैध निर्माण घोषित करते हुए संबंधित पक्षों को 15 दिनों के भीतर स्वयं निर्माण हटाने का निर्देश दिया है।

 

यदि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं की जाती है तो एलडीए स्वयं भवन का ध्वस्तीकरण करेगा और इस पूरी कार्रवाई में आने वाला खर्च भी संबंधित पक्षों से वसूला जाएगा।

एलडीए के अनुसार यह कार्रवाई अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित भूखंड संख्या एमएस-102 पर निर्मित व्यावसायिक भवन के संबंध में की गई है। इसी भवन में हाल ही में अग्निकांड की घटना सामने आई थी, जिसके बाद निर्माण की वैधता और स्वीकृत मानकों की जांच शुरू की गई थी।


किन लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई

लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला एवं अन्य द्वारा उक्त भूखंड पर अवैध रूप से व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया गया था। निर्माण की वैधता की जांच के बाद प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की।

23 जून को जारी हुआ था पहला नोटिस

प्राधिकरण की ओर से 23 जून 2026 को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की धारा 27(1) के अंतर्गत नोटिस जारी किया गया था। इसमें संबंधित पक्षों को 15 दिनों के भीतर निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

एलडीए ने नोटिस की प्रति भवन पर चस्पा करने के साथ-साथ संबंधित पक्षों को, जो उस समय जेल में थे, वहां भी उपलब्ध कराई थी ताकि उन्हें पूरी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी मिल सके।


सुनवाई के दौरान क्या हुआ

मामले की पहली सुनवाई 7 जुलाई 2026 को विहित प्राधिकारी न्यायालय में हुई। इस दौरान विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता ने आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर न्यायालय ने एक दिन की मोहलत दी।

इसके बाद 8 जुलाई 2026 को विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति न्यायालय में प्रस्तुत की गई। इस पर एलडीए के प्रवर्तन जोन-4 ने अपना जवाब दाखिल किया।

9 जुलाई 2026 को न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण किया।


10 जुलाई को आया अंतिम फैसला

सभी तथ्यों और अभिलेखों की समीक्षा के बाद 10 जुलाई 2026 को विहित प्राधिकारी न्यायालय ने व्यावसायिक भवन को अवैध निर्माण घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया।

आदेश जारी होने के तुरंत बाद प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और भवन पर ध्वस्तीकरण आदेश की प्रति चस्पा कर दी।


15 दिन की अंतिम चेतावनी

एलडीए ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पक्षों को 15 दिनों के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाना होगा। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भवन नहीं हटाया गया तो लखनऊ विकास प्राधिकरण अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। साथ ही पूरी कार्रवाई में होने वाला खर्च भी संबंधित भवन स्वामियों से नियमानुसार वसूला जाएगा।

प्राधिकरण का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा और निर्माण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ इसी प्रकार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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